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दिल्ली के एलजी पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों अपनाया सख्त रवैया?

सुप्रीम कोर्ट ने एलजी को फटकार लगाते हुए सख्त लहजे में पूछा है कि दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन के लिए कौन जिम्मेदार है? आप खुद को दिल्ली का 'सुपरमैन' समझते हैं?

Updated On: Jul 13, 2018 10:05 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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दिल्ली के एलजी पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों अपनाया सख्त रवैया?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन और निस्तारण में नाकाम रहने पर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने एलजी को फटकार लगाते हुए सख्त लहजे में पूछा है कि दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन के लिए कौन जिम्मेदार है?

सुप्रीम कोर्ट ने एलजी से पूछा कि आप खुद को दिल्ली का सुपरमैन समझते हैं. आपको लगता है कि आपको कोई छू नहीं सकता है. आप एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं और आपके पास काम आता है तो आप सिर्फ पास कर देते हैं?

आप अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही दूसरे पर टाल नहीं सकते. दिल्ली में कूड़े के ढेर की ऊंचाई कुतुब मीनार के बराबर पहुंच गई है. आप बताइए कि भलस्वा, गाजीपुर और ओखला में कूड़े के पहाड़ को कब तक हटाएंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने एलजी से सख्त लहजे में पूछा कि आप दिल्ली सरकार की किसी मीटिंग में भी नहीं जाते हैं. आप अपने स्वास्थ्य मंत्री को भी कुछ नहीं समझते. आप हर मामले को लेकर सीएम को घसीट लेते हैं. अब आपको सिंपल अंग्रेजी में बताना होगा कि दिल्ली में कूड़े का पहाड़ कब हटेगा?

अबतक आपने इस मसले पर क्या किया इससे हमारा कोई मतलब नहीं है. आप कूड़े के पहाड़ हटाने को लेकर एक टाइमलाइन और स्टेटस रिपोर्ट बुधवार तक कोर्ट को सौंपें. इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को खुद ही संज्ञान में लेते हुए दिल्ली में फैलते डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया को लेकर सुनवाई शुरू की है. पिछले मंगलवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन को लेकर दिल्ली सरकार से पूछा था कि दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन की जिम्मेदारी किसकी है? दिल्ली के सीएम की, दिल्ली के एलजी की या फिर केंद्र सरकार की?

एलजी के प्रति जवाबदेह है दिल्ली नगर निगम 

ARVIND KEJRIVAL, LG ANIL, SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि दिल्ली नगर निगम एलजी के प्रति जवाबदेह है. सुप्रीम कोर्ट में दो जजों न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने एलजी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद को भलस्वा, गाजीपुर और ओखला से कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए एक निश्चित समय सीमा बताने को कहा.

एलजी की ओर से पेश पिंकी आनंद ने कोर्ट से कहा कि जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और उचित निर्देश के बाद ही हम अदालत को समय सीमा बताएंगे. बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजालिव्स ने अदालत को बताया था कि कूड़ा प्रबंधन को लेकर गुरुग्राम नगर निगम अच्छा काम रहा है.

गुरुग्राम नगर निगम की इस तकनीक को दिल्ली में भी लागू किया जाना चाहिए. इस पर अदालत ने गुरुग्राम नगर निगम के डिप्टी डायरेक्टर को कूड़ा प्रबंधन और निस्तारण के बारे में अदालत को बताने को कहा है. साथ ही एलजी को गुरुग्राम के डिप्टी डायरेक्टर से सलाह लेने को भी कहा है.

पिछली सुनवाई के दौरान ही एलजी की तरफ से अदालत को एक हलफनामा दाखिल किया गया था. इस हलफनामे में बताया गया था कि आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर मनोज दत्ता की अध्यक्षता वाली साइंटिकफिक एडवाइजरी कमेटी ने कूड़े के प्रबंधन और निस्तारण पर एक रिपोर्ट तैयार की है, जिस पर अमल होना शुरू हो गया है.

साथ ही दिल्ली में तीनों कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई पहले से कम करने की दिशा में कदम उठा लिए गए हैं. अगले कुछ महीनों में कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई को पांच से सात मीटर कम कर लिया जाएगा.

पिछले तीन-चार सालों से दिल्ली में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अक्सर तकरार की खबर आती रही है. एलजी और दिल्ली सरकार के बीच टकराव का खामियाजा दिल्ली की जनता को भुगतना पड़ रहा है. कई ऐसी योजनाएं और कई ऐसे फैसले दोनों के टकराव के कारण बाधित हो रखे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का एलजी पर कड़ा रुख अख्तियार करना एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है.

पहली बार एलजी को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

Supreme Court 

पिछले तीन-चार सालों से ज्यादातर दिल्ली सरकार की ही आलोचना होती रही है. कोर्ट और राजनीतिक बयानों में भी केजरीवाल सरकार को ही दिल्ली के हर फैसले के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है. शायद पिछले कुछ सालों में यह पहली बार हुआ होगा जब सुप्रीम कोर्ट ने एलजी को फटकार लगाई है.

बता दें कि चाहे वह मोहल्ला क्लीनिक का मसला हो या दिल्ली के नाले की साफ-सफाई का मसला हो या फिर दरवाजे पर ही राशन डिलीवरी का मसला हो. दिल्ली सरकार लगातार आरोप लगाती रही है कि इन तमाम नीतिगत फैसलों पर एलजी जानबूझ कर अड़ंगा लटका रहे हैं.

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट के बाद यह लगने लगा था कि दिल्ली सरकार और एलजी के बीच अब सब कुछ ठीक हो जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एलजी के अधिकारों के बीच एक लकीर खींचने का फरमान सुना दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद दिल्ली की जनता को लगा था कि अब दोनों के बीच तकरार खत्म हो जाएगी.

लेकिन, दिल्ली की जनता सुप्रीम कोर्ट के लकीर खींचने वाली जजमेंट के बाद भी एक-दो दिनों तक गलतफहमी में ही जीती रही. जिस तकरार की खत्म होने की खबर सुनकर दिल्ली की जनता एक-दो दिन चैन से सोती रही, उसके अगले ही दिन दोनों के बीच तकरार की खबर आ गई. ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर दोनों ने एक बार फिर से एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

पिछले तीन-चार सालों में शायद एक भी ऐसा दिन नहीं आया होगा जब दिल्ली की जनता को दोनों के बीच तकरार की खबर सुनने को नहीं मिली होगी. लेकिन, सवाल यह है कि दिल्ली में क्या इस तरह के टकराव पहले की सरकारों और एलजी के बीच भी हुआ करते थे? और अब सुप्रीम कोर्ट के एलजी पर सख्त रुख के बाद क्या दिल्ली सरकार और एलजी के बीच टकराव खत्म हो जाएंगे?

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