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जयपुर के शिवकुमार पारीक का क्या है 'अटल' कनेक्शन

शिवकुमार का अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ना किसी इत्‍तेफाक से कम नहीं था. वाजपेयी से जुड़ने से पहले शिवकुमार आरएसएस के हार्डकोर स्वयंसेवक थे

Updated On: Aug 16, 2018 09:02 PM IST

FP Staff

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जयपुर के शिवकुमार पारीक का क्या है 'अटल' कनेक्शन
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पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अपना पहला लोकसभा चुनाव 1955 में हार गए थे, लेकिन दो साल बाद 1957 में वो पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. उनकी ख्याति दिनों दिन बढ़ रही थी और जल्द ही वो देश की राजनीति के उभरते सितारे बन चुके थे. लेकिन तभी जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्यमय हालत में मौत से सब स्तब्ध थे. इसी दौरान किसी ने सुझाव दिया कि वाजपेयी को एक ऐसे सहयोगी की जरूरत है, जो उनकी रक्षा भी करे. काफी तलाश के बाद नानाजी देशमुख ने नाम सुझाया राजस्थान के जयपुर के निवासी शिवकुमार का.

शिवकुमार का अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ना किसी इत्‍तेफाक से कम नहीं था. वाजपेयी से जुड़ने से पहले शिवकुमार आरएसएस के हार्डकोर स्वयंसेवक थे. अपने गठीले शरीर के कारण वह औरों से अलग दिखते थे और व्यवहार के कारण सबके प्रिय भी थे.

वाजपेयी के रक्षक बनकर आए शिवकुमार

रौबदार व्यक्तित्व के धनी, करीब छह फुट लंबे और घनी मूंछों वाले, भगवान शंकर के परम भक्त और वाजपेयी के सबसे करीबी ये शख्स हैं जयपुर निवासी शिवकुमार पारीक. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सहायक शिवकुमार मानते हैं कि वाजपेयी के साथ बिताए पल अविस्मरणीय हैं.

अटल के हर दुख-सुख के रहे साथी

आज शिवकुमार को वाजपेयी के निजी सहायक के तौर पर जाना जाता है, लेकिन वह इससे कहीं बढ़कर रहे हैं. बलरामपुर के अलावा वे वाजपेयी के हर चुनाव में उनके चुनाव एजेंट रहे और सुख-दुख के साथी. दर्जनों तस्‍वीरें गवाह हैं कि राज्य के प्रखर राजनीतिज्ञ दिवगंत भैंरो सिंह शेखावत के साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी का राजस्थान से जुड़ा कोई और सच्चा हमदर्द रहा है तो वह हैं शिवकुमार.

पारिवारिक सदस्य की तरह निभाई जिम्मेदारी

शिवकुमार केवल अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सहायक के बतौर ही नहीं, बल्कि उनके हर राजनीतिक उतार-चढ़ाव के साक्षी रहे. उनकी अनुपस्थिति में सालों तक शिवकुमार ने ही लखनऊ संसदीय क्षेत्र को संभाला. जब तक वाजपेयी स्वस्थ थे, उनके हर पारिवारिक कार्यक्रम में वे शरीक हुए. आज जब वाजपेयी अस्वस्थता के कारण राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय नहीं हैं तो शिवकुमार ही उनके जीवन की दिनचर्या संभालते हैं, ठीक एक पारिवारिक सदस्य की तरह.

(साभार: न्यूज18)

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