S M L

BJP के इस सहयोगी दल ने किया 2019 में शिवसेना की सीट से लड़ने का ऐलान

अठावले आरपीआई के अध्यक्ष हैं और अभी राज्यसभा के सांसद हैं. मुंबई साउथ सेंट्रल सीट इस समय शिवसेना के पास है और वहां से राहुल शेवाले सांसद हैं

Updated On: Jul 31, 2018 07:24 PM IST

FP Staff

0
BJP के इस सहयोगी दल ने किया 2019 में शिवसेना की सीट से लड़ने का ऐलान

महाराष्ट्र में एनडीए दलों के बीच जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. शिवसेना और बीजेपी के बीच के संबंध काफी समय से खराब चल रहे हैं. इस बीच एनडीए की एक अन्य सहयोगी पार्टी आरपीआई ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री और उसके प्रमुख रामदास अठावले 2019 का लोकसभा चुनाव मुंबई साउथ सेंट्रल लोकसभा सीट से लड़ेंगे. रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) ने मंगलवार को इसकी घोषणा की है. अठावले आरपीआई के अध्यक्ष हैं और अभी राज्यसभा के सांसद हैं. मुंबई साउथ सेंट्रल सीट इस समय शिवसेना के पास है और वहां से राहुल शेवाले सांसद हैं. आरपीआई एनडीए का हिस्सा है और सरकार में सहयोगी है. शिवसेना भी सरकार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है.

अठावले इससे पहले 1999 से लेकर 2009 तक मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट से लोकसभा के सांसद रह चुके हैं. 2009 के लोकसभा के चुनावों में अठावले को इस सीट से हार का मुंह देखना पड़ा था. अठावले की आरपीआई 2011 से ही बीजेपी के साथ एनडीए में शामिल है. अठावले 2014 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे.

क्या है राजनीतिक जोड़-तोड़ का हिसाब?

रामदास अठावले के शिवसेना की सीट पर लड़ने के ऐलान को बीजेपी और शिवसेना के संबंधों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. वैसे अठावले भी कई मौकों पर बीजेपी के खिलाफ बयान दे चुके हैं. हाल ही में उन्होंने एनजीटी में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड एके गोयल को नियुक्ति पर भी सवाल उठाया है. शिवसेना द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने के फैसले के बाद बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र में पार्टी कार्यकर्ताओं को सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा था. वैसे शिवसेना अभी भी राज्य और केंद्र सरकार में बनी हुई है लेकिन 2019 में दोनों पार्टियों के अलग-अलग लड़ने की संभावना हालिया बयानों के बाद तेज हो गई है.

वहीं अठावले के विवादित और विरोधी बयानों के बावजूद आरपीआई और बीजेपी के एक साथ लड़ने की संभावना सबसे अधिक है. ऐसे में कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि आरपीआई अध्यक्ष के चुनाव लड़ने के ऐलान बीजेपी की ओर से शिवसेना को दिया गया कड़ा संदेश है. कुछ का यह भी मानना है कि आरपीआई शिवसेना और बीजेपी के गतिरोध का फायदा उठाकर एनडीए में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहती है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi