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राम और रोहिंग्या पर रणनीति के लिए भोपाल में होगा संघ का विचार मंथन

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी मंडल की सालाना बैठक बारह अक्टूबर से भोपाल में होने जा रही है

Updated On: Oct 07, 2017 09:19 PM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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राम और रोहिंग्या पर रणनीति के लिए भोपाल में होगा संघ का विचार मंथन

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी मंडल की सालाना बैठक बारह अक्टूबर से भोपाल में होने जा रही है. संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित प्रमुख पदाधिकारी बैठक में हिस्सा लेने के लिए भोपाल पहुंच गए हैं. कार्यकारिणी मंडल की बैठक से पहले तीन दिन तक संघ के पदाधिकारी विभिन्न मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे.

चौदह अक्टूबर तक चलने वाली इन बैठकों में रोहिंग्या मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी. केरल और पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हालातों पर भी चर्चा होगी. संघ की इस महत्वपूर्ण बैठक में चुनाव वाले दोनों राज्य गुजरात एवं हिमाचल को लेकर कार्यक्रम तय किए जाने की संभावना भी है.

संघ की इस सालाना बैठक के लिए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महामंत्री रामलाल के हिस्सा लेने की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है. संघ सूत्रों ने यह संभावना जरूर प्रकट की है कि भारतीय जनता पार्टी के कई नेता इस दौरान भोपाल आ सकते हैं. बैठक में राम मंदिर के निर्माण की प्रगति पर भी चर्चा होगी.

सप्ताह भर चलेगा का संघ का चिंतन

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपनी विचाराधारा पर आधारित मुद्दों पर लगातार एक सप्ताह चिंतन करेगा. बैठकों का सिलसिला शनिवार की सुबह से ही प्रारंभ हो गया है. बैठक भोपाल के शारदा बिहार स्कूल एवं प्रशिक्षण संस्थान में हो रही है. संस्थान का संचालन संघ परिवार के अनुषांगिक संगठन द्वारा किया जाता है.

बैठक में देश भर के तीन सौ से अधिक पदाधिकरियों और प्रचारक हिस्सा ले रहे हैं. बारह से चौदह अक्टूबर तक होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी मंडल की बैठक में 42 प्रांतों के सौ से अधिक पदाधिकारी हिस्सा लेंगे. सूत्रों ने बताया बैठक में पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए संघ नई रणनीति भी बना सकता है. इन दोनों राज्यों में संघ के कार्यकर्त्ताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं. केरल में संघ के कई कार्यकर्त्ताओं की हत्या भी हो चुकी है.

VARANASI, INDIA - MARCH 26: RSS Volunteers during Pad Sanchalan at Beniyabag ground on March 26, 2017 in Varanasi, India. (Adarsh Gupta/Hindustan Times via Getty Images)

केरल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होना है. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों केरल में जन रक्षा यात्रा कर रहे हैं. संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि बंगाल और केरल इन राज्यों में सक्रिय राष्ट्र विरोधी ताकतों का मुकाबला करने के लिए स्थानीय भाषा के जानकार कार्यकर्त्ताओं को सक्रिय किए जाने पर भी विचार किया जा सकता है. संघ ऐसे कार्यकर्त्ताओं की पहचान कर रहा है जिनकी बंगाली और मलयाली भाषा पर अच्छी पकड़ है.

संघ अपनी सालाना बैठक के दौरान ही गैर हिंदी भाषी लोगों का एक सम्मेलन भी कर रहा है. बैठक में श्रम साधकों को भी चर्चा के लिए बुलाया गया है. श्रम साधकों का सम्मेलन इसी साल फरवरी में भोपाल में ही आयोजित किया गया था. भोपाल संघ के प्रांत संघ चालक सतीश पिम्पलेकर ने कहा कि केरल और बंगाल के लोगों को संघ से जोड़ने का प्रयास हर स्तर पर किया जा रहा है.

कश्मीर के हालात पर भी होगी चर्चा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत दशहरे पर अपने उद्बोधन में विभिन्न ज्वलंत मसलों पर संघ की राय पहले ही प्रकट कर चुके हैं. राष्ट्रीय कार्यकारिणी मंडल की बैठक में अनुच्छेद 370 पर भी चर्चा होने की संभावना है. संघ का साफ मानना है कि कश्मीर के विस्थापित भारत के नागरिक होते हुए भी राज्य की भेदभाव पूर्ण व्यवस्था के चलते मूल अधिकारों से वंचित हैं.

शिक्षा,आजीविका तथा प्रजातांत्रिक सुविधाओं से अभी भी दूर हैं. बहुत पिछड़ गए हैं. इनकी समस्याएं जस की तस हैं. संघ का मानना है कि संवैधानिक प्रावधान किए बगैर जम्मू-कश्मीर के लोग देश के विकास की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाएंगे. संघ कश्मीर को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की नीति को उचित मानता है.

संघ के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कश्मीर घाटी परिस्थिति को लेकर जिस दृढ़ता के साथ सीमा के उस पार से होने वाली आतंकियों की घुसपैठ और अकारण गोलीबारी का सामना किया जा रहा है,उसका स्वागत हो रहा है. सरकार ने सुरक्षा बलों को कार्यवाही को पूरी छूट दी है. आतंकियों के आर्थिक स्त्रोतों को भी बंद किया है.

रोहिंग्या शरणार्थी बॉर्डर पार करने के बाद नाफ नदी पार करने के लिए नावों का इंतजार करते हुए.

रोहिंग्या बन सकते हैं आतंकी घुसपैठ का जरिया

संघ अपनी तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में रोहिंग्या मुस्लिमों को देश से बाहर करने को लेकर एक प्रस्ताव भी पारित कर सकती है. संघ रोहिंग्य के मुद्दे पर सख्त रूख भी दिखा सकता है. संघ के सूत्रों ने कहा कि हम रोहिंग्या को प्रश्रय देकर बंगालदेशी घुसपैठियों जैसा रूप नहीं देना चाहते हैं.

सूत्रों ने कहा कि म्यांमार से लगातार चलती आई उनकी अलगाववादी हिंसक व आपराधिक गतिविधियों एवं आतंकियों से सांठगांठ के कारण ही रोहिंग्या को खदेड़ा गया. संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि बंगाल और केरल की सरकार ने योजनापूर्वक इसे राजनीतिक रंग दिया है.

प्रशासन रोहिंग्या से उत्पन्न होने वाले राष्ट्रीय संकट के प्रति उदासीन है. संघ की इस बैठक में राम मंदिर के निर्माण की दिशा में हुई प्रगति की भी समीक्षा करेगा. संघ इस मुद्दे का हल आम सहमति से निकालने के पक्ष में दिखाई दे रहा है.

आर्थिक हालातों पर भी होगी चर्चा

जीएसटी और नोटबंदी के बाद बने देश के आर्थिक हालातों पर संघ अपनी तीन दिवसीय बैठक में चर्चा करेगा. संघ के सूत्रों ने कहा कि लोगों को काम और रोजगार मिले यह पहली प्राथमिकता है. संघ का मानना है कि किसान आज दु:खी है. किसान के मन में यह भाव पैदा हो गया है कि नई पीढ़ी को पढ़ा-लिखा कर शहर भेज दिया जाए.

किसानों का शहर की ओर पलायन भी संघ की चिंता का कारण बना हुआ है. संघ परिवार के पास लगातार इस बात की जानकारी भी आ रही है कि फसल बीमा और मृद परीक्षण जैसी योजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है. संघ अपनी बैठक में आर्थिक हालातों पर भी एक प्रस्ताव पारित कर सकता है.

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