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आरजेडी-आरएलएसपी साथ-साथ ! बिहार में पाला बदलेंगे उपेंद्र कुशवाहा ?

आरजेडी के साथ धीरे-धीरे ही सही, बढ़ रही उपेंद्र कुशवाहा की नजदीकी ने आरएलएसपी के एनडीए में बने रहने पर ही सवाल खड़ा कर दिया है

Updated On: Jan 30, 2018 05:08 PM IST

Amitesh Amitesh

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आरजेडी-आरएलएसपी साथ-साथ ! बिहार में पाला बदलेंगे उपेंद्र कुशवाहा ?

क्या आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा एनडीए से अलग होंगे ? क्या कुशवाहा एनडीए का साथ छोड़ अब जल्द ही आरजेडी का दामन थाम लेंगे ? ये चंद सवाल हैं जो इस वक्त बिहार की सियासी फिजां में तैर रहे हैं. अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं.

बिहार की सियासत में हलचल है. ऐसा होना लाजिमी भी है, क्योंकि गांधी जी की पुण्यतिथि के मौके पर आरएलएसपी की तरफ से आयोजित ‘शिक्षा सुधार, मानव कतार’ कार्यक्रम में उपेंद्र कुशवाहा के साथ आरजेडी के तीन बड़े नेता दिख गए. लेकिन, चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस कार्यक्रम में बीजेपी और जेडीयू के अलावा एलजेपी के नेता भी नदारद थे.

कुशवाहा के साथ कतार में आरजेडी नेता !

पटना में एक सरकारी स्कूल के सामने मानव कतार में खड़े आरजेडी के बिहार अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे, आरजेडी के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी और एक और नेता तनवीर हसन दिख रहे थे. इस कार्यक्रम में आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव के साले साधु यादव भी मौजूद रहे.

रही सही कसर पूर्व डिप्टी सीएम और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव के ट्वीट से पूरी हो गई. तेजस्वी यादव ने बिहार में बदहाल शिक्षा-व्यवस्था के साथ मानव कतार का समर्थन किया.

यूं तो आरएलएसपी की तरफ से बिहार में शिक्षा की बदहाली और उसमें जरूरी सुधार को लेकर मानव कतार बनाने का आह्वान किया गया था. लेकिन, शिक्षा में बदहाली की बात जेडीयू को अखर गई. बस यहीं से सियासी बवाल ऐसा खड़ा हुआ जिसकी धमक अब पटना से लेकर दिल्ली तक सुनाई देने लगी है.

जेडीयू को चुभी आरजेडी के साथ कुशवाहा की गलबहियां

जिस बदहाल शिक्षा-व्यवस्था को उपेंद्र कुशवाहा मुद्दा बना रहे हैं, उसके निशाने पर सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही हैं जो 2005 से ही बिहार में सरकार के मुखिया रहे हैं. दूसरी तरफ, नीतीश कुमार की विरोधी आरजेडी के नेता जब कुशवाहा के साथ दिख गए तो यह बात जेडीयू को कुछ ज्यादा ही चुभ गई.

जेडीयू के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि ‘कसाई और बकरी की तुलना नहीं हो सकती. उपेंद्र कुशवाहा आरजेडी के साथ खड़े हैं, ऐसे में जेडीयू उनके साथ खड़ी नहीं हो सकती.’ जेडीयू प्रवक्ता ने आरजेडी की तुलना कसाई से और उपेंद्र कुशवाहा की तुलना बकरी से कर दी.

UPENDRA KUSHWAHA

जेडीयू की तरफ से आई इस प्रतिक्रिया के बाद तो और सियासी बवाल मच गया है. आरएलएसपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि ने राजधानी दिल्ली में ऐसा बयान दिया जिसके बाद पूरे बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा बढ़ गया है.

आरएलएसपी को भी अब परवाह नहीं

नागमणि ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान कहा कि ‘मेरा नाम नागमणि है. मैं दुश्मनों के लिए नाग और दोस्तों के लिए मणि हूं.’ जेडीयू को नसीहत देते हुए नागमणि ने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस वक्त बिहार का सबसे कमजोर नेता बता दिया.

