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कर्नाटक में कांग्रेस-JDS का गठबंधन बस अपने फायदे के लिए: साध्वी ज्योति

मोदी सरकार में मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कर्नाटक में कांग्रेस और जद(एस) के हुए गठबंधन को बताया 'स्वार्थी गठबंधन'. बोलीं ज्यादा दिन नहीं चलेगा यह गठबंधन

Bhasha Updated On: May 22, 2018 05:03 PM IST

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कर्नाटक में कांग्रेस-JDS का गठबंधन बस अपने फायदे के लिए: साध्वी ज्योति

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता साध्वी निरंजन ज्योति ने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडी(एस) ‘स्वार्थी उद्देश्यों’ के लिए साथ आए हैं. इसलिए उनका गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चलेगा.

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने एसोचैम के एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि कर्नाटक के लोगों ने बीजेपी को जनादेश दिया है, जिसने 104 सीटें जीतीं. कांग्रेस-जेडी(एस) का गठबंधन स्वार्थी उद्देश्यों से हुआ है और यह गठबंधन अधिक समय तक नहीं चलने वाला है. उन्होंने कहा कि यह ‘नापाक’ गठबंधन कर्नाटक की जनता के हित में नहीं बना है.

निरंजन ने कहा कि अगर इसके इतिहास को देखें तो जेडी(एस) ने पहले भी अपने गठबंधन के सहयोगियों से नाता तोड़ा है. वह लोगों को लंबे समय तक मूर्ख नहीं बना सकती है.

जेडी(एस) नेता एच डी कुमारस्वामी बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. उनके शपथ ग्रहण समारोह में गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शिरकत कर सकते हैं, जिनमें, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के . चंद्रशेखर राव और पिछले दिनों ही एनडीए से अलग हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू शामिल हैं.

कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहेंगी. इनके अलावा, एसपी प्रमुख अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के इस शपथ ग्रहण समारोह में आने की उम्मीद है.

शपथ ग्रहण समारोह को आने वाले 2019 के लोकसभा चुनावों में विपक्ष की एकता के तौर पर देखा जा रहा है. इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गैर बीजेपी नेता देश की बजाय अपना अस्तित्व बचाने के लिए एकजुट हो रहे हैं.

कर्नाटक में सत्ता की उठापटक के बाद जेडीए(एस) के नेता कुमारस्वामी बुधवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं, जिसमें कई विपक्षी नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है. यह समारोह 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है.

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