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2019 का चुनाव तय करेगा संघ के 'शताब्दी वर्ष' के जश्न का माहौल

देश में दलित, रोजगार और महिला सुरक्षा के विषय पर उठ रहे सवालों के बीच संघ की बैठक में विचारधारा और पहुंच’ का दायरा बढ़ाने पर खासा जोर रहा

Bhasha Updated On: Apr 23, 2018 04:39 PM IST

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2019 का चुनाव तय करेगा संघ के 'शताब्दी वर्ष' के जश्न का माहौल

पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में बीजेपी समेत आरएसएस के सभी सहयोगी संगठनों और वरिष्ठ प्रचारकों ने हिस्सा लिया. इस बैठक में सभी ने ‘विचारधारा और पहुंच’ का दायरा बढ़ाने पर खासा जोर दिया. देश में दलित, रोजगार और महिला सुरक्षा के विषय पर उठ रहे सवालों के बीच पुणे में हुई संघ की इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. क्योंकि इस स्तर की समन्वय बैठक करीब 10 वर्षो के अंतराल पर आयोजित की गई है.

2025 में शताब्दी वर्ष तक पूरे देश में विस्तार चाहता है संघ

बैठक में सभी संगठनों को युवा, कमजोर वर्गो एवं महिलाओं के सशक्तिकरण और उन तक पहुंच बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई. बता दें कि साल 2025 में शताब्दी वर्ष को देखते हुए संघ पूरे देश में अपना विस्तार करना चाहता है. इसी वजह से संघ 2019 के लोकसभा चुनाव को महत्वपूर्ण मानता है. क्योंकि इस चुनाव में बीजेपी की जीत से संघ को पूरे देश में विस्तार करने में मदद मिलेगी.

बैठक में आरएसएस के सभी सहयोगी संगठन शामिल थे

आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 17 अप्रैल से पुणे में आयोजित की गई. इसमें 18 से 20 अप्रैल को मुख्य बैठक हुई जिसमें खास तौर पर समसामयिक मुद्दों पर चर्चा हुई. इन विषयों में मजदूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े विषय प्रमुख थे.

इस बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह, क्षेत्रीय प्रचारकों और प्रांतीय प्रचारकों के अलावा बीजेपी के संगठन मंत्री रामलाल, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ, वनवासी आश्रम समेत सभी सहयोगी संगठनों ने हिस्सा लिया.

संगठन का विस्तार रहा बैठक का मुख्य बिंदु

आरएसएस की इस बैठक के दौरान क्षेत्रीय एचं प्रांतीय प्रमुखों एवं वरिष्ठ प्रचारकों ने अपने लक्ष्यों एवं कार्यो की प्रगति के बारे में रिपोर्ट पेश की. बैठक में इस विषय पर भी विचार किया गया कि कितने कार्य पूरे हुए और कितने शेष रह गए और जमीनी स्तर पर मौजूदा स्थिति का भी जायजा लिया गया.

संगठन के विस्तार के संबंध में संघ के एक अन्य पदाधिकारी ने बताया, ‘पिछले तीन साल में हमने संगठन के विस्तार का एक कार्यक्रम चलाया है. हमारी दैनिक शाखाओं, साप्ताहिक बैठकों और मासिक मंडलियों में इस अवधि में 18 फीसदी वृद्धि हुई. तीन साल पहले हमारी 43,000 स्थानों पर इकाइयां थीं और यह संख्या अब बढ़कर 55,000 हो गई है.’ पदाधिकारी ने दावा किया, ‘पिछले 10 सालों से संघ का कार्य लगातार बढ़ा है. पिछले साल प्राथमिक शिक्षा वर्गो में एक लाख युवाओं ने पूरे देश में हिस्सा लिया.’

भविष्य के वोटरों को संघ से जोड़ा जा रहा है

देश में 18 साल की उम्र पूरी करके मतदान का अधिकार पाने वाले युवाओं की संख्या 1.8 करोड़ है और ये पहली बार मतदान करेंगे. इस बार के लोकसभा चुनाव में इन युवा मतदाताओं की अहम भूमिका भी होगी. संघ से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पहली बार वोटर बनने वाले इन युवाओं से जुड़ने के लिए बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश समेत दक्षिण भारत के राज्यों में व्यापक स्तर पर अभियान शुरू किया है.

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