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2019 की तैयारी में जुटा संघ, पूर्वोत्तर में जीत से मिली नई ताकत

भैयाजी जोशी को फिर से सरकार्यवाह बनाकर संघ ने ये जता दिया है कि वो न सिर्फ एक सर्वोच्च संस्था है, बल्कि मिशन 2019 में वो एक अहम रोल अदा करेंगे

Updated On: Mar 13, 2018 03:54 PM IST

FP Staff

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2019 की तैयारी में जुटा संघ, पूर्वोत्तर में जीत से मिली नई ताकत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सुरेश भैयाजी जोशी को एक बार फिर आरएसएस का सरकार्यवाह चुनकर राजनीतिक गलियारों में नए संदेश दे दिए हैं. संदेश इस बात के कि 2019 के आम चुनाव में एक बार फिर से आरएसएस की भूमिका बड़ी और अहम रहेगी. भैयाजी जोशी को संघ के स्वयंसेवक संत प्रचारक कहते हैं. इसकी वजह है उनकी सादगी.

एक पूर्व मंत्री ने एक बार कहा था कि वे जब नागपुर मुख्यालय में भैयाजी जोशी से मिलने उनके रूम में निर्धारित समय पर पहुंचे तो वहां पूरी तरह अंधेरा छाया था. दरअसल भैयाजी रात का भोजन कर चुके थे, और फिजूल में बिजली का इस्तेमाल करना संघ की परंपरा के खिलाफ था. आज यही भैयाजी जोशी चौथी बार संघ के दूसरे सबसे ताकतवर लीडर बनाए गए हैं, इसका सीधा कारण है कि उनकी संगठन कुशलता, टीम वर्क और प्रतिबद्धता.

आरएसएस ने सुरेश भैयाजी जोशी को सरकार्यवाह का दायित्व देकर बता दिया है कि संघ के मूल्यों और सिद्धांतों पर कोई प्रभाव हावी नहीं हो सकता. बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते 70 ‌साल के जोशी ने खुद ही इस अहम पद से दूर होने की इच्छा जताई थी. बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व ने दत्तात्रेय होसबोले के नाम को आगे बढ़ा रहा था. इसलिए उनके नाम की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन संघ ने ये जता दिया है कि वो न सिर्फ एक सर्वोच्च संस्था है, बल्कि मिशन 2019 में वो एक अहम रोल अदा करेंगे. इसके साथ ही संघ ने एक बार फिर जता दिया है कि मराठी वर्ग का यहां प्रभुत्व कायम रहेगा, जबकि गैर मराठी तीसरे नंबर पर आ गए हैं. त्रिपुरा में जीत से मिली नई ताकत

संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बार की नागपुर बैठक में कई अप्रत्याशित फैसले हुए हैं. भैयाजी को चौथी बार दायित्व सौंपना, चार के स्थान पर छह नए सह सरकार्यवाह बनाना और मध्यक्षेत्र के प्रचारक अरुण जैन को मध्य प्रदेश चुनाव से ठीक आठ महीने पहले हटाना. ये संघ के भीतर भी बड़े बदलाव को बता रहा है. माना जा रहा है कि त्रिपुरा, नगालैंड और मिजोरम में बीजेपी की जीत के परचम ने संघ को नई ताकत दी है. इन प्रदेशों में संघ के स्वयंसेवक जीत के असली नायक थे.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

मोदी लहर में ठहराव!

देश के 21 राज्यों और 31 प्रतिशत वोट बैंक पर अपना कब्जा कर चुकी बीजेपी की राह 2019 में इतनी आसान नहीं दिख रही है. 2014 से शुरू हुई मोदी लहर में थोड़ ठहराव आ गया है. इसे ध्यान में रखते हुए संघ अपनी रणनीति बना रहा है. ये बदलाव एक तरह से उसी रणनीति के तहत माने जा रहे हैं.

टेक्नो फ्रेंडली प्रचारक

मुकुंद सीआर और मनमोहन वैद्य दो नए सह सरकार्यवाह बनाए गए हैं. इस तरह अब कुल छह सह सरकार्यवाह संघ में हो गए हैं. इस तरह संघ ने संगठन की दूसरी और तीसरी लाइन को भी विस्तार देकर मजबूत किया है. मुकुंद सीआर के बारे में कहा जाता है कि वे न सिर्फ युवा है, बल्कि टेक्नोफ्रेंडली भी हैं. संघ के प्रचारकों में अब तकनीक में पारंगत होना अहम माना जा रहा है. वक्त के साथ अपने को सक्षम बनाने में संघ पीछे नहीं है. संघ ने पिछले दिनों अपने यूनिफार्म में बदलाव कर जता दिया की उसे आधुनिकता से परहेज नहीं है.

मध्य प्रदेश में बड़ा बदलाव

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार संघ ने मध्य क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक अरुण जैन को हटाकर नेशनल टीम में जगह दी है. अब दीपक विस्पुते क्षेत्र प्रचारक होंगे. यानी एक तरह से प्रदेश में संघ की कमान उनके हाथों में होगी. ये बदलाव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह, संगठन महामंत्री सुहास भगत, और अरुण जैन के संदर्भ में देखा जा रहा है.

सुहास भगत और अरुण जैन के बीच की सहमति के कारण कई बार शिवराज सिंह और नंदकुमार सिंह असहज और अलग-थलग दिखाई दिए हैं. माना जा रहा है कि मिशन 2018 के पहले ये बदलाव संगठन में किसी भी तरह की असहमति की रेखा को मिटाने के लिए किया गया है.

(न्यूज18 के लिए जयश्री पिंगले की रिपोर्ट)

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