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कालाधन के पहाड़ से चुहिया निकलती दिखाई दे रही: शिवानंद तिवारी

आपा-धापी के इस माहौल से देश को निकलने में अभी चार से पांच महीना और लगने वाला है

Updated On: Dec 02, 2016 11:02 PM IST

FP Staff

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कालाधन के पहाड़ से चुहिया निकलती दिखाई दे रही: शिवानंद तिवारी

जिस काला धन को पहाड़ बताकर नरेंद्र मोदी जी ने नोटबंदी के जरिए उसको तोड़ने का एलान किया था उससे चुहिया निकलती दिखाई दे रही है. मोदी जी का अनुमान था कि नगदी में देश का काला धन छिपा हुआ है. इसलिए नोटबंदी से बड़े पैमाने पर काला धन बाहर आएगा. यानी जितने मूल्य का पुराना नोट बैंकों मे वापस नहीं लौटेगा वह काला धन होगा.

अनुमान लगाया गया था कि 14.5 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट में से कम से कम तीन लाख करोड़ रुपए मूल्य का पुराना नोट बैंकों में वापस नहीं लौटेगा. यानी इतना काला धन हमारे नगदी में छिपा हुआ था. इससे दुनिया भर में मोदी जी चेहरा चमकेगा. रिजर्व बैंक के खाते में यह राशि अतिरिक्त हो जाएगी. सरकार रिजर्व बैंक से यह राशि हासिल कर गरीबों के लिए योजना चलाएगी और गरीब मोदी जी का जयकारा लगाएंगे.

लेकिन यह होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है. वित्त राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल जी के मुताबिक आठ नवंबर को जिस दिन नोटबंदी की घोषणा हुई थी उस दिन पांच सौ के 8.58 और एक हजार के 6.86 करोड़ नोट बाजार में थे. रिजर्व बैंक के अनुसार इन 15.44 करोड़ नोटों में से कल तक 11 करोड़ नोट बैंकों मे जमा हो चुके हैं. जबकि बैंकों में नोट जमा करने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर है.

जानकारों का अनुमान है कि तब तक 90 से 95 फीसद नोट जमा हो जाएंगे. यानी संपूर्ण नगदी में काला धन दाल में फोरन के बराबर साबित होने वाला है. दूसरी ओर अर्थशास्त्रियों के मुताबिक नोटबंदी से अब तक देश के जीडीपी को लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. नोट छापने की हमारी जो क्षमता है उसके मुताबिक आपा-धापी के इस माहौल से देश को निकलने में अभी चार से पांच महीना और लगने वाला है. इसको अंधेर नगरी-चौपट राज नहीं तो और क्या कहेंगे!

(बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी की फेसबुक वाल से)

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