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चयन समिति ने आलोक वर्मा को हटाने का फैसला बहुत ही जल्दबाजी में किया: SC पूर्व जज

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए.के पटनायक का कहना है कि मामले की जांच करने के बावजूद सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) के रिपोर्ट में कहीं भी मेरा निष्कर्ष नहीं है

Updated On: Jan 12, 2019 11:05 PM IST

FP Staff

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चयन समिति ने आलोक वर्मा को हटाने का फैसला बहुत ही जल्दबाजी में किया: SC पूर्व जज

'पूर्व CBI प्रमुख आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई साक्ष्य मौजूद नहीं हैं. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने आलोक वर्मा को हटाने का फैसला बहुत ही जल्दबाजी में किया है.' ऐसा कहना है सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए.के पटनायक का. पटनायक ने वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की सतर्कता जांच की निगरानी भी की है. उनका कहना है कि सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) के रिपोर्ट में कहीं भी मेरा निष्कर्ष नहीं है.

एनडीटीवी के अनुसार आलोक वर्मा के खिलाफ हुई जांच पूरी तरह से उनके डिप्टी, सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की शिकायत पर आधारित थी. पूर्व न्यायाधीश ने यह भी कहा कि सतर्कता निकाय द्वारा उन्हें भेजी गई जांच रिपोर्ट अस्थाना द्वारा हस्ताक्षरित थी, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इसे सीवीसी के सामने नहीं रखा.

जस्टिस पटनायक के इन खुलासों के बाद, कांग्रेस ने आज मांग की कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति फिर से मिले और श्री वर्मा को फिर से वापस लाया जाए. कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने शनिवार सुबह इस पूरे मामले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि यह किस तरह की स्पिन डॉक्टरिंग है? वे जल्दी में हैं और वे चिंतित हैं. क्यूं? क्या इसलिए कि महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल उठ रहे हैं? क्या इसलिए कि सीबीआई निदेशक के पास राफेल फाइलें थीं?

सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कहा कि आलोक वर्मा को हटाया जाना 'अन्याय' था

वरिष्ठ बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में चयन समिति द्वारा सीबीआई निदेशक के पद से आलोक वर्मा को हटाया जाना 'अन्याय' था. इसी के साथ उन्होंने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच का जवाब देने के लिए वर्मा को आमंत्रित किया जाना चाहिए था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक स्वामी ने कहा कि वह पूरी तरह से जस्टिस (रिटायर्ड) पटनायक से सहमत हैं कि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं था और सीवीसी जो कहती है वह अंतिम शब्द नहीं हो सकता है. जस्टिस पटनायक ने वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी की थी.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्मा को फिर से बहाल करने के ठीक बाद ही उन्हें इस पद से हटा दिया गया. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जस्टिस पटनायक ने वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोपों और ड्यूटी से हटाने के चयन समिति के फैसले की आलोचना की थी. साथ ही उन्होंने इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया था.
स्वामी ने कहा कि वह पूरी तरह से जस्टिस पटनायक के बयान से सहमत हैं कि वर्मा को सीवीसी की जांच में आरोपों का जवाब देने के लिए कहा जाना चाहिए था. स्वामी ने कहा कि स्पेशल कमेटी को जस्टिस पटनायक की टिप्पणी भी ध्यान में रखनी चाहिए थी और वर्मा से जवाब देने के लिए कहा जाना चाहिए था.

 

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