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मध्य प्रदेश: चुनाव से पहले आदिवासियों पर डोरे डाल रही है शिवराज सरकार

अनुसूचित जाति वर्ग की नाराजगी के बाद मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और उसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साल के अंत में होने वाले चुनाव के लिए आदिवासी मतदाताओं पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं.

Updated On: Apr 17, 2018 08:34 AM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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मध्य प्रदेश: चुनाव से पहले आदिवासियों पर डोरे डाल रही है शिवराज सरकार

अनुसूचित जाति वर्ग की नाराजगी के बाद मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और उसके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साल के अंत में होने वाले चुनाव के लिए आदिवासी मतदाताओं पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं. आदिवासियों के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा के साथ ही उनका क्रियान्वयन भी तेजी शुरू कर दिया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 24 अप्रैल को मध्यप्रदेश आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के रामनगर में एक बड़ी सभा को संबोधित करने आ रहे हैं. बीजेपी का गणित पिछड़े और आदिवासी वर्ग को साथ लेकर सरकार बनाने का है. आदिवासियों को लुभाने के शिवराज सिंह चौहान उनके साथ नृत्य कर रहे हैं और घर जाकर खाना खा रहे हैं.

अनुसूचित जाति वर्ग से ज्यादा है, आदिवासी वर्ग

राज्य में आदिवासी के वर्ग के लिए विधानसभा की कुल 47 सीटें आरक्षित हैं. राज्य में लगभग 21 प्रतिशत मतदाता आदिवासी हैं. आदिवासी कांग्रेस का परंपरागत वोटर माना जाता है. अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी लगभग 16 प्रतिशत है. अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या 35 है. अनुसूचित जाति वर्ग के वोटर कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच विभाजित हो जाते हैं. आदिवासी मतदाताओं में बीएसपी की कोई पैठ नहीं है. राज्य में कुल 21 जिले आदिवासी बाहुल्य हैं.

आदिवासी ब्लॉक (विकास खंड) की संख्या 89 है. वर्ष 2003 के चुनाव में पहली बार गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने महाकौशल के आदिवासी इलाके में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कारण कांग्रेस को चुनाव में लगातार नुकसान हो रहा है. इसी क्षेत्र में जयस नामक संगठन तेजी आदिवासियों के बीच अपनी पैठ बना रहा है. आदिवासी मतदाता का मन अभी भी भ्रमित दिखाई दे रहा है.

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मध्य प्रदेश में मौजूद बैगा आदिवासी समुदाय की प्रतीकात्मक तस्वीर.

राज्य में आदिवासियों की बड़ी आबादी धार, झाबुआ क्षेत्र में भी है. धार, झाबुआ क्षेत्र में भील, भिलाला आदिवासी हैं जबकि महाकौशल क्षेत्र गोंड आदिवासी हैं. राज्य में तीन विशेष पिछड़ी आदिवासी जातियां हैं. ये सहरिया,बैगा और भारिया हैं. विशेष रूप से पिछड़ी इन जातियों की कुल आबादी साढ़े पांच लाख से अधिक है. सहरिया आदिवासी ग्वालियर-चंबल में हैं. जबकि बैगा आदिवासी जबलपुर संभाग में हैं.

विशेष रूप से पिछ़डे इस आदिवासी वर्ग के लोगों के खाते में हर माह एक हजार रुपए की राशि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार द्वारा जमा कराई जा रही है. इन वर्ग के युवकों को सरकारी विभागों में बिना किसी साक्षात्कार के नौकरी भी दी जा रही है. मुख्यमंत्री चौहान खुद नियुक्ति पत्र बांट रहे हैं. आदिवासी जिलों में मुख्यमंत्री के भव्य कार्यक्रम हो रहे हैं. इन कार्यक्रमों में आदिवासियों का परंपरागत नृत्य भी होता है. मुख्यमंत्री चौहान ढोलक की थाप पर नृत्य करते नजर आते हैं.

जूते,चप्पल और पानी की कुप्पी भी दे रही सरकार

तेंदू पत्ता श्रमिक अविभाजित मध्यप्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं. तेंदू पत्ता तोड़ने का काम आदिवासियों द्वारा ही किया जाता है. शिवराज ने तेंदूपत्ता श्रमिकों की मजदूरी दर 1250 रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर दो हजार रुपए प्रति मानक बोरा कर दी है. समर्थन मूल्य पर महुआ फूल की खरीदी की व्यवस्था की गई है. तेंदू पत्ता तोड़ने वाले पुरुष एवं महिला श्रमिकों के कल्याण के लिए भी योजना बनाई गई है, जिसमें पुरुष श्रमिक को जूते (चरण पादुका) और पानी की कुप्पी एवं महिला श्रमिक को चप्पल, पानी की कुप्पी और साड़ी दी जा रही है.

राज्य में चौथी बार सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी आदिवासी और पिछड़ा वर्ग का समीकरण बनाने में लगी हुई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद पिछड़ा वर्ग से हैं. उनकी पत्नी साधना सिंह हाल ही में किरार समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं हैं. मुख्यमंत्री किरार के साथ धाकड़ समाज को भी साथ लेने की कवायद कर रहे हैं.

मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 3 करोड़ 70 लाख है, जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का 51.02 प्रतिशत है. राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पिछले कई सालों से काम कर रहा है. इन क्षेत्रों में होने वाले धर्म परिवर्तन को संघ काफी हद तक रोकने में सफल भी हुआ है. संघ की कोशिश यह है कि आदिवासी हिंदू धर्म की ओर आकर्षित हों. संघ परिवार द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल और अस्पताल भी चलाए जा रहे हैं.

अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान सबसे ज्यादा हिंसा मध्यप्रदेश में हुई थी. इस हिंसा में बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे. सरकारी कर्मचारियों के हिंसा में शामिल होने का अर्थ यह निकाला जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार से नाराज हैं. अनुसूचित जाति वर्ग की नाराजगी को भांपते हुए ही मुख्यमंत्री चौहान ने अपना ध्यान आदिवासियों पर केंद्रित किया है. मुख्यमंत्री आदिवासी जिलों के लगातार दौरे भी कर रहे हैं.

Modi in Bijapur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के रामनगर आ रहे हैं. यद्यपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंडला दौरे के इस कार्यक्रम को आधिकारिक तौर चुनाव अभियान की शुरूआत नहीं कहा जा रहा है. राज्य में विधानसभा के आम चुनाव के लिए दो सौ से भी कम दिन बचे हुए हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री की यात्रा स्वाभाविक तौर पर चुनाव अभियान की शुरूआत के संकेत दे रही है.

प्रधानमंत्री अपने इस दौरे में पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा करेंगे. उत्कृष्ट काम करने वाली पंचायतों को भी पुरस्कृत करने का कार्यक्रम है. नीति आयोग की रिपोर्ट के बाद घोषित हुए पिछड़े जिलों के कलेक्टरों से प्रधानमंत्री चर्चा करेंगे. मध्य प्रदेश का मंडला जिला प्राचीन और मध्यकालीन गोंड राजाओं के अनेक स्मारकों की समृद्ध स्थली है. रामनगर गोंड आदिवासी राजाओं की राजधानी रहा है. यहां गोंड आदिवासी राजाओं का महल भी है. वर्तमान में यह महल जीर्ण-शीर्ण हालत में है. प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का मकसद गोंड आदिवासी वोटरों को बीजेपी से जोड़ने का है. प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली मंडला यात्रा है.

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