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शशिकला को 5 दिन का ‘गैर राजनीतिक’ पैरोल भी ला सकता है AIADMK के भविष्य में अहम बदलाव

एआईएडीएमके में अभी भी ऐसे लोग हैं जो पूरे उत्साह के साथ चेन्नई में शशिकला की उपस्थिति पर नजर रखेंगे

Updated On: Oct 07, 2017 08:32 PM IST

T S Sudhir

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शशिकला को 5 दिन का ‘गैर राजनीतिक’ पैरोल भी ला सकता है AIADMK के भविष्य में अहम बदलाव

वीके शशिकला को 15 दिन के बजाए 5 दिन के पैरोल की अनुमति के पीछे एक अहम वजह यह हो सकती है कि उनके पति अब बहुत गंभीर स्थिति में नहीं हैं. मंगलवार को चेन्नई के ग्लेन इगल्स ग्लोबल हॉस्पिटल में उनकी ऑर्गेन प्लांट सर्जरी हुई, जब एक 19 साल के युवक का लीवर और उसकी एक किडनी उनके शरीर में ट्रांसप्लांट की गई.

इसलिए जब शशिकला शुक्रवार को अपराह्न तीन बजे परप्पाना अग्रहरा से बाहर निकलीं, बेंगलुरु जेल के अधिकारियों ने उनके लिए मुख्य दरवाजे खोलने से पहले चारों तरफ के रास्ते बंद कर दिए थे. स्थिति साफ थी: वह किसी से मिल नहीं सकतीं, न अपने घर पर (वह अपनी ननद इलावारसी की बेटी के घर टी नगर में रहेंगी) और न ही अस्पताल में.

वह किसी सार्वजनिक, राजनीतिक या पार्टी संबंधित गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकतीं. वह मीडिया से भी नहीं मिल सकतीं और वह केवल उसी अस्पताल में जा सकती हैं जहां उनके पति एम नटराजन भर्ती हैं. इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर अगले तीन साल के लिए वह किसी पैरोल के बारे में सोच भी नहीं सकतीं.

सख्त हैं पैरोल की शर्तें

पैरोल की शर्तें हमेशा सख्त होती हैं, लेकिन इस मामले में यहां तक कि तमिलनाडु सरकार ने भी इस बात पर जोर दिया कि शशिकला को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा जाए. पैरोल में चेन्नई पुलिस से अनापत्ति प्रमाणपत्र को अनिवार्य बना दिया गया है.

मुख्यमंत्री एडाप्पडी पलानीस्वामी के चिंतित होने की भी कई वजह हैं क्योंकि वे जानते हैं कि अगले पांच दिन का शशिकला भरपूर उपयोग करने वाली हैं. हालांकि वह केवल अपने पति से मिलने के लिए जेल से बाहर आई हैं लेकिन उन्हें कई अन्य राजनीतिक कार्य भी पूरे करने हैं. शशिकला की अनुपस्थिति में उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण को पलानीस्वामी ने नियंत्रित किया.

SASIKALA CRYING

पलानीस्वामी, जिसे दिनाकरण-शशिकला ने मिलकर तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाया था. लेकिन पलानीस्वामी ने फरवरी में शशिकला के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले ओ पन्नीरसेल्वम के साथ हाथ मिलाकर मन्नारगुडी वंश पर अंकुश लगा दिया.

शशिकला पैरोल की शर्तों का उल्लंघन करती दिखना नहीं चाहतीं. लेकिन, एआईएडीएमके नेताओं को उनके संपर्क में रहने से तो किसी ने नहीं रोका है जो उनसे नटराजन के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ कर सकते हैं? कर्नाटक पुलिस के लिए यह मुश्किल होगा कि इस औपचारिकता का निर्वाह करने से वह रोके और शशिकला को अपने घेरे में रखें.

कपड़ा मंत्री ओ.एस मनियन पहले ही कह चुके हैं कि वे रिहाई के बाद शशिकला से मिलेंगे. कई अन्य नेता भी उनसे मिलने की इच्छा जता चुके हैं. दिनाकरण कैंप के लिए यह दिखाना भी महत्वपूर्ण होगा कि उनकी नेता को चूक चुकी राजनीतिक ताकत के रूप में समझा नहीं जा सकता. यहां तक कि जब जयललिता जीवित थीं, शशिकला ही पोएस गार्डन के भीतर उनकी ओर से संपर्क केंद्र थीं और इसी पाइपलाइन के जरिए सुप्रीमो के सामने लोग अपने दावे रखते थे.

एआईएडीएमके के लोग यह भी कह सकते हैं कि दिनाकरण और शशिकला के कॉल में जमीन-आसमान का फर्क है और विरोधी कैंप में चले गए वफादारों को आकर्षित करने का प्रयास चिनम्मा करेंगी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता.

AIADMK senior leader and highways minister Edappadi K Palaniswami,

क्या शशिकला को पैरोल से कम होंगी दिनाकरण की मुश्किलें

शशिकला को ऐसे समय में पैरोल मिला है जब चीजें दिनाकरण के लिए अनुकूल नहीं लगतीं. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कहा है कि वह 10 नवंबर से पहले ‘दो पत्ती’ चुनाव चिह्न पर फैसला करे. सर्वोच्च अदालत ने दिनाकरण की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें इसके लिए फरवरी 2018 की डेडलाइन का आग्रह किया गया था.

इसके अलावा दिनाकरण कैंप के 18 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के मामले पर भी मद्रास हाईकोर्ट जल्द फैसला देने वाला है. अगर ये फैसला खिलाफ में गया, तो इसका मन्नारगुडी परिवार के राजनीतिक भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा.

जब शशिकला के पैरोल आवेदन की प्रक्रिया चल रही थी, ईपीएस सरकार ने दिनाकरण कैंप को डराने की कोशिश करते हुए टीटीवी और 16 अन्य उनके समर्थकों पर NEET पैंपलेट बांटने के आरोप में देशद्रोह का आरोप जड़ दिया. यह पैंपलेट राज्य और केंद्र सरकार के लिए अहम थे जिसमें एक ऐसी नीति पर अमल करने की बात कही गई थी जिसकी वजह से मेडिकल छात्रा अनिता को आत्महत्या करनी पड़ी. उसने 1 सितंबर को इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि वह अपने लिए मेडिकल सीट सुरक्षित नहीं करा सकी थी.

देशद्रोह की व्याख्या से जुड़ी धारा 125 सलेम पुलिस ने लगाई थी, जो पलानीस्वामी के गृह जिले में पड़ता है. इससे उनकी बदनीयती का पता चलता है कि असंतुष्टों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई.

लेकिन एआईएडीएमके में अभी भी ऐसे लोग हैं जो पूरे उत्साह के साथ चेन्नई में शशिकला की उपस्थिति पर नजर रखेंगे. उन्हें मिली अस्थायी राहत आने में शायद थोड़ी देर हो गई.

जिन लोगों ने ईपीएस-ओपीएस के साथ चलने का फैसला किया है और नई दिल्ली में नए राजनीतिक केंद्र की भी उन्हें चिंता नहीं है क्योंकि वे जानते हैं कि तमिलनाडु की सड़कों पर शशिकला के लिए सद्भावना नहीं रह गई है. यही उन्हें राजनीतिक रूप से चूक चुकी ताकत के रूप में इंगित करता है. जिसका मतलब है कि 5 दिन बीत जाने और शशिकला के दोबारा कैद में लौट जाने के बाद ही चेन्नई में कामकाज आम दिनों की तरह हो पाएगा.

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