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शिवसेना ने पूछा- नोटबंदी फेल हो गई, अब किस तरह प्रायश्चित करेंगे पीएम मोदी?

'प्रधानमंत्री मोदी ने डिमॉनिटाइजेशन के जरिए देश को वित्तीय अराजकता की ओर धकेल दिया था. अब वो इसके लिए किस तरह से प्रायश्चित करेंगे?'

Updated On: Aug 31, 2018 05:02 PM IST

FP Staff

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शिवसेना ने पूछा- नोटबंदी फेल हो गई, अब किस तरह प्रायश्चित करेंगे पीएम मोदी?

नोटबंदी पर आरबीआई की रिपोर्ट आने के बाद से ही बीजेपी की फजीहत हो रही है. विपक्ष तो आक्रामक था ही, अब शिवसेना ने प्रधानमंत्री ने से कुछ सवाल पूछे हैं.

शुक्रवार को पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में पार्टी ने लिखा था कि 'आरबीआई कि रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी के समय बंद किए गए 500 और 1000 रुपए के नोटों का 99.3 प्रतिशत बैंकों के पास वापस आ गया है. प्रधानमंत्री मोदी ने डिमॉनिटाइजेशन के जरिए देश को वित्तीय अराजकता की ओर धकेल दिया था. अब नोटबंदी फेल रही है तो वो इसके लिए किस तरह से प्रायश्चित करेंगे?'

शिवसेना ने कहा कि नोटबैन की वजह से देश को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, छोटे उद्योगों को झटका लगा, किसानों को परेशानियां झेलनी पड़ीं, लोगों को घंटों लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा. आजादी के बाद पहली बार रुपया इतने निचले स्तर तक आ गया और सौ से ज्यादा लोगों की इसकी वजह से मौत हो गई, फिर भी सत्ता में बैठे लोग विकास-विकास की डींगे हांक रहे थे.

सामना के संपादकीय में लिखा गया, 'चूंकि नोटबंदी ने देश को वित्तीय अराजकता की ओर धकेल दिया था, तो अब प्रधानमंत्री किस तरह से प्रायश्चित करेंगे. नोटबैन बस पॉपुलैरिटी हासिल करने के लिए था. देश की इकोनॉमी से जुड़े फैसले जल्दबाजी में नहीं लिए जाने चाहिए. नोटंबदी ने देश की इकोनॉमी को बहुत नुकसान पहुंचाया. आरबीआई भी ये बात मानती है.'

पार्टी ने आगे कहा, 'मोदी ने कहा था कि नोटबंदी भ्रष्टाचार, काला धन और जाली नोटों को हमेशा के लिए खत्म करेगी. हालांकि, ये सारी चीजें पिछले दो साल में बढ़ी ही हैं. अब वो काला धन और जाली नोट भी बरामद नहीं होंगे क्योंकि वो खुद सिस्टम में वापस आ चुके हैं. यहां तक नोटबंदी से कश्मीर में आतंक को कम करने और शांति लाने के दावे भी झूठे रहे.'

 

 

संपादकीय में नंबरों पर बात करते हुए कहा गया कि नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था में आग लगा दिया. सरकारी खजाने को नए नोट छापने के लिए 15,000 करोड़ का नुकसान हुआ, देश के सभी एटीएम्स के रीकैलिबरेशन में 700 करोड़ का खर्च हुआ. नए नोट के वितरण में 2,000 करोड़ का नुकसान हुआ. ये सब भयावह है लेकिन फिर भी अगर सरकार विकास का रट लगा रही है तो इनकी मानसिकता नीरो की तरह है जो उस वक्त बांसुरी बजा रहा था, जब रोम जल रहा था.

बता दें कि रिजर्व बैंक की इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि नोटबंदी के समय बंद किए गए 500 और 1000 रुपए के नोटों का 99.3% बैंकों के पास वापस आ गया है.

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