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सोहराबुद्दीन के भाई की याचिका पर सुनवाई शुरू करेगा बॉम्बे हाई कोर्ट

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे पांच पुनरीक्षण याचिकाओं में से चार पर सभी पक्षों की दलीलों के एक बड़े हिस्से की सुनवाई कर चुकी थीं, तभी जजों को आवंटित काम-काज बदल दिए गए

Updated On: Apr 25, 2018 09:16 PM IST

Bhasha

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सोहराबुद्दीन के भाई की याचिका पर सुनवाई शुरू करेगा बॉम्बे हाई कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट जून महीने से सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख और सीबीआई की पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगा. रुबाबुद्दीन शेख की ओर से दायर तीन याचिकाओं और सीबीआई की दो याचिकाओं पर सुनवाई आंशिक रूप से हुई थी. तभी इस साल फरवरी में बॉम्बे हाई कोर्ट में कुछ जजों को आबंटित काम-काज अचानक बदल दिए गए.

बहरहाल, जस्टिस नितिन सांबरे की एकल पीठ ने बुधवार को इन याचिकाओं को उठाया और कहा कि इन पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने की समयतालिका इस साल 20 जून को तय की जाएगी. जस्टिस सांबरे ने इस मामले में आरोपों से बरी किए गए पूर्व आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन की मामले में तत्काल सुनवाई करने की अपील को खारिज कर दिया. पांडियन ने अगले महीने प्रशिक्षण के लिए कनाडा जाने की इजाजत मांगी थी.

जस्टिस डेरे याचिकाओं पर रोजाना आधार पर सुनवाई कर रही थीं

फरवरी में काम-काज में परिवर्तन के वक्त जस्टिस रेवती मोहित डेरे पुनरीक्षण याचिकाओं पर रोजाना आधार पर सुनवाई कर रही थीं. पीठ ने पांच में से तीन याचिकाओं पर अपनी सुनवाई पूरी कर ली थी.

रुबाबुद्दीन शेख ने पुनरीक्षण याचिकाएं दायर कर आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा, दिनेश एमएन और राजकुमार पांडियन को बरी करने के फैसले को चुनौती दी थी. जस्टिस रेवती मोहिते डेरे उन पुनरीक्षण याचिकाओं पर रोजाना आधार पर सुनवाई कर रही थीं. वह गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी एनके अमीन और राजस्थान के पुलिस कांस्टेबल दलपत सिंह राठौर को बरी करने के फैसले के खिलाफ दायर सीबीआई की दो पुनरीक्षण याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रही थीं.

फरवरी में जजों को आवंटित काम-काज बदल दिए गए

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे पांच पुनरीक्षण याचिकाओं में से चार पर सभी पक्षों की दलीलों के एक बड़े हिस्से की सुनवाई कर चुकी थीं. तभी 24 फरवरी को उनके समेत जजों को आवंटित काम-काज बदल दिए गए.

वंजारा, अमीन, पांडियन और दिनेश का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी अगले ही दिन अपनी दलील पूरी करने वाले थे. और अदालत उसके बाद वंजारा को बरी करने के अदालती फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दलीलों की सुनवाई करने वाली थी. काम-काज में इस परिवर्तन से अटकलों का बाजार गर्म हुआ था, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने इसे एक नियमित कवायद बताया था.

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