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'दूध बेचकर' क्या सिंधिया का मुकाबला कर पाएंगे शिव पुत्र कार्तिकेय

सिंधिया की छवि साफ सुथरे युवा नेता होने के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनाव पूर्व प्रचार में भी काफी मेहनत करनी पड़ रही है

Dinesh Gupta Updated On: Jan 09, 2018 06:40 PM IST

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'दूध बेचकर' क्या सिंधिया का मुकाबला कर पाएंगे शिव पुत्र कार्तिकेय

मध्यप्रदेश में कोलारस और मुंगावली में विधानसभा उपचुनाव के लिए अभी चुनाव आयोग द्वारा तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है. तारीखों के ऐलान से पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दोनों सीटों को जीतने के लिए हर संभव प्रयास में जुट गए हैं.

मुंगावली और कोलारस कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है. ये दोनों विधानसभा क्षेत्र सिंधिया के व्यक्तिगत प्रभाव वाले क्षेत्र माने जाते हैं. सिंधिया की छवि काफी चमकदार मानी जाती है. विधानसभा के आम चुनाव में कोलारस मुंगावली की सीट पर भारतीय जनता पार्टी को सफलता नहीं मिली थी. कोलारस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व राम सिंह यादव और मुंगावली क्षेत्र का प्रतिनिधित्व महेंद्र सिंह कालूखेड़ा करते थे.

इन दोनों ही विधायकों का पिछले दिनों असामयिक निधन हो गया था. चित्रकूट विधानसभा के उपचुनाव में बीजेपी को मिली करारी शिकस्त के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोलारस और मुंगावली में किसी तरह का खतरा नहीं उठाना चाहते हैं. वह पिछले डेढ़ महीने से इन दोनों क्षेत्रों में लगभग रोज ही सभाएं और सरकारी कार्यक्रम कर रहे हैं. इन क्षेत्रों में विकास की रोज नई घोषणा की जा रही है.कोलारस विधानसभा क्षेत्र के सहरिया आदिवासियों के लिए हर महीने एक हज़ार रुपए नगद दिए जाने की योजना को भी लागू कर दिया गया था.

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इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मंत्रिमंडल के एक दर्जन से अधिक सदस्य दौरा और कार्यक्रम कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कोलारस और मुंगावली को अपना स्थाई ठिकाना बना लिया लिया है. सिंधिया की छवि साफ सुथरे युवा नेता की होने के कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को  चुनाव पूर्व प्रचार में भी काफी मेहनत करनी पड़ रही है.

सिंधिया की युवा छवि के मुकाबले में उन्होंने अपने बड़े पुत्र कार्तिकेय चौहान को जाति के मतदाताओं को साधने के लिए कोलारस में सक्रिय कर दिया है. कार्तिकेय ने कोलारस में धाकड़ और किरार समाज के मतदाताओं के बीच आम सभा कर सिंधिया पर जमकर निशाना साधा. कार्तिकेय ने अपने पिता शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा चलाई जा रही जन हितेषी योजनाओं की जमकर तारीफ की. कार्तिकेय ने सिंधिया पर निशाना साधते हुए कहा  कि अब राजतंत्र का जमाना नहीं है लोकतंत्र है.

क्या कार्तिकेय संभालेंगे शिवराज की राजनीतिक विरासत

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दो पुत्र हैं. कार्तिकेय सबसे बड़े हैं. उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और अब पिता की विरासत को संभाल रहे हैं. कार्तिकेय हाल ही में दो कारणों से चर्चा में बने हुए हैं पहला कारण है उनका फूलों की खेती करना और भोपाल में फूल बेचने के लिए दुकान खोलना. दूसरा कारण दूध का व्यवसाय है. कार्तिकेय ने विदिशा के अपने फार्म हाउस में दुग्ध उत्पादन का काम शुरु किया है. उनके फार्म हाउस में सौ से ज्यादा गाय हैं. भोपाल के दूध बाजार पर कब्जा जमाने के लिए उन्होंने सुधामृत नाम के अपने दूध ब्रांड का काफी आक्रमक प्रचार किया है.

