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समाजवादी पार्टी- 'खाता न बही, जो अध्यक्ष जी कहें वही सही' 

भीतर खाने में एक बात स्पष्ट है कि न तो मुलायम सिंह यादव अखिलेश का नुकसान चाहते हैं और न ही अखिलेश उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करने के मूड में हैं

Utpal Pathak Updated On: Oct 17, 2017 04:25 PM IST

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समाजवादी पार्टी- 'खाता न बही, जो अध्यक्ष जी कहें वही सही' 

अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते में आगरा में हुई समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में निर्विरोध अगले 5 सालों के लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद सोमवार को अखिलेश यादव ने अपनी नई टीम घोषित की घोषणा दिवाली की छुट्टियों से पहले ही कर दी.

हालांकि यह जल्दबाजी आगामी निकाय चुनावों और लोकसभा की दो सीटों के उपचुनाव के संदर्भ में भी है लेकिन इस नई सूची में से शिवपाल समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं के नाम न होने से देश के सबसे बड़े सूबे में समाजवादी परिवार के संदर्भ में हो रही चर्चाओं पर एक ठहराव सा आ गया है.

लखनऊ में जब सोमवार दोपहर समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित की गई, तब इस सूची  में से शिवपाल सिंह यादव और उनके समर्थकों के नाम गायब थे. जबकि रामगोपाल यादव का कद और बढ़ा कर उन्हें एसपी का प्रमुख महासचिव बना दिया गया है.

एसपी नेता रामगोपाल यादव की तरफ जारी से जारी की गई 55 सदस्यीय सूची में बीएसपी से एसपी में आए इंद्रजीत सरोज को महासचिव बनाया गया है. किरणमय नंदा एसपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं. वहीं आजम खान, रमाशंकर राजभर और नरेश अग्रवाल, को पार्टी के महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गयी है. बंगाल से किरणमय नंदा को पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर बरकरार रखा गया है.

नई कार्यकारिणी में अखिलेश की युवा टीम के साथियों को भी स्थान दिया गया है और इस क्रम में संजय सेठ जिन्हें कोषाध्यक्ष बनाया गया है के साथ डॉ. अभिषेक मिश्रा समेत अन्य कई प्रमुख नाम हैं.

रामगोपाल की तरक्की के मायने

अब तक पार्टी के महासचिव रहे रामगोपाल यादव की पदोन्नति हो गई है और उन्हें अब प्रमुख महासचिव बना दिया गया है.  हालांकि इस 'प्रमुख' महासचिव के पद को लेकर लखनऊ में चर्चाओं का बाजार गर्म है लेकिन इस विशेष पद के माध्यम से रामगोपाल की वरीयता को तवज्जो देने की कोशिश अब स्पष्ट है. इसके अलावा परिवार से एकमात्र सदस्य जिसे कार्यकारिणी में जगह मिली है वह और कोई नहीं बल्कि रामगोपाल के पुत्र अक्षय यादव हैं.

Akhilesh Yadav Mulayam Singh Yadav

पिता का वात्सल्य और पुत्र का धर्म

राजनीतिक गलियारों में भले ही अखिलेश मुलायम के रिश्तों में खटास को लेकर नाना प्रकार की खबरें तैर रही हों. लेकिन भीतर खाने में एक बात स्पष्ट है कि न तो मुलायम सिंह यादव अखिलेश का नुकसान चाहते हैं और न ही अखिलेश उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करने के मूड में हैं.

इस कार्यकारिणी की सूची में से पार्टी का संरक्षक रहे मुलायम सिंह यादव का नाम नहीं है लेकिन अखिलेश ने अपने पिता के सभी खास लोगों को पार्टी की कार्यकारिणी में पद देकर बहुत हद तक स्थिति साफ कर दी है कि अब समाजवादी पार्टी में सब कुछ उनकी मर्जी और पिता के आशीर्वाद से ही होगा.

नेताजी का नाम न होने के बाबत पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी भी ने इस बारे में कोई टिप्पणी न करते हुए गोल मोल जवाब ही दिया और कहा कि 'पार्टी के संविधान में संरक्षक नाम के पद का कोई प्रावधान ही नहीं है. लेकिन लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता होने के कारण नेताजी स्वतः ही पदेन सदस्य के तौर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हैं. लिहाजा उनका नाम तो पहले से ही है.'

Akhilesh Yadav With Cycle

क्या खास है अखिलेश की नई टीम में

अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह यादव के करीबियों को विशेष तरजीह तो दी ही है. बल्कि पिता के आदेशानुसार जातिगत गणित को भी ध्यान में रखा है.

अखिलेश ने पार्टी के नये संविधान के अनुसार एक उपाध्यक्ष, एक प्रमुख महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, 10  महासचिव और 10 सचिव नियुक्त किए हैं. कार्यकारिणी में 25 सदस्य और 6 विशेष आमंत्रित सदस्य भी नामित किए गए हैं.

