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चाचा-भतीजा झगड़े के पार्ट-टू के लिए हो जाएं तैयार

शिवपाल-अखिलेश के बीच सुलह की कोशिश काफूर होती दिख रही है

Updated On: Dec 12, 2016 06:51 PM IST

Amitesh Amitesh

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चाचा-भतीजा झगड़े के पार्ट-टू के लिए हो जाएं तैयार

चाचा-भतीजे के झगड़े के पार्ट -2 के लिए अब आप तैयार हो जाएं. अंदर की तनातनी एक बार फिर पब्लिक प्लेस में दिख सकती है. फिर से घर के अंदर का कोहराम सड़क पर आने वाला है. शिवपाल और अखिलेश के बीच सुलह-समझौते की कोशिश काफूर होती दिख रही है.

हाल ही में दिखावे के लिए ही सही लेकिन, संघर्ष विराम की कोशिश की गई थी. पानी डालकर आग बुझाने की एक पहल जरूर हुई थी. लेकिन, सबको पता था एक चिंगारी अभी भी सुलग रही है. हवा का रुख एक बार फिर से अंदर की ज्वाला को और धधकने पर मजबूर कर देगा. अब ऐसा ही होता दिख रहा है.

टिकट बंटवारे पर विवाद

ताजा विवाद समाजवादी पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर है. चाचा शिवपाल ने 23 उम्मीदवारों की जो नई सूची जारी की है, उसमें 3 विधायकों का टिकट काट दिया है जबकि 7 उम्मीदवारों का टिकट बदल दिया है. ऐसा कर शिवपाल ने अखिलेश समर्थक लोगों को साइकिल से उतारकर पैदल कर दिया है.

अब ऐसे में भतीजे को यह बात कैसी लगेगी? अपनी इमेज मेकओवर में लगे अखिलेश की कोशिशों को उनके ही चाचा ने पलीता लगा दिया है. चाचा ने अतीक अहमद से लेकर सिगबतुल्ला अंसारी तक को टिकट दे दिया है.

अतीक अहमद की छवि एक बाहुबली की है. विधायक राजू पाल की हत्या में अतीक अहमद आरोपी हैं, लेकिन, अब वो साइकिल पर सवार होकर कानपुर कैंट से अखिलेश को सीएम बनाने के लिए वोट मांगेंगे.

दूसरी तरफ जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई सिगबतुल्ला अंसारी को शिवपाल ने टिकट थमा दिया है. कौमी एकता दल से सिगबतुल्ला पहले से ही विधायक हैं. लेकिन, अखिलेश के तमाम विरोध के बावजूद आखिरकार कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया था. अब उन्हें पार्टी का टिकट भी थमा दिया गया है. यही बात अखिलेश को अखर गई है.

भतीजे पर चाचा भारी

अखिलेश चाहते हैं टिकट उनकी मर्जी सेबंटे, क्योंकि, मुख्यमंत्री वही हैं और उन्हीं के काम के आधार पर जनता के बीच पार्टी जाएगी. लेकिन, कुनबे में सत्ता-संतुलन बनाने में लगे मुलायम ने संगठन की कमान बेटे से लेकर भाई को दे दी है.

चाचा-भतीजे के संघर्ष विराम वक्त भी अंदाजा लगाए जा रहा था कि असल लड़ाई टिकट बंटवारे को लेकर है. अब जब टिकट बंटवारे में अखिलेश की अनदेखी हो रही है तो यह लड़ाई एक बार फिर से सामने आने लगी है.

चाचा-भतीजे की जंग को घर के भीतर के मनमुटाव कहकर टाला नहीं जा सकता. क्योंकि यह लड़ाई पुरानी है. लड़ाई हो रही है मुलायम के बाद उनके वारिस को लेकर. समाजवादी पार्टी के कुनबे के नेतृत्व को लेकर.

यूपी की सियासत में इन दिनों चर्चा विधानसभा चुनाव को लेकर है. सियासी दल अपना एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. लोगों के दिलों में जगह बनाने के लिए फिक्रमंद हैं. लेकिन, समाजवादी पार्टी के भीतर चाचा-भतीजा एक-दूसरे के दिलों में बनी कड़वाहट को निकाल नहीं पा रहे हैं.

ऊपर से तो एक दिखने की कोशिश होती है. पापा मुलायम के बीच-बचाव के बाद अखिलेश तो चाचा के पैर भी छू लेते हैं. लेकिन, दिल को नहीं छू पाते. यही हाल चाचा शिवपाल का है जो गले लगाने के बावजूद अखिलेश को मात देने की हर चाल चल रहे हैं.

अंदरखाने सियासी बिसात पर शह और मात का खेल खेला जा रहा है. कभी चाचा की चलती है तो कभी भतीजे की चलती है. फिलहाल टिकट बंटवारे में चाचा शिवपाल भतीजे अखिलेश पर भारी पड़ रहे हैं.

अब अगला दांव अखिलेश का होगा. क्या अखिलेश मौनी बाबा बनकर टिकट बंटवारे में अपने लोगों को हाशिए पर जाते देखते रहेंगे या फिर पलटवार करेंगे. अगर पलटवार हुआ तो कुनबे का घमासान एक बार फिर यूपी की सियासी फिजां में बड़ी हलचल लेकर आएगा.

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