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तमिलनाडु में विधायकों की हालत जनता से भी खराब!

शशिकला को अपने विधायकों के विवेक पर भरोसा नहीं

Updated On: Feb 15, 2017 09:58 AM IST

Suresh Bafna
वरिष्ठ पत्रकार

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तमिलनाडु में विधायकों की हालत जनता से भी खराब!

तमिलनाडु के जिन चुने हुए विधायकों पर आम नागरिकों की आजादी की रक्षा करने की जिम्मेदारी थी, उन विधायकों व मंत्रियों की आजादी ही खतरे में पड़ गई है.

कुछ दिन पूर्व एआईएडीएमके के पार्टी मुख्यालय में हुई विधायक दल की बैठक के बाद तीन लग्जरी बसों में विधायकों व मंत्रियों को गाय-भैंस की तरह भरा गया और मद्रास से 50 किलोमीटर दूरी पर स्थित दो रिसोर्ट्स के कमरों में बंद कर दिया गया.

लग्जरी कमरों में कैद विधायक

इन विधायकों व मंत्रियों को बस में बैठते समय यह बताया नहीं गया था कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है? विधायकों को रिसोर्ट्स के सात से दस हजार रुपए प्रतिदिन के लग्जरी कमरों में कैद कर दिया गया.

शशिकला के राजनीतिक प्रबंधकों ने इन विधायकों के लिए कपड़े व अन्य जरुरी वस्तुएं उपलब्‍ध कराई. इन माननीय विधायकों से मोबाइल फोन तक जमा करवा लिए गए.

दो दिन बाद शशिकला ने कहा कि उनकी पार्टी के विधायक अपने रिश्तेदारों से फोन पर बातचीत कर सकते हैं.

जबरन कैद पर याचिका दायर हुई

कुछ रिश्तेदारों व शुभचिंतकों ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि विधायकों को जबरन एक जगह कैद कर दिया गया है. विधायकों की आजादी में कटौती कर दी गई है.

रिसोर्ट्स से भागे विधायक शमुंगनाथन ने पत्रकारों को बताया कि विधायकों को उनकी इच्छा के विरुद्ध रिसोर्ट्स में रखा गया है.

मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देश पर पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकाारियों ने रिसोर्ट्स जाकर विधायकों से मुलाकात कर रिपोर्ट प्रस्तुत की.

इसमें कहा गया कि विधायकों को उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं रखा गया है. ताजा रिपोर्ट यह है कि रिसोर्ट्स के आसपास धारा 144 लगानी पड़ी है.

शाशिकला को विधायकों पर भरोसा नहीं

Photos of Jayalalithaa, Panneerslevam were in high demand in Chennai

विधायकों को गाय-भैंस की तरह हांककर रिसोर्ट्स में जमा कर देने से ही यही लगता है कि एडीआईएमके की महासचिव शाशिकला को विधायकों के विवेक पर भरोसा नहीं है.

या उनको लगता है कि विधायक किसी भी लोभवश दूसरे पाले में जा सकते हैं. देश के चुने हुए जनप्रतिनिधियों के संदर्भ में यह स्थिति भारतीय लोकतंत्र पर अच्छी टिप्पणी नहीं है.

नेहरुजी व इंदिराजी के जमाने में कभी ऐसी स्थिति पैदा नहीं हुई कि विधायकों को गाय-भैंस की तरह बसों में भरकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया.

विधायकों या सांसदों के साथ ऐसी बदसलूकी कभी नहीं 

अतीत में कांग्रेस व जनता पार्टी कई बार टूटीं, लेकिन कभी भी विधायकों या सांसदों के साथ ऐसा सलूक नहीं किया गया. 1995 में गुजरात में भाजपा नेता शंकरसिंह वाघेला ने मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के खिलाफ बगावत की थी.

तब उन्होंने 47 भाजपा विधायकों को चार्टेड हवाई जहाज के माध्यम से खजुराहो के रिसोर्ट्स में कुछ दिनों तक सैर कराई थी.

उत्तर-पूर्व के छोटे राज्यों व झारखंड में भी रिसोर्ट्स-राजनीति की परम्परा काफी मजबूत रही है, जहां तीन-चार विधायकों के पाला बदलने से सरकारें भी बदल जाती हैं.

एआईएडीएमके पार्टी के भीतर तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जयललिता का दर्जा भगवान की तरह ही था. पार्टी के हर सांसद व विधायक को अपनी सफेद शर्ट की पारदर्शी जेब में अम्मा का रंगीन फोटो रखना अनिवार्य था.

जयललिता का दबदबा

जयललिता की सरकार व पार्टी में नंबर एक से लेकर दस तक केवल वे ही थी. इसलिए जब उनका निधन हुआ तो पार्टी के भीतर सत्ता-संघर्ष होना स्वाभाविक था.

पार्टी के सांसद व विधायक फिर किसी नए भगवान की खोज करने लगे और उन्हें शशिकला के तौर पर नया भगवान मिल गया.

आश्चर्य की बात यह है कि भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दंडित होने के बाद भी एआईएडीएमके के 131 में से 117 विधायक अभी भी शशिकला द्वारा नामांकित पलानीस्वामी को मुख्‍यमंत्री के तौर पर स्वीकार कर रहे हैं.

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि तमिलनाडु की राजनीति में भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं है. विधायक हो या सांसद तमिलनाडु में वे अपने बूते की बजाय भगवान जैसे नेताअों के कंधों पर बैठकर ही चुनाव जीतने का सपना देख सकते हैं.

जयललिता को अपने विधायक कभी रिसोर्ट्स में रखने की जरुरत नहीं पड़ी, लेकिन शशिकला को अपनी राजनीतिक क्षमता पर भरोसा नहीं है.

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