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मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: शिवसेना की कभी हां...कभी ना... क्यों?

कल तक सरकार के समर्थन में वोटिंग करने की बात करने वाली शिवसेना की रातों-रात की गई पल्टी से उसके भीतर की राजनीति पर भी सवाल खड़ा हो गया है

Updated On: Jul 20, 2018 01:22 PM IST

Amitesh Amitesh

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मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: शिवसेना की कभी हां...कभी ना... क्यों?

बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी शिवसेना का ढुलमुल रवैया एक बार फिर से सामने आ गया है. शिवसेना ने मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के वक्त लोकसभा से गैर हाजिर रहने का फैसला कर लिया है. शिवसेना के इस कदम को लेकर भी कई सवाल खडे हो रहे हैं क्योंकि एक दिन पहले ही शिवसेना की तरफ से व्हिप जारी कर अपने सभी सांसदों को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का साथ देने को कहा गया था.

शिवसेना की पलटती रणनीति

शिवसेना के लोकसभा में चीफ व्हिप चंद्रकांत खैरे की तरफ से जारी किए गए व्हिप में सभी सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने को कहा गया था. लेकिन, ऐन मौके पर शिवसेना की पल्टी को उसकी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

दरअसल, मोदी सरकार में शामिल होने के बाद से ही शिवसेना सरकार में शामिल होते हुए भी बीजेपी के खिलाफ बोलती रही है. लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी के साथ चुनाव लड़ चुकी शिवसेना का विधानसभा चुनाव 2014 में समझौता नहीं हो पाया था. लेकिन, हालात ऐसे बने कि विधानसभा चुनाव बाद बीजेपी और शिवसेना फिर एक साथ आ गए. शिवसेना ने बीजेपी को समर्थन भी दिया और राज्य की सरकार में शामिल भी हुई.

लेकिन, यहां भी हालात ऐसे रहे कि लगातार शिवसेना की तरफ से किसानों के मुद्दे से लेकर और भी कई मुद्दों पर बीजेपी की अपनी ही सरकार पर हमला होता रहा. तनातनी यहां तक पहुंच गई है कि अगले लोकसभा चुनाव में भी शिवसेना ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है.

शिवसेना कमजोर होगी या बीजेपी?

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से मुंबई दौरे के वक्त शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मुलाकात भी हुई. लेकिन, बात नहीं बन सकी. शिवसेना केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकार में रहते हुए भी सरकार के खिलाफ बोल रही है. बीजेपी के खिलाफ चुनाव लडने का फैसला कर चुकी है. शायद उसे लग रहा है कि इससे नुकसान बीजेपी को होगा और तब एक कमजोर बीजेपी के साथ वह अपनी शर्तों पर फिर से गठबंधन कर सकेगी.

लेकिन, इस तरह के हालात ने शिवसेना की भी खुद ही किरकिरी भी करा दी है. कल तक सरकार के समर्थन में वोटिंग करने की बात करने वाली शिवसेना की रातों-रात की गई पल्टी से उसके भीतर की राजनीति पर भी सवाल खड़ा हो गया है. क्या शिवसेना के चीफ व्हिप ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से अनुमति नहीं ली थी या फिर यह सबकुछ पहले से ही तय था जिस रणनीति के तहत शिवसेना ने पहले समर्थन देने और फिर समर्थन से इनकार कर दिया. यह सवाल अभी भी बना हुआ है.

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