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RLSP चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने दिया इस्तीफा, पीएम मोदी को पत्र में लिखी ये बड़ी बातें

उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है, उन्होंने पीएम मोदी को इस्तीफा देते हुए एक पत्र लिखा है

Updated On: Dec 10, 2018 02:19 PM IST

FP Staff

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RLSP चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने दिया इस्तीफा, पीएम मोदी को पत्र में लिखी ये बड़ी बातें

RLSP चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक कुशवाहा ने आखिरकार अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. कुशवाहा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, जिसमें वह अपनी पार्टी के एनडीए से अलग होने का ऐलान करेंगे. बताया जा रहा है कि इसके साथ ही वह साढ़े तीन बजे विपक्ष के महागठबंधन की होने वाली बैठक में भी हिस्सा ले सकते हैं. इससे पहले खबर आई थी कि उपेंद्र कुशवाहा ने आज होने वाली एनडीए की बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है. पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले एनडीए ने अपने घटक दलों की अहम बैठक बुलाई है, इसमें उपेंद्र कुशवाहा ने शामिल होने से इनकार कर दिया था. उपेंद्र कुशवाहा 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सीट बंटवारे के मसले पर काफी वक्त से बीजेपी से नाराज चल रहे हैं. पिछले काफी वक्त से कयास लगाए जा रहे हैं कि वो कभी भी एनडीए छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा हो सकते हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है. उन्होंने पीएम मोदी को इस्तीफा देते हुए एक पत्र लिखा है.

माननीय प्रधानमंत्री जी,

आपके नेतृत्व में करीब पांच साल पहले बड़ी उम्मीदों के साथ मैंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हुआ था. 2014 के लोकसभा चुनाव में आपने बिहार और देश के लोगों से कई वादे किए थे. इसी आलोक में मैंने आपको बिना शर्त समर्थन दिया था. हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री रहते हुए आप बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए उन वादों को पूरा करेंगे जो आपने गरीबों और किसानों से किया था, ताकि भारत को पारदर्शी और जिम्मेदार सरकार दिया जा सके. बिहार की अवाम ने आप पर भरोसा और विश्वास करते हुए एनडीए को अपना समर्थन दिया और लोकसभा की 40 में से 31 सीटें भी दीं. लेकिन आपके मंत्रिपरिषद में करीब 55 महीने तक रहने के बाद आपके नेतृत्व से मैं खुद को ठगा हुआ और उपेक्षित महसूस कर रहा हूं. सत्ता में आने के बाद और चुनाव से पहले जो वादे आपने जनता से किए थे उसमें विरोधाभास दिखाई दे रहा है.

2014 और 2015 के चुनाव प्रचार के दौरान आपने बिहार के चीनी मिलों को चालू करने, बिहार को विशेष पैकेज देने, युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के अलावा बिहार के गरीब किसानों को बेहतर सुविधा देने का वादा किया था. लेकिन बहुत ही पीड़ा और दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके नेतृत्व में बिहार के साथ हर स्तर पर न्याय नहीं किया गया. इसके अलावा जातीय जनगणना का प्रकाशन नहीं करना जैसे मुद्दे भी हैं जो आरएलएसपी की नीतियों के खिलाफ है. जस्टिस जी रोहिणी समिति की ओबीसी कैटेगरी को विभाजित करने की रिपोर्ट को जमा नहीं करने से यह साबित होता है कि सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है. इससे ओबीसी में डर और भ्रम की स्थिति बनी हुई है. विश्वविद्यालय प्राध्यापकों की बहाली को लेकर रोस्टर के मुद्दे लंबित रहने की वजह से प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हो पाई और भ्रम की स्थिति बनी रही.

