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लोग तो सैफुल्ला एनकाउंटर पर भी सवाल करेंगे: केपीएस गिल

शक की गुंजाइश नहीं बनती कि सैफुल्ला भारत में आईएस के लिए काम कर रहा था.

Updated On: Mar 10, 2017 07:47 AM IST

KPS Gill

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लोग तो सैफुल्ला एनकाउंटर पर भी सवाल करेंगे: केपीएस गिल

यूपी एटीएस ने बुधवार तड़के मुठभेड़ में ढेर हुए आईएस आतंकवादी सैफुल्ला उर्फ अली पर सवाल नहीं किए जाने चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा होगा. बहुत से लोग अपने-अपने कारणों से इस एनकाउंटर पर सवाल उठाएंगे.

अब भारतीय जांच एजेंसियों को बड़ी सतर्कता से काम लेना है. एजेंसियों को साबित करना होगा कि सैफुल्ला आईएस के लिए काम कर रहा था. जांच इस कदर बारीकी से और जल्दी होनी चाहिए कि उस पर न तो कोई सवालिया निशान लगा सके और न ही अदालत में जांच एजेंसियों को केस साबित करने में कोई परेशानी खड़ी हो.

कई दूसरे देशों की तुलना में भारतीय अदालतों में केस को सही साबित करने के लिए एजेंसियों को ज्यादा मेहनत करना पड़ता है. ज्यादा सबूत देने होते हैं. इसलिए जरूरत है कि मौके से मिले सबूतों को जल्दी से लैबोरेट्रीज में जांच के लिए भेज दें. बड़ी सतर्कता के साथ.

आईएस के निशाने पर यूपी-एमपी क्यों

आने वाले समय में सवाल यह भी उठेगा कि आखिर आईएस ने मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को ही सबसे पहले क्यों चुना?

आतंकवाद निरोधी अभियानों का मेरा अनुभव तो यह कहता है कि आईएस दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों की ओर रुख नहीं करेगा. न पंजाब की ओर बढ़ेगा. मुंबई-दिल्ली में केंद्रीय एजेंसियों की पैनी नजर हर वक्त रहती है.

पंजाब में चूंकि पॉलिटिकल-सोशल बेस इतना मजबूत है कि वहां की जनता और नेता दोनो की ही नजरें आतंकवाद के खिलाफ पैनी हैं. पंजाब अब वो पंजाब नहीं रह गया है, जब वहां मर्डर होते थे, और नेता कहते थे कि मर्डर तो होते ही रहते हैं.

जब पंजाब से आतंकवाद के खात्मे की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आई, मैने वहां के नेताओं को दोटूक समझा दिया था, कि यह सिर्फ मर्डर नहीं है, यह आतंकवाद है. पंजाब के नेताओं की समझ में आ गया था कि गिल उनकी बात न समझकर अपनी ही बात उन्हें समझाने पर आमादा है, तो पंजाब से आतंकवाद का खात्मा हो गया.

भारत में आईएस के लिए यूपी, बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, हैदराबाद आसान टारगेट हो सकते हैं. पंजाब में आतंकवाद को नेस्तनाबूद करने का अनुभव हो या फिर असम में शांति लाने की मेरी जिम्मेदारी. दोनों राज्यों के अनुभव से मैंने यही सीखा है कि आतंकवादी संगठन कोई भी हो... बेस बनाने के लिए वो पॉलिटिकल सहारा जरूर खोजते हैं.  अगर पॉलिटिकल बेस न बन पाये तो आंतकवाद की कमर खुद ही टूट जायेगी.

पंजाब में अगर मैंने पॉलिटिकल बेस नेस्तनाबूद न किया होता, तो शायद वहां आतंकवाद कभी खत्म ही न हुआ होता.

आईएस ने जिम्मेदारी क्यों नहीं ली

सवाल ये भी होगा कि आईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी क्यों नहीं ली जैसा कि वो पश्चिम के दूसरे देशों में करता है?

दरअसल इस मामले में आईएस आतंकवादी सैफुल्ला उर्फ अली पर आईएस कर्ताधर्ता-जन्मदाताओं की चुप्पी जायज है. वो बोलें तो क्या बोलें और कैसे बोलें? दुनिया भर में कहीं भी अपने हमलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने वाले आतंकवादी संगठन आईएस को भारत ने बोलने के काबिल ही नहीं छोड़ा है.

ISIS-1

सैफुल्ला के कमरे में मिला आईएसआईएस का झंडा.

7 मार्च को भोपाल-पैसेंजर ट्रेन में विस्फोट, लखनऊ में सैफुल्ला के ढेर होने, कानपुर और मध्य प्रदेश में संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर आईएस के कर्ताधर्ता महज इसीलिए चुप्पी साधकर बैठ गए हैं क्योंकि दुनिया में तबाही के लिए कुख्यात इस आतंकवादी संगठन को इस बार भारत में मुंह की खानी पड़ी है. ट्रेन में विस्फोट करके भी सैफुल्ला और उसके साथी आतंकी कोई ज्यादा नुकसान नहीं कर पाये.

यूपी और मध्य प्रदेश की पुलिस ने संगठन के कई संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया. मास्टरमाइंड सैफुल्ला उर्फ अली को 11-12 घंटे चली मुठभेड़ में यूपी एटीएस ने मार गिराया है. ऐसे में भला आईएस क्या जिम्मेदारी ले?

हां, सैफुल्ला और उसके साथी अगर इन वारदातों में जान-माल का नुकसान कर पाते, तो आईएस दुनिया को सुनाने के लिए चीखता-चिल्लाता कि हमने (आईएस) भारत को दहला दिया है. बिना किसी बड़ी वारदात को अंजाम दिये ही सैफुल्ला का मौत के घाट उतर जाना और साथियों की गिरफ्तारी तो आतंकवादी संगठनों के लिए शर्म की बात हो गई है. मुझे तो लगता है कि भारत में घुसपैठ साबित करने के अपने पहले प्रयास में ही आईएस फेल हो गया है.

मानसिकता का सवाल भी

आतंकवादियों और उनके कर्ताधर्ताओं की मानसिकता क्या होती है? वो कैसे काम करते हैं? उन्हें अपना बेस मजबूत करने के लिए किन-किन चीजों की जरुरत होती है? पंजाब में फैले आंतकवाद को नेस्तनाबूद करने के दौरान मैने इस सबको करीब से देखा-परखा है.

अब सवाल पैदा होता है कि लखनऊ में मारा गया आतंकवादी सैफुल्ला क्या वास्तव में आईएस का आदमी था. अब तक जो कुछ खबरों में देखा-पढ़ा है कि सैफुल्ला के पास से बरामद ढेरों गोला-बारुद और आईएस का झंडा दिखाता है कि वो आम मुजरिम नहीं था.

आखिरी समय तक सैफुल्ला को सरेंडर के रास्ते दिए गए थे, लेकिन वो जान लेने और जान देने पर ही आमादा रहा- इस तरह की कट्टरता आईएस के आतंकवादियों में होती है. कुल मिलाकर शक की गुंजाइश नहीं बनती कि सैफुल्ला भारत में आईएस के लिए काम कर रहा था.

(पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल के साथ संजीव कुमार सिंह चौहान की बातचीत पर आधारित)

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