नागमणि ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान कड़े लहजे में नीतीश कुमार को चेतावनी देते हुए उन्हें आगाह किया कि ‘बिहार में उनके पास अब महज 1.5 फीसदी ही वोट बच गए हैं. बीजेपी उन्हें दूध की मक्खी की तरह निकाल कर फेंक देगी.’

नागमणि यहीं नहीं रुके, उनकी तरफ से बिहार में नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के बावजूद आरएलएसपी के कोटे के मंत्री नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जताई.

नागमणि के लहजे में तल्खी दिख रही है जो कि नीतीश कुमार के ही बहाने सही बीजेपी के लिए भी चेतावनी है. ऐसे में आरएलएसपी के ताजा रुख ने एक नई संभावना को भी जन्म दे दिया है.

उपेंद्र कुशवाहा की आरजेडी के साथ नजदीकी और जेडीयू के साथ तनातनी के बीच अभी हाल ही में आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कुशवाहा के जल्द ही आरजेडी के साथ होने को लेकर जो बयान दिया था, उसने बिहार की सियासत में बवाल मचा दिया था.

नागमणि ने दिए अलग होने के संकेत !

अब आरएलएसपी के कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि की तरफ से भी दिया गया बयान एक बार फिर से उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम को लेकर कई सवाल खड़ा कर रहा है. नागमणि का कहना है कि ‘अगर एनडीए के भीतर उचित मान- सम्मान और हिस्सेदारी नहीं मिलती है तो फिर हम इस बारे में विचार करेंगे.’

आरजेडी के साथ चुनाव लड़ने के बारे में पूछे गए सवाल पर नागमणि का कहा कि ‘इस वक्त बिहार में यादव-मुसलमान आरजेडी के साथ खड़े हैं जिनकी आबादी 15-15 फीसदी है. अगर उनके साथ 10 फीसदी कुशवाहा वोट भी आ जाए तो यह आंकड़ा 40 फीसदी हो  जाएगा. ऐसी सूरत में एनडीए के पास महज 30-32 फीसदी ही वोट बैंक बच जाएगा.’

नीतीश की वापसी के बाद बदल गए समीकरण

Patna: Union Finance Minister Arun Jaitley and Bihar Chief Minister Nitish Kumar at a marriage ceremony in Patna on Sunday. PTI Photo (PTI12_3_2017_000164B)

नागमणि के तल्ख बयानों ने एनडीए के भीतर चल रही उलझन और खींचतान को सतह पर ला दिया है. यह संकेत है बिहार में 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मचने वाली उलटफेर की क्योंकि नीतीश कुमार के वापस एनडीए में आने के बाद अब बीजेपी के साथ-साथ उसके साथी-सहयोगियों रामविलास पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को भी सीटों से समझौता करना होगा.

पिछली बार तीन सीटों पर चुनाव लड़कर तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने वाली आरएलएसपी को इस बात का डर सता रहा है कि उसके हिस्से में अब कटौती ना कर दी जाए. क्योंकि आरएलएसपी के जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार पहले ही कुशवाहा से अलग हो चुके हैं.

इसके अलावा पिछली बार आरएलएसपी की जीती हुई सीट सीतामढ़ी पर भी बीजेपी की नजर है. ऐसे में महज एक या दो सीट पर चुनाव लड़ने का संभावित ऑफर का डर आरएलएसपी को सता रहा है.

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की तरफ से दिया गया बयान सोंची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसके दम पर वो बीजेपी और एनडीए पर दबाव बनाने की कोशिश में है, जिससे उसे ज्यादा सीटें मिल सके. वरना आरजेडी का ऑप्शन तो खुला ही है. लेकिन, आरजेडी के साथ धीरे-धीरे ही सही, बढ़ रही उपेंद्र कुशवाहा की नजदीकी ने आरएलएसपी के एनडीए में बने रहने पर ही सवाल खड़ा कर दिया है.

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