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सीताराम येचुरी ने दो दिनों में दो बार दिया इस्तीफा, नामंजूर

सूत्रों का कहना है कि बीते 2 दिनों में येचुरी ने 2 बार पोलित ब्यूरो को इस्तीफा भेजा है, लेकिन पोलित ब्यूरो ने दोनों ही बार उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया है

FP Staff Updated On: Jan 22, 2018 04:05 PM IST

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सीताराम येचुरी ने दो दिनों में दो बार दिया इस्तीफा, नामंजूर

सीताराम येचुरी 2019 के चुनाव कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर लड़ना चाहते हैं लेकिन प्रकाश करात नहीं चाहते कि सीपीआई (एम) कांग्रेस का हाथ थामे. इस पर दोनों नेताओं के बीच तल्खी बढ़ती ही जा रही है. सूत्रों का कहना है कि बीते 2 दिनों में येचुरी ने 2 बार पोलित ब्यूरो को इस्तीफा भेजा है, लेकिन पोलित ब्यूरो ने दोनों ही बार उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया है.

सूत्रों का कहना है कि येचुरी ने इसलिए इस्तीफा देने का फैसला लिया, क्योंकि सेंट्रल कमिटी ने उनके विचारों को स्वीकार नहीं किया था. हालांकि, अपने रेजोल्यूशन में येचुरी ने कहीं भी कांग्रेस के साथ आधिकारिक रूप से गठबंधन की बात नहीं कही थी.

सीताराम येचुरी ने कहा, 'ड्राफ्ट रेजोल्यूशन पर फैसला लेने के लिए शनिवार और रविवार को पोलित ब्यूरो की मीटिंग चल रही थी. दोनों दिन मैंने अपना इस्तीफा पोलित ब्यूरो सेंट्रल कमिटी के सामने रखा. लेकिन, पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमिटी ने पार्टी की एकता के लिए सर्वसम्मति से मेरा इस्तीफा नामंजूर कर दिया. इसलिए पार्टी की भावना का मान रखते हुए मैं पद पर बना हुआ हूं. इस महाभारत का कुरुक्षेत्र कांग्रेस पार्टी है.'

केंद्रीय समिति की बैठक में दोनों नेताओं के प्रस्ताव पर वोटिंग कराई गई, जिसमें करात का गुट 55-31 के अंतर से जीत गया. पास किए गए इस प्रस्‍ताव को अप्रैल में हैदराबाद में होने वाली सीपीएम-कांग्रेस की बैठक में औपचारिक रूप से अपनाने के लिए रखा जाएगा.

केंद्रीय कमेटी की तीन दिन तक चली बैठक में पार्टी के दोनों धड़ों के बीच का विवाद उभरकर सामने आया. इस दौरान प्रकाश करात और सीताराम येचुरी के बीच भी मतभेद नजर आया.

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि येचुरी के महासचिव का पद धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है. प्रकाश करात के ड्राफ्ट को अप्रैल की मीटिंग में मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है क्योंकि, सेंट्रल कमिटी में केरल यूनिट की सशक्त मौजूदगी है और केरल यूनिट पहले से ही करात के समर्थन में है.

दोनों प्रस्ताव में यह कहा गया कि बीजेपी और आरएसएस ‘मौजूदा समय में देश के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं’ और इनको पराजित करने की जरूरत है. लेकिन येचुरी ने अपने प्रस्ताव में ये भी लिखा था कि वो देश की सभी लेफ्ट और लोकतांत्रिक शक्तियों (कांग्रेस सहित) का एक साथ इस्तेमाल चाहते हैं.

इसके पहले 1975 में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी. सीपीएम के तत्कालीन महासचिव पी सुंदरय्या के प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था, तब उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.

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