S M L

मध्य प्रदेश उपचुनाव: किसानों के गुस्से में हल्के में लेना भारी पड़ा शिवराज को

दिसंबर के विधानसभा चुनावों के पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों इस उपचुनाव को जीत कर अपने अपने विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक जीत अर्जित करना चाहते थे

Updated On: Mar 03, 2018 07:52 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

0
मध्य प्रदेश उपचुनाव: किसानों के गुस्से में हल्के में लेना भारी पड़ा शिवराज को
Loading...

मध्य प्रदेश विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव को दिसंबर में होने वाले चुनावों से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा था. बुधवार को कांग्रेस ने मुंगावली और कोलारस उपचुनावों में शानदार जीत हासिल करके दिसंबर के फाइनल से पहले का सेमीफाइनल जीत लिया है.

इन दोनों सीटों पर जीत के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने राज्य में लगातार चार उपचुनाव जीत लिए हैं वो भी केवल 10 महीनों के भीतर. मुंगावली और कोलारस से पहले पार्टी ने 2017 में अटेर और खजुराहो की सीटों पर सफलता प्राप्त की थी.

राज्य में 14 साल से शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी के लिए ये एक बड़ी हार है क्योंकि कोलारस और मुंगावली उपचुनावों को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए दिसंबर के विधानसभा चुनावों से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा था. इन सीटों के चुनाव परिणामों ने दोनों पार्टियों को उनकी जमीनी हकीकत से रुबरु करवा दिया है.

क्या शिवराज सिंह चौहान की चमक फीकी पड़ रही है?

सीएम के ताबड़तोड़ दौरे, उनके मंत्रियों का प्रचार, प्रशासनिक अमले की मदद, किसान महासम्मेलन में किसानों को किए गए वायदे, मंत्रिपरिषद में बदलाव और भवांतर भुगतान योजना जैसे उपाय भी यहां बीजेपी की नैया पार लगाने में सफल नहीं हो सके और पार्टी दोनों सीटें हार गई.

भोपाल के जंबूरी मैदान में किसान महासम्मेलन में 12 फरवरी को दिए गए अपने भावुक भाषण के दौरान शिवराज ने कहा था कि 'संकट की घड़ी में ही नेता की पहचान होती है, मैं रोनेवाला सीएम नहीं हूं, आपलोग ओलवृष्टि से हुए नुकसान की चिंता मत कीजिए, मैं आप लोगों के साथ हूं किसान भाइयों.' लेकिन उपचुनाव के नतीजे बताते हैं कि मुंगावली और कोलारस के किसानों ने शिवराज की इस अपील को कोई तवज्जो नहीं दी.

उपचुनाव परिणामों की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरुण यादव ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीच के दौरान बताया कि शिवराज सिंह के प्रभाव, उनके कैबिनेट मंत्रियों के धुआंधार प्रचार, पूरे प्रशासनिक अमले की मदद, धन,बल और फर्जी वोटरों के बावजूद बीजेपी दोनों सीटों के वोटरों का विश्वास नहीं जीत सकी. यादव के अनुसार मतदाताओं ने विकास के नाम पर शिवराज के बड़े झूठे वादों और बीजेपी को नकार दिया है और अब मध्य प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है जिसे कांग्रेस पार्टी देने के लिए तैयार है.

तीन बार से लगातार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान की छवि किसान और गरीब हितैषी है

कांग्रेस ने उपचुनाव की दोनों सीटों मुंगावली और कोलारस को बचाने में सफलता प्राप्त की है. मुंगावली में कांग्रेस के ब्रजेंद्र सिंह यादव ने बीजेपी के बाई साहब यादव को 2123 वोटों से और कोलारस में महेंद्र यादव ने बीजेपी के देवेंद्र जैन को 8086 वोटों से पराजित किया. 2013 के विधानसभा चुनावों के दौरान इन दोनों सीटों पर भी कांग्रेस का ही कब्जा था. मुंगावली से कांग्रेस के महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने उस समय ये सीट रिकार्ड 20,765 वोटों से जीती थी और कोलारस पर राम सिंह यादव ने कब्जा जमाया था. इन दोनों नेताओं के निधन की वजह से ये सीटें खाली हुई थीं और यहां उपचुनाव करवाया गया था.

इस हार ने मध्य प्रदेश के कृषि संकट पर फिर से ध्यान दिला दिया है. उपचुनाव के परिणाम प्रदेश में रहने वाले किसानों के बुरे हालातों की ओर इशारा कर रहे हैं. पिछले साल जून में राज्य का मंदसौर जिला बड़े पैमाने पर भीड़ द्वारा की गई हिंसा का केंद्र बिंदु बना हुआ था. सरकार के लाख आश्वासनों के बावजूद भी कोलारस और मुंगावली के किसान अपने गुस्से को भूल नहीं सके, नतीजा बीजेपी के खिलाफ रहा.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद्दे का हल निकालने के लिए बहुप्रचारित योजना ‘मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना' की शुरुआत की. इस योजना के अंतर्गत किसानों को उनके उस नुकसान की भारपाई करना था जो उनकी फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर को पूरा करता. लेकिन इस योजना से किसान खुश नहीं थे क्योंकि इससे महज 6.4 फीसदी किसानों को ही फायदा पहुंच रहा था. किसानों के गुस्से को शांत करने के लिए कोलारस और मुंगावली उपचुनावों से पहले सरकार ने एक किसान महासम्मेलन का आयोजन किया था.

भावांतर योजना की शुरुआत से ही इस योजना की आलोचना किसान, कृषि विशेषज्ञ और राजनीतिक विरोधी कर रहे थे. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कृषि मंत्री रह चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री ने फरवरी में ही फ़र्स्टपोस्ट को दिए एक साक्षात्कार में सरकार की इस योजना को किसानों के लिए छलावा बताते हुए और भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि इस योजना का आने वाले चुनावों पर व्यापक असर पड़ेगा.

2003 के राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी के बिजली,पानी और सड़क के नारे ने राज्य से कांग्रेस की सत्ता को डेढ़ दशक तक दूर रखा लेकिन इस बार ये नारे जनात को प्रभावित करने में नाकाम साबित हो रहे हैं. मुंगावली और कोलारस के वोटरों ने बीजेपी के खिलाफ ये कहते हुए वोट दिया कि पिछले एक दशक से यहां पर कोई विकास नहीं हुआ है.

सीपीएम के राज्य सचिव और ऑल इंडिया किसान सभा के बादल सरोज के मुताबिक किसानों को लुभाने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने उपचुनावों से पहले कई बड़ी घोषणाएं की लेकिन किसानों ने उनकी बातों पर कान देना उचित नहीं समझा क्योंकि हमेशा उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता.

भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंदसौर हिंसा के विरोध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पुतला फूंका (फोटो: पीटीआई)

भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंदसौर हिंसा के विरोध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पुतला फूंका (फोटो: पीटीआई)

शिवराज सरकार ने आरएसएस के अलर्ट की अनदेखी की

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने भी राज्य में बढ़ रहे कृषक असंतोष पर राज्य सरकार को चेतावनी जारी की थी लेकिन उसकी अनदेखी की गई. आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ और भारतीय किसान संघ दोनों ने सरकार को जमीनी हकीकत से रूबरू कराते हुए सचेत करने की कोशिश की थी.

उपचुनावों से पहले आरएसएस के एक पदाधिकारी ने फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए खुलासा किया था कि राज्य के किसानों में शिवराज सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है. शीर्ष नेतृत्व और आम जनता के बीच संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है. इन दोनों के बीच में अधिकारी आ गए हैं और ये अधिकारी मुख्यमंत्री के किए गए वायदों को पूरा करने में अक्षम साबित हुए हैं.

आरएसएस पदाधिकारी के अनुसार जमीनी स्तर का बीजेपी का कार्यकर्ता भी इससे निराश है वो भी इनसे दूरी बना कर चल रहा है, ऐसे में ये सभी कारक उपचुनावों में बीजेपी के लिए परेशानी का सबब निश्चित रुप से बनेंगे. संघ जमीनी नब्ज पहचानने में हमेशा से ही आगे रहा है और हाल ही में गुजरात चुनावों में संघ ने कांग्रेस के कड़े मुकाबले से बीजेपी को पार पाने में इसी कला का उपयोग करते हुए मदद की थी.

संकट से पार पाने के लिए किए जा रहे उपाय

दिसंबर के विधानसभा चुनावों के पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों इस उपचुनाव को जीत कर अपने अपने विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक जीत अर्जित करना चाहते थे. ऐसे में इस हार से बीजेपी को बड़ा झटका लगा है, दीवार पर लिखी इबारत को साफ-साफ पढ़ा जा सकता है.

शिवराज सरकार ने अपनी तीसरी पारी के आखिरी बजट में 2,04,642 करोड़ के कुल बजट में से किसानों के लिए 37,498 करोड़ की राशि आवंटित की है वहीं सिंचाई के लिए 10,928 करोड़ रुपए दिए गए हैं. चुनावों को देखते हुए शिवराज सरकार ने एक बार फिर से अगले पांच सालों से किसानों की आय को दो गुणा करने का भरोसा दिलाया है.

SHIVRAJ JYOTIRADITYA

शिवराज सिंह चौहान-ज्योतिरादित्य सिंधिया

हालांकि हार के बावजूद मध्यप्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान कह रहे हैं उनकी पार्टी राज्य में चौथी बार सरकार बनाने में सफल होगी. चौहान के मुताबिक वो उपचुनाव की हार को स्वीकार करते हुए आनेवाले चुनावों में और मेहनत करेंगे और उनकी पार्टी विकास के आधार पर एक बार फिर से लोगों के भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेगी.

कांग्रेस में उत्साह का संचार

सत्तारुढ़ बीजेपी के साथ मध्यप्रदेश में कड़ी लड़ाई में उलझी कांग्रेस को एक युवा तुर्क मिल गया है. ये हैं गुणा से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादिय सिंधिया जिन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाली दोनों सीटों के उपचुनाव के प्रचार प्रसार में पार्टी का नेतृत्व किया. आने वाले समय में सिंधिया राज्य के विधानसभा चुनावों में जीत की रणनीति बनाने में कांग्रेस के लिए मुख्य कड़ी साबित होंगे.

कांग्रेस के महासचिव और मध्य प्रदेश के इंचार्ज दीपक बाबरिया कहते हैं कि 'मैंने आपको पहले ही कहा था कि कांग्रेस सेमीफाइनल अच्छी मार्जिन के साथ जीतेगी और ये हुआ. लोग शिवराज सिंह चौहान बड़े और झूठे वादों से तंग आ गए हैं ऐसे में कांग्रेस विधानसभा चुनावों का फाइनल मैच भी आसानी से जीतेगी.'

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi