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नोटबंदी: शरद यादव ने जेडीयू में मतभेद से किया इंकार

नोटबंदी को लेकर बिहार का सत्ताधारी दल दो फाड़ हो गया है.

Updated On: Nov 26, 2016 10:54 AM IST

Amitesh Amitesh

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नोटबंदी: शरद यादव ने जेडीयू में मतभेद से किया इंकार

नोटबंदी को लेकर बिहार का सत्ताधारी दल दो फाड़ हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसका समर्थन कर चुके हैं. लेकिन संसद में जेडीयू नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ खड़ी है.

पार्टी सांसद हरिवंश ने भी फर्स्टपोस्ट के जरिए नोटबंदी के समर्थन में अपनी राय रखी है.

इस पर जब हमने शरद यादव से इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि पार्टी जनता को हो रही परेशानी का विरोध कर रही है.

कालाधन के मामले में सरकार के कदम के खिलाफ हम नहीं हैं, लेकिन, उसके बाबत लोगों को होने वाली परेशानियों को लेकर सरकार का इंतजाम नाकाफी है. संसद में नोटबंदी के मसले पर घमासान मचा हुआ है. विपक्षी दलों की तरफ से अपने तरकश के वो सारे तीर चलाए जा रहे हैं जिससे जनता का हमदर्द बनकर सरकार को कठघडे में खड़ा किया जा सके.

पुराने समाजवादी नेता शरद यादव भी इन दिनों हर मंच से सरकार पर वार करने में लगे हैं. शरद यादव सरकार के इस कदम के बाद किसान से लेकर मजदूर तक और छोटे व्यापारी तक सबकी परेशानी को जोर-शोर से उठाने में लगे हैं.

उनका कहना है शादी की तैयारियों में लगे लोग हों या आम आदमी सब परेशान हैं और हम इसी पर प्रधानमंत्री से जवाब मांग रहे हैं. फर्स्टपोस्ट हिंदी ने शरद यादव से जब यह पूछा कि आपको नहीं लगता कि कालाधन भी रूक जाएगा और फेक करेंसी भी खत्म हो जाएगी.

तो शरद यादव का जवाब था. ‘कहां रुक जाएगा, बताएं कैसे रूक जाएगा, रोडमैप तो बताएं वो. रोडमैप उनका बनाया हुआ होता तो हमलोग क्यों विरोध करते. रोडमैप तो बताएं कि इसका समाधान कैसे होगा. जो करेंसी की कमी है उसे कैसे पूरा करेंगे क्या प्लान है.’

शरद सरकार पर आक्रामक हैं

हालाकि, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ शब्दों में नोटबंदी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा था.

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फोटो: पीटीआई

‘बाकी विपक्षी दलों की तरह हमें भी जनता को हो रही परेशानी का अंदाजा है, लेकिन, नोटबंदी पर फैसला काफी प्रभावकारी है. अब जरूरत है बेनामी संपत्ति के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने की. जिसे हमेशा कालेधन के रूप में रखा जाता है.’ नीतीश कुमार के सुर में सुर मिलाया जेडीयू के महासचिव और सांसद हरिवंश ने.

फर्स्टपोस्ट हिंदी के अपने लेख में हरिवंश ने कहा था कि ‘यह इस देश का बड़ा दुर्भाग्य है कि जिस फैसले ने देश को एक दिशा दी है और जो उसके भाग्य को निर्धारित करेगा, उस फैसले को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है. बहुत से राजनीतिक दलों के लिए राजनीति एक 24 घंटे वाला पेशा हो गया है. हर कदम को निजी और राजनीतिक फायदे के तराजू में तौला जाता है.’ दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन को रोकने के लिए नोटबंदी के फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में तब्दील कर दिया उसके बाद तो विरोध कर रहे नेताओं के लिए भी इस पर जवाब देना मुश्किल हो रहा है.

शरद यादव भी कालेधन के खिलाफ सरकार की लड़ाई का विरोध नहीं कर रहे. जनता को हो रही परेशानी को मुद्दा बनाकर सरकार पर वार करना चाहते हैं. शरद यादव कहते हैं ‘कौन कह रहा है कि यह बेहतर नहीं है. विपक्ष भी यही कह रहा है. नेता विरोधी दल ने भी फ्लर पर बोला कि आपने जो कदम उठाया, उसके बाबत भी हमें कोई ऐतराज नहीं है.

हमको ऐतराज है कि जो तबाही मच रही है इसके बाद कौन नीतीश या कौन एमपी हो,चाहे कोई हो, कौन कह रहा है. इसलिए इसमें कहां अनतरविरोध है.’ सियासत के इस पुराने समाजवादी नेता ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री को बहस के दौरान सदन में मौजूद रहना होगा.

मोदी को बोलना होगा

शरद कहते हैं अभी तो वो बाहर बोल रहे हैं. जब भीतर बोलेंगे तो जवाब देंगे न. वो बाहर बोलते हैं. सदन में आएं और सदन में बैठकर सारे लोगों के साथ बहस में इन्वल्व होकर रहें ना. सदन में इन्वल्व रहें.

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फोटो:पीटीआई

विपक्षी दलों की तरफ से खासतौर से कांग्रेस की तरफ से इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि 2जी मामले में सदन के भीतर चर्चा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मौजूद रहना पड़ा था. यह दोहरामानदंड नहीं चलेगा. मोदी को नोटबंदी पर चर्चा के दौरान संसद के भीतर लगातार रहना ही होगा.

शरद यादव भी इस मुद्दे पर सुर में सुर मिलाते हुए कहते हैं ‘जिस विभाग की बहस होती है, उस विभाग का मंत्री रहता है. प्रधानमंत्री तो फर्स्ट एमोंग दि इक्वल है तो उन्होंने इस एक्ट को किया है तो जब वो बैठेगें तो इन्टेरेक्शन होगा. वन वे ट्रेफिक नहीं होगी, इन्टेरेक्शन होगा. बहस होगी.’ विपक्षी नेता लगातार इस मसले पर लोगों के दर्द पर सियासी मरहम लगाकर अपनी रोटी सेंकने में लगे हैं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इन दिनों में कोलकाता में कम दिल्ली की सड़कों पर ज्यादा दिख जाती हैं.

ऐसे में कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि क्या 2019 के पहले ममता मोदी विरोधी ध्रुव के रूप में अपनी पोजिशनिंग कर रही हैं. या कांग्रेस और मायावती यूपी और पंजाब चुनाव से पहले अपने ग्राफ को बढान चाहते हैं. लेकिन, शरद यादव चुनाव से अपने विरोध को नहीं जोडकर देख रहे. शरद कहते हैं. उससे हमारा कोई वास्ता नहीं है. 2019 तो अभी बहुत दूर है.

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