बिहार को विशेष पैकेज देने का वादा भी आपका बड़ा जुमला ही साबित हुआ. भारत सरकार ने बिहार के किसानों को तब बड़ा धोखा दिया, जब किसानों की धान की खरीदारी से केंद्र की सरकार ने हाथ खींच लिए. इससे बिहार के किसानों की हालत और भी खस्ता हो गई. बिहार में जेडीयू-भाजपा की सरकार में कानून-व्यवस्था की स्थिति रोज ब रोज बदतर होती जा रही है और अब तो लगने लगा है कि बिहार में कानून का राज नहीं अपराधियों का राज है. कानून-व्यवस्था पहले से भी बदतर हो गई है. इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है. मेरी पार्टी ने कई कार्यक्रमों के माध्यम से इन मुद्दों पर राज्य सरकार का समय-समय पर ध्यान दिलाया. बिहार सरकार स्वास्थ्य को लेकर भी उदासीन रही और आधारभूत संरचना के निर्माण में नाकाम रही जिसकी वजह से बिहार के लोगों को इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना पड़ता है जो बेहद खर्चीला होता है. बिहार सरकार सांप्रदायिक दंगों को रोकने में नाकाम रही और मॉब लिंचिंग की घटनाएं भी देश भर में बढ़ीं जिसकी वजह से समाज में दूरी बढ़ी. जो देश और समाज के लिए ठीक नहीं कहा जा सकता. स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण के लिए जमीन मुहैया कराने के वादे कई बार किए गए लेकिन इन वादों को भी पूरा नहीं किया गया. बिहार को लेकर आपके इस व्यवहार से तो मुझे पीड़ा हुई ही है, आपके अलोकतांत्रिक नेतृत्व और काम करने के तरीके से भी मैं बहुत आहत हुआ हूं.

आपके मंत्रिपरिषद में कामकाज के जो अधिकार संविधान में दिए गए थे, उसकी लगातार अनदेखी की गई. आपका मंत्रिमंडल महज रबर स्टैंप बन कर रह गया जो बिना किसी विचार-विमर्श या राय देने के आपके आदेश का पालन करता रहा. केंद्र सरकार के विभागों में कार्यरत मंत्री और अधिकारी सिर्फ दिखावे भर के लिए थे क्योंकि सारे फैसले आप, पीएमओ और बीजेपी अध्यक्ष ही लेते थे. बीजेपी अध्यक्ष मंत्रियों के काम में जिस तरह का हस्तक्षेप करते रहे हैं उससे जिस तरह के फैसले लेते हैं वह असंवैधानिक है. 2015 बिहार विधानसभा चुनाव के समय से ही बीजेपी ने इसे बर्बाद करने का वातावरण बनाया था और पार्टी के साथ जो वादे किए गए थे उसे पूरा नहीं किया गया. यहां तक कि शुरुआत में मेरी पार्टी को जितनी सीटें दी गई थीं उसे कम कर दी गईं. इसके अलावा बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के बाद होने वाले उपचुनाव में भी आरएलएसपी के साथ छल किया. 2015 के चुनाव में एनडीए की हार की बड़ी वजह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण पर दिया गया बयान रहा. नीतीश कुमार ने मेरा सबसे बड़ा अपमान नीच कह कर किया. तब बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी मौजूद थे. बीजेपी की प्रदेश इकाई ने नीतीश कुमार के इस बयान का समर्थन किया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी.

दुख के साथ कहना पड़ता है कि गरीबों का विकास सरकार की प्राथमिकता में नहीं था और सरकार किसी भी तरह राजनीतिक विरोधियों को चुप करने की कोशिश करती रही. जांच एजेंसियों को आपके मंत्रालय और बीजेपी अध्यक्ष रिमोट कंट्रोल से चलाते रहे ताकि दूसरी विचारधारा के नेताओं को परेशान किया जा सके. संवैधानिक संस्थानों को बर्बाद करने का कुचक्र चलाया गया और इन संस्थानों को सियासत का अड्डा बना डाला गया.आपकी कोशिश हर स्तर पर आरएसएस का एजेंडा को लागू करने की दिखती है, जबकि इसके उलट हमारी प्रतिबद्धता सामाजिक न्याय के एजेंडा को लागू करने की है. इन सब कारणों को ध्यान में रखते हुए मेरे लिए आपके मंत्रिपरिषद में बने रहना मुश्किल है. मेरा विवेक इस बात की इजाजत नहीं दे रहा है कि मैं अब उस सरकार का हिस्सा रहूं जो हर मोर्चे पर विफल रही है और देश के निर्माताओं के सपने और वादों को पूरा करने में नाकाम रही है. मेरे इस्तीफे को अविलंब मंजूर करें ताकि मैं राहत महसूस कर सकूं.

धन्यवाद सहित आपका ही (उपेंद्र कुशवाहा)

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