प्रचार में अपने फार्म के दूध की शुद्धता यह कहकर बता रहे हैं कि उनका दूध, दूध से धुला हुआ दूध है. कार्तिकेय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुधनी में सक्रिय रहते हैं. यह पहला मौका है जब कार्तिकेय राज्य के किसी अन्य चुनाव में प्रचार कर रहे है. माना यह जा रहा है कि भविष्य में शिवराज सिंह चौहान की राजनीतिक विरासत को कार्तिकेय ही संभालेंगे. कार्तिकेय की पॉलिटिकल लॉन्चिंग के लिए सिंधिया के निर्वाचन क्षेत्र से अच्छी जगह कोई और हो नहीं सकती थी. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्तिकेय को कोलारस में प्रचार के लिए भेजा है.

संभावना यह भी प्रकट की जा रही है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कार्तिकेय बुधनी अथवा विदिशा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन दोनों स्थानों से चुनाव लड़ा था और जीते थे. विदिशा से चौहान सांसद भी रह चुके हैं. वर्तमान में इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कर रही हैं. राज्य में पिछले कुछ समय से यह चर्चाएं तेज है कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चौहान को पार्टी दिल्ली की राजनीति में सक्रिय कर सकती हैं.

आम चुनाव से पूर्व का सेमीफाइनल

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शिवराज सिंह चौहान-ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्यप्रदेश में विधानसभा के आम चुनाव इस साल के अंत तक होने हैं. चुनाव से पूर्व कोलारस और मुंगावली के विधानसभा उपचुनाव को आम चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है. यद्दपि कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश करने का कोई निर्णय अब तक नहीं लिया है. इसके बाद भी माना यह जा रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस बार मुकाबला सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगे.

सांसद सिंधिया मध्य प्रदेश के सिंधिया राजपरिवार के सदस्य हैं. उनके पिता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की गिनती मध्य प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसी नेताओं में होती थी. सिंधिया राजपरिवार की श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान में मुख्यमंत्री हैं. और यशोधरा राजे सिंधिया मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में खेल मंत्री हैं. गुना और शिवपुरी संसदीय क्षेत्र सिंधिया परिवार का परंपरागत संसदीय क्षेत्र माना जाता है. इस सीट पर सिंधिया परिवार का कोई भी सदस्य कभी भी पराजित नहीं हुआ है. राजमाता विजयाराजे सिंधिया जब तक जीवित रही उन्होंने भी इस संसदीय क्षेत्र को अपना कर्म-क्षेत्र बनाया.

विजयाराजे सिंधिया बीजेपी की ताकतवर नेता रही हैं. इस क्षेत्र में मतदाता सिंधिया परिवार से अलग कोई फैसला नहीं करते हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया इस संसदीय क्षेत्र से तीन चुनाव लड़ चुके हैं. उनके संसदीय क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जीतना काफी मुश्किल होता है. पार्टी को चुनाव जीतने के लिए कई जातिगत समीकरणों का सहारा भी लेना पड़ता है. कोलारस विधानसभा क्षेत्र पिछड़ा वर्ग बाहुल्य क्षेत्र है. इस क्षेत्र में धाकड़ और किरार जाति के अलावा यादव भी निर्णायक रहते हैं.

क्षेत्र में यादव मतदाताओं की संख्या लगभग 25,000 है. जबकि किरार और धाकड़ भी इतनी ही संख्या में मतदाता है. जबकि सहरिया आदिवासी मतदाताओं की संख्या भी लगभग 25 हजार है. सहरिया आदिवासी कांग्रेस का परंपरागत वोट माना जाता है. विधानसभा के पिछले आम चुनाव में कांग्रेस ने यादव को उम्मीदवार बनाकर चुनावी समीकरण अपने पक्ष में कर लिए थे. इस बार भारतीय जनता पार्टी सहरिया आदिवासी और धाकड़ किरार समाज को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रही है.

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