अखिलेश ने पिछड़ों को भी खासी तरजीह देते हुए प्रमुख महासचिव के अलावा बाकी महासचिवों में से पांच पिछड़े वर्ग से और तीन दलित वर्ग से नियुक्त किये हैं, दलितों में पासी समाज को ज्यादा तरजीह दी गई है. इसके अलावा सचिवों में भी चार पिछड़े वर्ग से हैं. पार्टी में परिवारवाद को सिकोड़ने के उद्देश्य से अखिलेश ने राम गोपाल के बेटे अक्षय यादव के अलावा परिवार के किसी सदस्य को कार्यकारिणी में जगह नहीं दी है.

अल्पसंख्यक समुदाय, महिलाओं को भी मिली तवज्जो

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अल्पसंख्यक समुदाय से 7 लोगों को जगह दी गई है. आजम खां को राष्ट्रीय महासचिव, कमाल अख्तर और जावेद आब्दी को सचिव बनाया गया है. वहीं अहमद हसन, अबु आजमी और जावेद अली खान को कार्यकारिणी सदस्य और अल्ताफ को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में नामित किया गया है.

इस भारी भरकम राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पांच महिलाओं को भी जगह दी गई है. डॉ. मधु गुप्ता और अरुणा कोरी को सचिव बनाया गया है. जबकि जया बच्चन, ऊषा वर्मा और जूही सिंह को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया है.

mulayam singh yadav and shivpal singh yadav

फिर ठगे गए शिवपाल

पिछले दिनों लखनऊ में मुलायम अखिलेश की मुलाकातों और राष्ट्रीय अधिवेशन समेत अन्य घटनाक्रम के बाद इस बात की चर्चा थी कि परिवार में अब शांति है और जल्द ही शिवपाल को कोई बड़ी जिम्मेदारी देकर वापस बुला लिया जाएगा.

पूर्व कैबिनेट मंत्री और इटावा के जसवंतनगर से विधायक शिवपाल सिंह यादव ने भी पिछले दिनों अखिलेश को आशीर्वाद देकर मलाल खत्म हो जाने का संदेश देने की कोशिश की थी लेकिन इस घोषणा के बाद शिवपाल आहत हैं और इस मामले पर बात करने से कतरा भी रहे हैं.

सोमवार जो जब शिवपाल अपने पैतृक निवास में परिवार के साथ दिवाली मनाने की बात कर ही रहे थे कि टीवी चैनलों पर एसपी की नई कार्यकारिणी घोषित होने की खबर चलने लगी जिसमे से उनका नाम गायब था. शिवपाल अभी तक पार्टी का हिस्सा जरूर हैं लेकिन इस नयी कार्यकारिणी के जरिए अखिलेश यादव ने उन्हें घोषित रूप से किनारे कर दिया है.

सूची से गायब है बनारस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र वाराणसी एसपी की इस सूची में अपना नाम दर्ज करा पाने में कामयाब नहीं हो पाया है. इस सूची में अखिलेश ने जिलेवार और राज्यवार प्रतिनिधित्व का विशेष  ध्यान भले ही रखा हो लेकिन समाजवादियों का गढ़ माने जाने वाले बनारस से कोई नाम न होना भी एक प्रकार का चौंकाने वाला संदेश है. वाराणसी में जहां एक तरफ एसपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की बोलती बंद है तो वहीं बीजेपी समेत दूसरे दलों में इस बात को लेकर गहरी चर्चाएं हो रही है.

एसपी के अंदरखाने में कुछ लोग इस बात को भी बोलते पाए गए कि नए समीकरणों के अनुसार बनारस में कोई भी एक ऐसा नेता नहीं जो कार्यकारिणी समिति में जगह बना सके.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी में बीजेपी की सक्रियता से लोहा लेने के लिये एसपी अब भी कोई सीधा रास्ता निकाल पाने की स्थिति में नहीं है. दूसरी तरफ इस बात की भी अटकलें हैं कि वाराणसी को लेकर अखिलेश और राहुल गांधी के बीच हुई किसी आपसी सहमति के तहत एक एक कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है.

Akhilesh Dimple

एसपी 2.0

बहरहाल ताजा घटनाक्रम के बाद अखिलेश के नेतृत्व में बनी एक नई एसपी हिमाचल प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में हिस्सा लेने जा रही है और वहां जिलों के प्रभारी भी नियुक्त कर दिए गए हैं.  उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों में एसपी-कांग्रेस द्वारा संयुक्त प्रत्याशी लड़ाए जाने की चर्चाओं के बीच आगामी निकाय चुनावों में भी ऐसे ही किसी संभावित गणित की आशंकाएं अधिक हैं.

ऐसे में अपने और अपने पिता के खास लोगों के लेकर मैदान में उतरने को तत्पर अखिलेश के लिए आने वाला समय असली परीक्षा की घड़ी है. शिवपाल के पास अब भी संगठन का आधा से अधिक समर्थन है और जिलेवार समर्थकों के मामले में भी वो मजबूत हैं.

ऐसे में कांग्रेस का प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन अखिलेश के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है. अखिलेश इन दिनों योगी और बीजेपी के खिलाफ आक्रामक हैं और बड़े ही सधे हुए तरीकों से लगातार प्रहार कर रहे हैं लेकिन बीजेपी ने अब तक अपना तुरुप का पत्ता नहीं खोला है. देखना होगा कि आगामी लोकसभा चुनावों से पहले होने वाला एक और संभावित बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम कब और कैसे होता है.

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