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जानिए क्यों खास है नॉर्थ ईस्ट को जोड़नेवाला धोला-सदिया पुल

देश का यह सबसे लंबा पुल 60 टन के युद्धक टैंक के भार को झेल सकता है. यहां से चीन बॉर्डर की हवाई दूरी करीब 100 किमी है

FP Staff Updated On: Mar 16, 2018 10:19 PM IST

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जानिए क्यों खास है नॉर्थ ईस्ट को जोड़नेवाला धोला-सदिया पुल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज 18 के कार्यक्रम राइजिंग इंडिया समिट में धोला-सदिया पुल का जिक्र किया. इस पुल का उद्घाटन पीएम ने साल 2017 में अपने सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद किया था. यह पुल देश का सबसे लंबा नदी पर बनाया गया रिवर ब्रिज (नदी पुल) है. यह पुल असम के पूर्वी हिस्से में अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे इलाके में बना है.

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना 9.15 किमी. लंबा यह पुल एशिया का दूसरा सबसे लंबा रिवर ब्रिज है. यह असम में तिनसुकिया जिले के धोला और सदिया को जोड़ता है. यह वही स्थान है, जहां मशहूर संगीतकार भुपेन हजारिका का जन्म हुआ था.

धोला सदिया देश का अब तक का सबसे लंबा पुल है. 950 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुए इस पुल का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था. इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में बनाया गया है.

इस पुल के शुरू होने से असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच यात्रा के समय में 4 घंटे तक की कटौती हुई. इस पुल के बन जाने से स्थानीय लोगों को नजदीकी रेलवे स्टेशन तिनसुखिया और डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट पहुंचने में आसानी हुई. इसके अलावा दो लाइन के इस पुल का डिजाइन इस प्रकार से किया गया है कि इस पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां चल सके.

चीन के साथ किसी भी स्थिति से निपटने में होगी आसानी

देश का यह सबसे लंबा पुल 60 टन के युद्धक टैंक के भार को झेल सकता है. ये पुल इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां से चीन बॉर्डर की हवाई दूरी करीब 100 किमी है. इस पुल के जरिए सेनाओं की चीन बॉर्डर (वैलोंग-किबिथू सेक्टर) तक आवाजाही आसान हो जाएगी. असम के उत्तरी और दक्षिणी इलाके के इस पुल से जुड़ने के बाद विकास की पहुंच असम के पूर्वोत्तर इलाके तक पहुंचेगी.

धोला-सदिया ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके ऊपर से करीब 60 टन का लड़ाकू टैंक बड़ी आसानी से लेकर जाया जा सकता है. यानि, इस पुल के जरिए सैन्य और आम लोगों की गाड़ियों की आसानी से आवाजाही हो सकेगी और अरुणाचल प्रदेश के अनिनी में बने सामरिक ठिकाने तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा. अनिनी चीन की सीमा से सिर्फ 100 किलीमोटर ही दूर है.

भले ही इस पुल के बन जाने से आम जनता बेहद खुश है लेकिन इससे जो लोग सबसे ज्यादा आहत हैं वो हैं फैरी सेवा से जुड़े हुए लोग. इन लोगों का कहना है कि उन्हें इस बात की खुशी है कि लोगों को एक बड़ा तोहफा मिला है, लेकिन इस बात का दुख भी है कि पुल की आवाजाही शुरू हो जाने से उनका धंधा बंद हो जाएगा और वो कहीं के नहीं रह जाएंगे.

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