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यौन शोषण मामले में एमपी हाई कोर्ट के जज निर्दोष करार

जांच कमेटी ने राज्यसभा में अपनी 135 पेज की रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें कहा गया है कि उचित सबूत ना मिलने की वजह से अभियुक्त को निर्दोष करार दिया गया है

FP Staff Updated On: Dec 15, 2017 07:29 PM IST

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यौन शोषण मामले में एमपी हाई कोर्ट के जज निर्दोष करार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज को यौन शोषण के मामले में निर्दोष करार दिया गया है. उनके खिलाफ शिकायत मिलने पर राज्यसभा के सभापति की ओर से एक पैनल गठित किया गया था. पैनल ने सबूतों के अभाव में उन्हें निर्दोष करार दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक ग्वालियर की एक महिला जज ने साल 2015 में जस्टिस एके गांगले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने शिकायत दर्ज कराई थी.

उसके बाद राज्यसभा के 58 सदस्यों ने 4 मार्च 2015 को उनके खिलाफ महाभियोग चलाने का प्रस्ताव राज्यसभा के तत्कालीन सभापति हामिद अंसारी को दिया था.

महिला जज ने अपने शिकायत में कहा था कि उन्हें हाई कोर्ट के जज ने अनैतिक संबंध बनाने को कहा. अन्यथा उसे ग्वालियर से सिधी ट्रांसफर कर देने की धमकी दी गई. साथ ही उन्होंने अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल किया.

इसके बाद राज्यसभा के सभापति ने तीन सदस्यों वाला पैनल गठित किया. इसमें जस्टिस आर बानूमति, जस्टिस मंजूला चेल्लूर और वरिष्ठ वकील आर वेणुगोपाल शामिल थे.

सबूतों के अभाव में हुए बरी

कमेटी ने राज्यसभा में अपनी 135 पेज की रिपोर्ट सौंप दी है. जिसमें कहा गया है कि उचित्त सबूत ना मिलने की वजह से अभियुक्त को निर्दोष करार दिया गया है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि महिला जज का ट्रांसफर ग्वालियर के तत्कालीन जिला जज कमल सिंह ठाकुर की सिफारिश के आधार पर किया गया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि उक्त महिला जज गैर-जरूरी बातों को बाहर फैलाती रहती हैं. सहयोगी जजों के साथ उनका व्यवहार ठीक नहीं है.

पूर्व के जजों की भी यही शिकायत थी. इस आधार पर उनका ट्रांसफर किया गया. ऐसे में हाई कोर्ट के जज का इस ट्रांसफर से कोई लेना-देना नहीं है.

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