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शिवराज सिंह चौहान के अपने जिले के टमाटर किसान हैं बेहाल

मध्यप्रदेश के कृषि विभाग के दावों पर यदि यकीन करें तो किसानों के लिए टमाटर की फसल जी का जंजाल बन गई है.

Updated On: Mar 16, 2018 04:33 PM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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शिवराज सिंह चौहान के अपने जिले के टमाटर किसान हैं बेहाल

मध्यप्रदेश के कृषि विभाग के दावों पर यदि यकीन करें तो किसानों के लिए टमाटर की फसल जी का जंजाल बन गई है. टमाटर का लागत मूल्य भी न मिलने के कारण किसान अपनी फसल जानवरों को खिला रहे हैं. प्रदेश में लगातार यह दूसरा साल है, जिसमें किसानों के लिए टमाटर की फसल घाटे का सबब बन गई है.

सबसे ज्यादा खराब स्थिति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिला सीहोर में है. समीपवर्ती रायसेन जिले में किसानों ने टमाटर को खुले में रख दिया है. जिसकी मर्जी चाहे वह थैला भरकर ले जाए. राज्य में इस साल विधानसभा के आम चुनाव हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ब्रांड किसान पुत्र के नाम का है. इस वक्त किसान, सरकार से सबसे ज्यादा नाराज चल रहे हैं.

Indian labour sort out tomato from farm at village Kevlajhit district Raisen about 125 kms from Bhopal, India 14 march 2018.

किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री रोज किसी न किसी उपज को भावांतर योजना में शामिल करते जा रहे हैं. प्याज की खरीदी आठ रूपए प्रतिकिलो करने का एलान पहले ही किया जा चुका है. पिछले साल मंदसौर फायरिंग के बाद सरकार ने किसानों से प्याज आठ रूपए किलो खरीदने का निर्णय किया था. टमाटर को सरकार मुख्य फसल में नहीं गिनती है. इस कारण टमाटर का उत्पादन करने वाले किसान गुस्से में हैं.

कृषि विभाग का दावा टमाटर देता है ज्यादा मुनाफा

कृषि विभाग टमाटर का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित करता रहता है. कृषि विभाग के दावे के अनुसार एक हेक्टेयर में 600 क्विंटल से अधिक टमाटर का उत्पादन होता है. इस उत्पादन का कुल लागत मूल्य सरकार ने 88,158 रुपए माना है. कृषि विभाग का दावा है कि किसान को टमाटर की बिक्री से चार लाख अस्सी हजार रुपए प्रति हेक्टयेर से मिलते है.

किसानों की शुद्ध आय तीन लाख 91 हजार रुपए से ज्यादा आंकी जाती है. कृषि विभाग की वेबसाइट पर टमाटर लगाने से होने वाले आर्थिक लाभ का पूरा ब्योरा दिया गया है. इसके विपरीत राज्य में किसानों को टमाटर के उत्पादन से लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है. सीहोर जिले का हर खेत टमाटर से लाल दिखाई दे रहा है.

टमाटर की बंपर फसल के कारण मंडी में थोक खरीद भाव तेजी से नीचे आया है. व्यापारी एक रुपए किलो टमाटर खरीदने को तैयार नहीं हैं. जबकि किसान का टमाटर तुड़वाने का खर्च ही दो रुपए प्रतिकिलो आ रहा है. तीस किलो की कैरेट होती है. खरीदी कैरेट से ही की जाती है. भोपाल के आसपास के जिलों में टमाटर के कैरेट बड़ी संख्या में बाहर खुले में रखे हुए हैं. सड़कों पर जगह-जगह टमाटर बिखरा हुआ है. टमाटर जानवरों को खिलाया जा रहा है.

सरकार की चिंता प्याज, लहसुन को लेकर है

प्याज के दाम गिरने से सबसे ज्यादा राजनीतिक बवाल खड़ा होता है. प्याज की कीमतें कई बार सरकार पर भारी पड़ चुकी हैं. राज्य में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. इस कारण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्याज के साथ-साथ लहसुन के खरीदी दामों को लेकर काफी सतर्क हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना में लहसुन उत्पादकों के पंजीयन का कार्य शुरू कर दिया गया है. पंजीयन का कार्य 31 मार्च तक होगा.

पंजीयन के संबंध में प्रदेश के 20 जिलों के कलेक्टरों को प्रमुख सचिव किसान-कल्याण तथा कृषि विभाग डॉ. राजेश राजौरा ने पत्र लिखकर आवश्यक निर्देश दिए हैं. लहसुन उत्पादक किसानों का पंजीयन एक हजार हेक्टेयर से अधिक लहसुन बोने वाले 20 जिलों की प्राथमिक कृषि साख समितियों तथा मंडी समितियों में भावांतर भुगतान योजना पोर्टल पर किया जाएगा. जिन 20 जिलों में पंजीयन का कार्य होगा, उनमें नीमच, रतलाम, उज्जैन, मंदसौर, इंदौर, सागर, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, शाजापुर, राजगढ़, छतरपुर, आगर-मालवा, गुना, धार, देवास, सीहोर, रीवा, सतना, भोपाल और जबलपुर शामिल हैं.

कृषि लागत की गणना के लिए समिति का गठन

राज्य शासन ने प्रदेश में खरीफ एवं रबी फसलों की कृषि एवं हॉर्टीकल्चर फसलों के प्रति हेक्टेयर एवं प्रति क्विंटल लागत मूल्य की गणना के लिए समिति का गठन भी किया है. समिति के अध्यक्ष कुलपति, राजमाता विजयाराजे सिंधिया, कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर हैं.

समिति के सदस्य सचिव संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास हैं. समिति के अन्य सदस्य आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था हैं. प्रधान वैज्ञानिक कृषि अर्थशास्त्र राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.

Animals eating dumb tomato from farm at village Kevlajhir district Raisen about 125 kms from Bhopal, India 14 march 2018.

समिति के अन्य सदस्यों में श्री ओम ठाकुर (सिवनी), श्री नारायण सिंह पटेल (नरसिंहपुर) और श्री अश्विनी सिंह चौहान (उज्जैन) को शामिल किया गया है. समिति खरीफ एवं रबी फसलों की राज्य शासन द्वारा तय की गई कृषि एवं उद्यानिकी फसलों की प्रति हेक्टेयर एवं प्रति क्विंटल मध्यप्रदेश की औसत लागत मूल्य की गणना कर राज्य शासन को गणना पत्रक अनुसार जानकारी 7 दिवस में प्रस्तुत करेगी.

ध्यप्रदेश में खरीफ-2017 में भावांतर भुगतान योजना में किसानों को उनकी उपज का मंडियों में हुए उतार-चढ़ाव के अंतर का भुगतान किया जा रहा है. प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना में 10 लाख 58 हजार किसानों को 1449 करोड़ 91 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा.

किसानों को जनवरी के मक्का, फरवरी, मार्च और अप्रैल के तुअर का भी भावांतर भुगतान योजना में लाभ दिया जाएगा. अक्टूबर-2017 में मंडियों में फसल बेचने वाले एक लाख 36 हजार किसानों को भावांतर भुगतान योजना में 146 करोड़ 73 लाख रुपए का भुगतान किया गया. नवंबर में 5 लाख 26 हजार किसानों को 773 करोड़ 32 लाख रुपए का भुगतान किया गया था.

दिसंबर में तीन लाख 97 हजार किसानों द्वारा बेची गई कृषि उपज का भुगतान 620 करोड़ 75 लाख रुपए किसानों के बैंक खातों में 12 फरवरी, 2018 को किया जाएगा. इस साल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों को गेंहू के समर्थन मूल्य से 265 रुपए प्रति क्विंटल अतिरिक्त लाभ देने का एलान पहले ही कर चुके हैं.

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