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गोरखपुरः लोकसभा उपचुनाव जीतने की जुगत में जुट गए योगी

योगी खुद भी इस चुनाव को गंभीरता से ले रहे हैं. यही वजह है कि शनिवार को वह पूरे दिन गोरखपर में ही रहे, कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया

Updated On: Feb 25, 2018 04:08 PM IST

FP Staff

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गोरखपुरः लोकसभा उपचुनाव जीतने की जुगत में जुट गए योगी

यूपी में राज्यसभा चुनाव की तैयारी के इतर लोकसभा उपचुनाव की तैयारी भी चल रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ के लोकसभा क्षेत्र गोरखपुर में चुनाव होने हैं. बीजेपी को पूरी उम्मीद है कि योगी की लोकप्रियता के रथ पर सवार होकर वह इस सीट को फिर से हासिल कर सकती है.

योगी खुद भी इस चुनाव को गंभीरता से ले रहे हैं. यही वजह है कि शनिवार को वह पूरे दिन गोरखपर में ही रहे, कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जनसभाओं को संबोधित किया. इस दौरान वह पहले पिपराइच में रैली को संबोधित किया, इसके बाद गोरखपुर क्लब के कार्यक्रम में शामिल हुए, अगले दिन वह पिपाईगंज में एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेंगे, सहजनवा में लोगों से मिलेंगे, फिर शाम को गोरखपुर में ग्रामीण कामगारों से मिलेंगे.

गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी ने उपेद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है. उनका कहना है कि उनकी जिम्मेवारी होगी कि योगी आदित्यनाथ ने जो भरोसा यहां के लोगों में जगाया है, उसे वह आगे ले जाएं. योगी इस बार होली भी यहीं मनाएंगे.

गोरखपुर में जनता दरबार लगाकर लोकप्रिय हुए थे योगी 

जानकारी के मुताबिक योगी आदित्यनाथ मूल रूप से उत्तराखंड के पंचुर के रहनेवाले हैं. उनका नाम अजय सिंह बिष्ट था. ऋषिकेश में उनकी मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से हुई. यहां वह उनकी विचारधारा से काफी प्रभावित हुए. उत्तराखंड का लड़का पूर्वी उत्तर प्रदेश के शहर में आया और अवैद्यनाथ का शिष्य बन गया. तब से गोरखपुर ही उनका गृहनगर बन गया.

आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में अपने सामाजिक कार्य और सार्वजनिक बैठकों के माध्यम से इस क्षेत्र में लोकप्रियता प्राप्त की. एक समय था जब शहर भ्रष्टाचार और माफियाओं के कब्जे में हो गया था. वो कानून को अपने हाथ में लेकर घूमते थे, उस वक्त आदित्यनाथ का 'जनता दरबार' गोरखपुर में न्याय का स्थान बन गया.

गोरखपुर को लोगों की आवाज यूपी में तो योगी के तौर पर बुलंद हो सकती है, उन्हें केंद्र में भी उनकी आवाज उठानावाला चाहिए, जो योगी की तरह ही उनकी बात वहां उठा सके.

उपेंद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ब्रह्मण मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रही है. शुक्ला कुछ समय पहले ही बीजेपी से जुड़े हैं. यहां तक कि विधानसभा चुनाव लड़ने की कोशिश भी की, लेकिन उस समय टिकट नहीं मिल सका.

(न्यूज 18 के लिए काजी फराज अहमद की रिपोर्ट)

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