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सृजन स्कैम: 12 सालों में 6 लोगों की रहस्मय मौतें, पुलिस बनी रही मौनी बाबा

आशंका है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, सृजन स्कैम के कई और बल्लेबाजों के विकेट गिरेंगे

Updated On: Aug 23, 2017 10:31 AM IST

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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सृजन स्कैम: 12 सालों में 6 लोगों की रहस्मय मौतें, पुलिस बनी रही मौनी बाबा

सृजन स्कैम की नींव पड़ने से लेकर परवान चढ़ने तक 6 रहस्मय मौतें हुईं जिसमें दारोगा रैंक का एक पुलिस अधिकारी भी शामिल है. मरने वालों का डायरेक्ट और इनडायरेक्ट संबंध शातिर घोटालेबाजों से किसी न किसी मुकाम पर किसी न किसी वजह से रहा है.

इनमें से कम से कम तीन मृतकों के परिवार वालों ने पुलिस को रो-रो कर साक्ष्य के साथ समझाने का प्रयास किया कि ‘हमारे प्रियजनों की हत्या की गई है’. दोषियों को पकड़ने के लिए अधिकारियों के सामने भी उन लोगों ने विनती की.

लेकिन चांदी की जूती ने पुलिस का दिल पिघलने से रोक दिया. हालांकि डीएसपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी ने तर्क दिया कि ‘लालच, डर और दबाव तीनो ने मिलकर हमलोगों को अपने कर्तव्य के निर्वहन करने से रोके रखा’. अफसर ने विस्तार से कुछ इस प्रकार समझाया, ‘इस महंगाई में पैसे की सबको जरूरत है, दूसरा, मरने से सबको डर लगता है और तीसरा जल में रहकर मगर से बैर लेना बेहद जोखिम वाली बात होती है’.

पहली रहस्मय मृत्यु सुनील कुमार की पटना के एक होटल में हुई थी. उस समय एक अखबार के कोने में छोटी-सी खबर छपी थी कि ‘भागलपुर के सृजन महिला विकास सहयोग समिति के सचिव की रहस्यमय हत्या’. सूत्र बताते हैं कि सुनील कुमार मनोरमा देवी के दूर के रिश्तेदार थे.

उन्होंने सृजन लूटपाट में काफी माल साफ कर लिए थे. पैसे का हिसाब-किताब मांगने पर आनाकानी करते थे. उनको समिति से हटाना भी सरल नहीं था क्योंकि फाउंडर मेंबर होने के कारण उन्होने सृजन पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली थी.

2006-07 में हुए इस कत्ल में नेता जी ने इसका पुख्ता प्रबंध किया ताकि धन की गंगोत्री मनोरमा देवी पर आंच न आए. कहते हैं उनकी मदद से ही पुलिस ने एक पेशेवर अपराधी को कह कर सुनील का परलोक का टिकट कटवा दिया था.

एक के बाद एक घोटालेबाजों के कई टार्गेट

आरोप है कि पुलिस ने एक वेटर को पीटकर कुबूल करवाया कि लूट की नीयत से होटल में ठहरे सुनील कुमार की उसने हत्या की. दबी जुबान में चर्चा यहां तक है कि केस को दफन करने के लिए नेता जी के कहने पर मनोरमा देवी ने उस वेटर की पत्नी को 20 लाख रुपए नकद दिए.

घोटालाबाजों की दूसरी टारगेट डौली नाम की खूबसूरत विधवा महिला थी जो भागलपुर में सृजन के शोरूम में सेल्स गर्ल का काम करती थी. 2008 में अचानक एक दिन उसकी तबियत बिगड़ती है और अस्पताल के रास्ते भगवान को प्यारी हो जाती है. कहते हैं कि डौली के पिता पुलिस थाने तक केस को न ले जाएं इसके लिए नेताजी ने तब के एक स्वजातीय पुलिस अधिकारी की सेवा ली थी और केस को रफा-दफा करने के एवज में उस सरकारी मुलाजिम को मुंहमांगी रकम भी दी थी.

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सृजन स्कैम की सरगना मरहूम मनोरमा देवी के जवान बेटे की मौत ओडिसा के भुवनेश्वर में एक ‘रोड एक्सीडेंट’ में कुछ साल पहले हुई थी. बचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किया गया. तत्कालीन बीजेपी सांसद ने एयर एम्बुलेंस का भी प्रबंध करवाया था. भागलपुर की सजग जनता आज तक विश्वास करने को तैयार नहीं है कि उनकी की मौत दर्घटना में हुई है.

कोआपरेटिव सोसाइटी से जुड़े भागलपुर के याजेश मंडल तो यहां तक कहते हैं कि मनोरमा देवी को पता था कि बेटे की मौत स्वभाविक नहीं है बल्कि उसकी निर्मम हत्या की गई है. फिर भी पैसे और दिखावटी प्रतिष्ठा की दीवानी मनोरमा ने बेटे की मर्डर को कोई तवज्जो नहीं दिया.

खुलासे से पहले घोटालेबाजों सजाते थे महफिल

जून, 2016 में भागलपुर के एक डॉक्टर के आलीशान घर में दो जवान नौकरानियों की रहस्मय मौत हो गई. दोनों सगी बहने थीं. कहते हैं कि डॉक्टर के घर रात में सृजन स्कैम के पर्दाफाश के पहले तक रंगीन महफिल लगती थी. शराब और शबाब का शौकीन जिले का एक रसूखदार अधिकारी भी देर रात तक आनंद लेता था. डॉक्टर लाख प्रयास के बावजूद मृतकों के पिता को केस करने से रोक नहीं पाए. रंगीन मिजाज ऑफिसर ने हत्या की केस को आत्महत्या में तब्दील करवा दिया.

घोटालेबाजों ने सबसे जघन्य तरीके से तिलकामांझी थाने के एसएचओ विजय कुमार शर्मा की हत्या मार्च 20, 2017 को उन्हीं की क्षेत्र में 3 बजे सुबह में किराए के शूटरों से करवाई. साफ होता जा रहा है कि जांबाज दारोगा का कत्ल सृजन स्कैम को दबाने की नीयत से किया गया था. फौरेंसिक रिपोर्ट से हत्या की पुष्टि हुई है.

घोटालाबाजों ने प्रशासन के कुछ दुष्टों को मिलाकर अपनी तरफ से इस जघन्य मर्डर को दुर्घटना में परिवर्तित कराने का प्रयास किया. तीन घंटे के अंदर यानि उसी दिन सुबह 6 बजे तक बॉडी का पोस्टमार्टम से लेकर एमवीआई की रिपोर्ट तक तैयार करा ली गई.

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फायर ब्रिगेड मंगाकर खून के धब्बे मिटा दिए गए. और तो और, दुर्घटना को सही साबित करने के लिए जेसीबी मशीन की सहायता से उस पुलिस जीप को टेढ़ा-मेढ़ा किया गया जिसपर हत्या के समय शर्मा बैठे थे. लेकिन 19 मई को मृतक शर्मा की विधवा प्रियंका कुमारी के आवेदन पर नए डीआईजी विकास वैभव ने नए सिरे से जांच का आदेश दिया.

जांच के साथ आगे बढ़ सकता है मौतों का सिलसिला भी

इसी बीच 21 अगस्त को कल्याण विभाग के संतावन वर्षीय नाजीर महेश मंडल की भागलपुर अस्पताल में अचानक रहस्यमय मौत हो गई. इस मौत को उनके परिजन हत्या मान रहे हैं. भाई दिनेश मंडल ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि महेश मंडल को षडयंत्र के तहत सृजन स्कैम के राज को छिपाने-दबाने की नीयत से मार दिया गया है.

‘पहले तो पुलिस ने उन्हें हक भर पीटा और फिर मरने के लिए छोड़ दिया’. ये सही बात है कि मंडल के पास सृजन स्कैम में मलाई मार चुके कई नेताओं और ऑफिसर के खिलाफ सबूत थे.

आशंका व्यक्त की जा रही है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, सृजन स्कैम के कई और बल्लेबाजों के विकेट गिरेंगे. क्योंकि इसका कप्तान अपने को गजब का ताकतवर मानता है. छपी खबरों के मुताबिक सीबीआई जांच रोकने का कसरत भी उसने शुरू कर दिया है. परंतु सीएम नीतीश कुमार का कहना है कि कोई भी बचने वाला नहीं है चाहे वो कितना ही तीसमार खान क्यों न हो.

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