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शिवसेना का BJP पर हमला, कहा- 2014 की राजनीतिक दुर्घटना 2019 में नहीं होगी

शिवसेना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा विदेश यात्रा पर होते हैं इसलिए धूल के कण उनकी आंंखों में और सांसों में नहीं जा रहे हैं, लेकिन जनता परेशान है और दुविधा में है

FP Staff Updated On: Jun 19, 2018 11:30 AM IST

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शिवसेना का BJP पर हमला, कहा- 2014 की राजनीतिक दुर्घटना 2019 में नहीं होगी

शिवसेना आज यानी 19 जून को  52वां स्‍थापना दिवस मना रही है. स्‍थापना दिवस के मौके पर शिवसेना ने सामना के जरिए बीजेपी पर जमकर हमला बोला. और बीजेपी की 2014 की जीत को राजनीतिक दुर्घटना बताया. सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि 2014 की राजनीतिक दुर्घटना 2019 में नहीं होगी.

महाराष्ट्र में खुद के दम पर सरकार बनाएगी शिवसेना

धूलभरी आंधी केवल दिल्ली में नहीं, बल्कि पूरे देश में उठ चुकी है. प्रधानमंत्री मोदी हमेशा विदेश यात्रा पर होते हैं इसलिए धूल के कण उनकी आंंखों में और सांसों में नहीं जा रहे हैं, लेकिन जनता परेशान है और दुविधा में है. शिवसेना की राह कभी आसान नहीं रही है. उसकी राह हमेशा ऊबड़-खाबड़ रास्तों से ही गुजरी है. इसके बावजूद शिवसेना इन रास्तों को पार करती आई है और आगे भी करेगी. महाराष्ट्र में शिवसेना अपने दम पर खुद की सरकार बनाएगी और दिल्ली के तख़्त पर कौन बैठेगा, राष्‍ट्रीय स्तर पर यह फैसला लेने की ताकत भी शिवसेना ही करेगी.

संपादकीय में लिखा है कि शिवसेना का 19 जून को 52वां स्थापना दिवस है. हमेशा की तरह वह शानदार तरीके से मनाया जाएगा. 52 वर्ष पहले शिवसेना की स्थापना एक प्रतिकूल परिस्थिति में हुई थी. उसके बाद अनगिनत कटीली राहों से गुजरते हुए शिवसेना की यात्रा शुरू हुई. उस पर सफलता को पार करते हुए शिवसेना आज शिखर पर पहुंच चुकी है. उसे एक चमत्कार ही कहना पड़ेगा.

लोग सवाल उठाते रहे मगर शिवसेना का परचम आज भी आसमान पर

संपादकीय में लिखा है कि बिना किसी समर्थन के शिवसेना का भगवा तेज विश्व भर में लहराया है. भगवा ही हिंदुत्व का रक्षक है. इस बारे में अब किसी की दो राय नहीं है. शिवसेना निश्चित तौर पर क्या और कैसे करेगी? ऐसा सवाल जिन लोगों के मन में उठता है उनकी लकड़ियां शमशान पहुंच गईं लेकिन शिवसेना का परचम आज भी आसमान पर क्यों जा रहा है, इसका  पता हमारे विरोधियों को करना होगा. 2014 की राजनीतिक दुर्घटना 2019 में नहीं होगी.

दिल्ल पर भी पड़ रहा है असर

सत्ता का उन्माद हम पर कभी चढ़ा नहीं और आगे भी नहीं चढ़ने देंगे. देश में आज आपातकाल जैसी परिस्थिति है क्या? ऐसे सवाल किए जा रहे हैं. कश्मीर में जवानों की हत्या जारी है. बहुमत से चुनकर दी गई सरकार का गला राजधानी दिल्ली में ही कसा जा रहा है. नौकरशाहों को ऐसा ही रवैया रहा तो चुनाव लड़ना और राज्य चलाना मुश्किल हो जाएगा.

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