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अखिलेश के लिए पद छोड़ने को तैयार: शीला दीक्षित

गठबंधन होने पर सीएम पद छोड़ने को भी तैयार हैं शीला दीक्षित.

Updated On: Jan 05, 2017 09:55 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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अखिलेश के लिए पद छोड़ने को तैयार: शीला दीक्षित

यूपी चुनाव में अब महज कुछ महीने ही बाकी हैं. राज्य में सियासी जोड़तोड़ अपने चरम पर है. जनता दल यूनाइटेड और अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोक दल ने गठबंधन करके अपने पत्ते खोल दिए हैं.

बहुजन समाजवादी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. सियासी गलियारों में शुरू से ही समजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठजोड़ होने की हवा है. हालांकि, समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने साफ कर दिया है कि वे कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के मूड में नहीं हैं.

हालांकि, यूपी में अपना नामोंनिशान मिटा चुकी कांग्रेस का नजरिया कुछ और है. फर्स्टपोस्ट से एक्सक्लूसिव बातचीत में यूपी में कांग्रेस की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित ने बताया कि अगर पार्टी गठबंधन के लिए हां कहती है तो वह मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए भी तैयार हैं.

सीएम पद की उम्मीदवारी छोड़ने को तैयार

यह पूछे जाने पर कि अगर सपा के साथ गठजोड़ होता है तो क्या वह अपनी उम्मीदवारी छोड़ देंगी. उन्होंने कहा, 'पार्टी और राज्य के हित में जो होगा वह करने के लिए तैयार हैं.'

यूपी में जमीन तलाशने पर 

यूपी में कांग्रेस की सरकार आखिरी बार 1984 से 1989 तक रही. इसके बाद तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस यूपी में पांव नहीं जमा सकी. दिल्ली के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के हाथों अपनी सीट गंवाने वाली शीला दीक्षित पर कांग्रेस ने भरोसा किया है. शीला दीक्षित से यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस ने उन्हें बली का बकरा बनाया है?

Sheila Dixit

Naresh Sharma

किसी मंझी हुई राजनेता की तरह शीला दीक्षित ने कहा,

'उत्तर प्रदेश वर्षों से तरस रहा है.वहां की जनता बेहाल है. राज्य में कानून व्यवस्था के साथ बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है. लिहाजा जनता कांग्रेस को पसंद कर सकती है.'

समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन पर

प्रशांत किशोर ने कुछ दिन पहले ही दिल्ली में मुलायम सिंह से मुलाकात की थी. इस बैठक के बाद सियासी गलियारे में यह खबर फैल गई कि समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस हाथ मिला सकती है. इस मामले में तीन पक्ष हो गए हैं. शीला दीक्षित के मुताबिक अगर पार्टी आलाकमान इसके लिए तैयार है तो उन्हें कोई समस्या नहीं है.

कांग्रेस की हालत यूपी में इस कदर खराब हो चुकी है कि वह किसी भी तरह जीत का स्वाद चखना चाहती है. सपा के साथ गठबंधन के लिए कांग्रेस 403 में से सिर्फ 125 सीट से ही संतोष कर रही है. और आलम यह है कि सपा इसके लिए भी तैयार नहीं है.

इस गठबंधन के खिलाफ कोई और भी है. वह है खुद कांग्रेस की प्रदेश इकाई. प्रदेश इकाई का मानना है कि अगर कांग्रेस विधानसभा चुनावों के लिए सपा से हाथ मिलाती है तो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में इसका बुरा असर होगा.

यूपी में सीएम कैंडिडेट बनाने पर

Mulayam singh

PTI

दिल्ली में 15 साल तक शासन करने के बाद 2015 में शीला दीक्षित अपनी सीट तक नहीं बचा पाईं. यह पूछे जाने पर कि यूपी में पहले से ही कांग्रेस की हालत खराब है. ऐसे में वह सीएम कैंडिडेट बनने पर क्यों राजी हो गईं. शीला दीक्षित ने कहा, 'राजनीति में हार और जीत तो लगी रहती है. यही प्रजातंत्र है. कोई भी नेता इससे बच नहीं सकता.'

यूपी की सियासी हवा देखकर ऐसा लगता तो नहीं है कि शीला दीक्षित कांग्रेस की लाइफलाइन का रोल निभा पाएंगी. इसे नोटबंदी का असर कहें या युवा अखिलेश की ताकत, सपा में राम गोपाल की वापसी हो चुकी है. यूपी में हर रोज कुछ नया हो रहा है, अब देखना है कि कांग्रेस इसमें कहां फिट होती है.

शीला दीक्षित ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत यूपी के कन्नौज से की थी. दिल्ली में मुंह की खाने के बाद वह फिर यूपी लौटी हैं. लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की जैसी हालत है, उसे देखकर लगता है कि कहीं यह शीला दीक्षित के राजनीतिक करियर का अंत तो नहीं है !

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