S M L

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शरद को नहीं मिल रहा किसी का सहारा

अब शरद यादव की नाव ऐसे अधर में फंस गई है जिसे न कोई ओर दिख रहा है और न छोर, शायद राजनीति की यहीं रीत है कि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शरद का साथ देने वाला कोई नहीं

FP Staff Updated On: Dec 15, 2017 06:30 PM IST

0
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शरद को नहीं मिल रहा किसी का सहारा

जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव के दिन कुछ ठीक नहीं चल रहे. महागठबंधन टूटने के बाद बागी हुए शरद यादव को कहीं से भी सहारा मिलता नजर नहीं आ रहा. पहले पार्टी से निकाले गए, फिर नए बैनर के तले काम करने लगे लेकिन जेडीयू ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण राज्यसभा से अयोग्य घोषित करने की मांग कर दी.

पार्टी के इस मांग को राज्यसभा के सभापति ने स्वीकार भी कर लिया और उन्हें अयोग्य करार दिया गया. इसके खिलाफ वो कोर्ट गए और कोर्ट से भी उन्हें सहारा नहीं मिला. शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट राज्यसभा की सदस्यता बहाल करने के मामले में राहत देने से इंकार कर दिया. हालांकि, उनको भत्ता और बंगला फिलहाल के लिए मिला रहेगा.

EDS PLS TAKE NOTE OF THIS PTI PICK OF THE DAY:::::::::::Patna: RJD chief Lalu Prasad Yadav with rebel Janata Dal-United (JD-U) leader Sharad Yadav during the  'BJP bhagao, desh bachao' rally at Gandhi Maidan in Patna on Sunday. Former Health Minister of Bihar Tej Partap Yadav also seen. PTI Photo(PTI8_27_2017_000082A)(PTI8_27_2017_000179B)

क्या है शरद यादव का पूरा यह मामला

इस साल जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन तोड़ते हुए अपने पूराने सहयोगी बीजेपी से हाथ मिलाकर सरकार बना ली थी तब से ही शरद इसकी खिलाफत करते रहे. उनका कहना था कि बिहार की जनता के जनादेश का सम्मान नहीं हुआ. क्योंकि बिहार की जनता ने जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन को वोट दिया था न कि जेडीयू और बीजेपी को.

उनके साथ-साथ जदयू के अली अनवर भी बागी तेवर अपना लिए. शरद यादव इसके बाद नीतीश और उनके इस कदम की आलोचना करते रहे. लेकिन अंतरआत्मा की आवाज सुनने वाले नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने उनको नजरअंदाज करना जारी रखा.

पार्टी और अपने सबसे करीबी के इस व्यवहार से आहत शरद लालू के महारैली में भी शामिल हुए. पार्टी ने आदेश दिया था कि अगर वो इस रैली में शामिल होंगे तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाएगा. लेकिन शरद पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और वो रैली में गए. नतीजा ये हुआ कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया.

sharad yadav 1

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष का साथ देने वाला कोई नहीं

पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने जेडीयू के एक धड़े को अपने साथ किया और कहने लगे की यहीं असली जेडीयू है. इसमें उनका साथ दे रहे थे अली अनवर. उन्होंने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर भी दावा ठोका और चुनाव आयोग भी गए. चुनाव आयोग से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी. आयोग ने उनके दावे को खारिज कर दिया और तीर का निशान नीतीश के पास ही रहा.

बगावती तेवर अपनाए हुए शरद गुजरात राज्यसभा चुनाव में भी कांग्रेस के दामन थाम लिया. गुजरात में जेडीयू के नेता छोटू भाई वसावा भी बागी हुए और शरद का साथ देने लगे. वसावा ने अहमद पटेल के पक्ष में वोट डाला और जेडीयू के फरमानों को नजर अंदाज कर दिया.

अब शरद यादव की नाव ऐसे अधर में फंस गई है जिसे न कोई ओर दिख रहा है और न छोर. शायद राजनीति की यहीं रीत है कि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे शरद का साथ देने वाला कोई नहीं है. सबकी अपनी कुर्सी है और कुर्सी से बेदखल न हो उसके अपने किस्से.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
'हमारे देश की सबसे खूबसूरत चीज 'सेक्युलरिज़म' है लेकिन कुछ तो अजीब हो रहा है'- Taapsee Pannu

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi