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यूपी चुनाव 2017: सियासी माहौल में बुंदेली जनता के मुद्दे गायब

लगभग हर साल गर्मी के मौसम में सूखे जैसे हालात से जूझने वाले इलाके में मुद्दे गायब हैं

Ashish Saagar Dixit Updated On: Feb 23, 2017 10:49 AM IST

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यूपी चुनाव 2017: सियासी माहौल में बुंदेली जनता के मुद्दे गायब

यूपी बुंदेलखंड के सात जिलों में चौथे चरण में वोटिंग होनी है. 19 विधानसभा और 1.85 करोड़ से अधिक आबादी वाले बुंदेलखंड में जनता के अपने मुद्दे गायब है ये काबिले गौर बात है. ठीक चुनाव से पहले जो आवाम समाजवादी पार्टी की लचर कानून व्यवस्था,परिवारवाद, गायत्री प्रजापति के अवैध खनन साम्राज्य से त्रस्त थी, जो केंद्र सरकार की नोटबंदी पर तंज दे रही थी आज अपनी-अपनी जातीय गोलबंदी में लगी है.

दलबदलू प्रत्याशी हों या बालू माफिया, अपराधी मतदाता अपनी पसंद अनुसार गुणगान करने में जुटा है. इलाकाई किसान नेता भी सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी/खनन माफिया रहे विधायक प्रत्याशी को सहजता से स्वीकार कर चुके है बल्कि जोर-शोर से उनके प्रचार में भी लगे है. आइए समझते हैं कैसा है बुंदेलखंड का चुनावी हाल…

चित्रकूट

सदर – एसपी-कांग्रेस गठबंधन से वर्तमान विधायक वीर सिंह (डकैत शिवकुमार कुर्मी उर्फ ददुआ के बेटे),बीजेपी-चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय,बसपा- जगदीश गौतम,अन्य 9 भी खड़े है. पटेल जाति का यहां वर्चस्व है. इसलिए मुकाबला वीर सिंह के पक्ष में है पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं. गर्मी में म्रत्यु शैया पर मंदाकनी,चित्रकूट को पर्यटन पटल पर विकसित करने की मांग,पहाड़ का खनन और बेरोजगारी जैसे मुद्दे चलते रहते है पर काम नहीं होता दिखता है.

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सिटिंग विधायक और सांसद जीतने के बाद पांच साल शिलान्यास और समारोह फीता काटते देखे जा सकते हैं. बावजूद इसके बुंदेलखंड की जनता ने अपना चुनावी मद्दा नहीं तय किया है. बात करें बुंदेलखंड के ग्रामीण अंचल की तो मतदाता इस बार सर्जिकल स्ट्राइक की मुद्रा में मौन साधे है.

उससे कुछ देर बात करने और कुरेदने के बाद अंदर की बात सामने आती है. बानगी के लिए चित्रकूट जिले की मानिकपुर विधानसभा से सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी संपत पाल, बीजेपी-आरके पटेल,बसपा-चन्द्रभान पटेल, बहुजन मुक्ति पार्टी-दद्दू प्रसाद, रालोद से दिनेश प्रसाद मिश्रा ने नामांकन कराया है. 9 प्रत्याशी अन्य दलों से हैं.

इस सीट पर करीब 70 हजार ब्राह्मण वोट, 38 हजार आदिवासी कोल, तेरह हजार पाल और बाकि में अन्य सब है. यूपी की यह एकमात्र सीट है जिस पर बसपा के तीन बागी विधायक आमने-सामने है. (आरके पटेल,दद्दू प्रसाद,दिनेश मिश्रा).

जब स्थानीय लोगों से संवाद करने पर आश्चर्यजनक रूप से पिछले तीन सूखे झेलने वाले अति जल संकट प्रभावित इस पाठा क्षेत्र में अबकी सूखा, पलायन, किसान मुद्दा नहीं है. शहरी गरीब लोगों को आज तक कांशीराम आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? ये कोई मुद्दा नहीं है. आदिवासी मतदाता से लेकर आम किसान तक खुलकर बोलने को तैयार नहीं है. कुरेदने के बाद बोलते हैं नोटबंदी ने गरीब की मौत कर दी,समाजवादी सरकार ने कम से कम हमें सूखे में तीन माह राशन तो दिया है, युवाओं को को लैपटाप मिला है इसलिए वोट तो अखिलेश को देंगे.

दस्यु प्रभावित आदिवासी बाहुल्य गांव नागर, लक्ष्मणपुर, बंधवा, कल्याणपुर, हल्दीडांडी के हाल खराब हैं. यहां विकास के नाम पर सिर्फ पगडंडी वाली सड़क है और गांव तक बिजली पहुंची है. डकैत बबुली कोल का ये गढ़ है. आदिवासियों को अभी तक पीडीएस व्यवस्था में राशन कार्ड भी पूरी तरह नहीं मिले हैं.

उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से दूर रखा गया है. हां, जिस आदिवासी कोल का गांव के प्रधान से जुगाड़ बैठ गया उसको जरूर इंदिरा आवास मिला है पर उसको भी कोल भाइयों ने अपने मुताबिक पत्थर का गारा करते हुए खपरैल से बनाया है. जबकि अमूमन गांव में ये ईंट-सीमेंट के छत युक्त मिलते हैं.

लक्ष्मणपुर के रह वासी कौशल गुप्ता कहते है कि पाठा में पानी के साधन नहीं हैं. यहां गर्मी में 300 फीट में पानी नहीं मिलता है. गांव के 15 हैंडपंप में से तीन चल रहे हैं. कुएं में आंशिक पानी है. अगर पहाड़ की मरगदहा नदी न हो तो हम लोग प्यासे मर जायेंगे.

इस गांव के प्रधान मुन्नालाल कोल है. कौशल ने प्रधान पर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव का बोर (नलकूप) वो अपने मजरे में उखाड़ ले गए हैं. गांव का युवा बाहर है क्योकि गांव में काम नहीं है. जब उनसे सवाल पूछा कि वोट किसको देंगे तो उन्होंने कहा जहां, सबका जायेगा वही दिया जायेगा!

यही उत्तर रामआसरे कोल (विकलांग) ने दिया. उनके साथ खड़े बैंक मित्र रजनीश कुमार से जब पूछा गया कि आप वोट किसको करेंगे तो वे बोले जो विकास करेगा. विकास का मायने आपकी नजर में क्या है तो वे भी पार्टी के घोषणापत्र को विकास का दर्शन मानते हैं.

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नागर गांव की ललिता, सियादुलारी ने बताया कि हमारे परिवार में जितने यूनिट सदस्य हैं उन सबके नाम समाजवादी राशन कार्ड में कोटेदार ने नहीं चढ़वाए हैं. सिर्फ पति-पत्नी का नाम लिखा है, जिस पर मनमाने तरीके से राशन मिलता है. नागर के आदिवासी कांग्रेस समर्थक है, पर वोट गठबंधन है को करेंगे.

आलू खेती करने वाले किसान बलबीर बताते हैं कि खेती में बहुत घाटा है. आलू 5 किलो 35 रुपये का बिक रहा है ऐसे में हमारी लागत भी नहीं निकल पाती है. जब वोट का रुझान पूछा गया तो वे भी चुप हो गए बोले जिधर सबका जाई वहिने देब ! मानिकपुर सीट में कांग्रेस की फाइटर संपत दूसरी बार चुनाव मैदान में है उनके सामने सबको मात देने कड़ी टक्कर है.

बांदा

सदर- सपा-कांग्रेस गठबंधन से वर्तमान विधायक विवेक सिंह, बीजेपी से प्रकाश द्विवेदी, बीएसपी से मधुसूदन कुशवाहा, अन्य निर्दलीय प्रत्याशी समेत 18 मैदान में है. बबेरू सीट से एसपी-कांग्रेस से वर्तमान विधायक विशम्भर यादव, बीएसपी से किरण यादव, बीजेपी से चन्द्रपाल कुशवाहा, अन्य चार, तिंदवारी सीट एसपी-कांग्रेस वर्तमान विधायक दलजीत सिंह, बीजेपी ब्रजेश प्रजापति, बीएसपी से जगदीश प्रजापति,अन्य 8 लोग प्रत्याशी है. नरैनी (सुरक्षित सीट) – बीएसपी से वर्तमान विधायक गयाचरण दिनकर, एसपी-कांग्रेस से भरत लाल दिवाकर, बीजेपी राजकरन कबीर, अन्य 10.

banda

बांदा में स्थानीय जनता अपने मुद्दे भूलकर दो गुट में बंट गई है. यहां जातीय समीकरण पर चुनाव होगा. सदर सीट में ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय युद्ध के आसार है. एसपी के गठबंधन से कांग्रेस के विवेक सिंह को मुस्लिम वोट मिलने के आसार है लेकिन बीएसपी के मधुसूदन कुशवाहा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

कुशवाहा जाति का यहां अतर्रा में अच्छा वोट बैंक है जिससे मुकाबला कांटे का है. उधर तिंदवारी में इस बार दलजीत सिंह की राह आसान नहीं है. उनके सामने निषाद बाहुल्य सीट पर एसपी के राज्यसभा सांसद विशम्भर निषाद ने आंतरिक विद्रोह करते हुए पहले तो खुला विरोध किया. वे अपनी पत्नी शकुंतला निषाद का टिकट कटने से नाराज थे.

बाद में सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांद्वी ने जब सीएम से शिकायत की तो निषाद जाति के डाक्टर अच्छे लाल निषाद को मैदान में उतार दिया है.सूत्र ये भी कहते है कि निषादों ने अबकी बीएसपी को वोट करने का मन बना लिया है.

हमीरपुर

सदर- बीजेपी के अशोक चंदेल, एसपी से डाक्टर मनोज प्रजापति, बीएसपी से संजय दीक्षित प्रत्याशी हैं. राठ सीट से बीजेपी की मनीषा अनुरागी, कांग्रेस से गयादीन अनुरागी (वर्तमान विधायक), बीएसपी से अनिल अहिरवार मैदान में है. राठ में राजपूत वोट अधिक है. यहां से विधायक गयादीन अनुरागी की सीट इस बार मुसीबत में है. हमीरपुर में बीजेपी के आसार ठीक है.

महोबा

विधानसभा- सदर सीट में बीएसपी से अरिमर्दन सिंह नाना (पहाड़ माफिया), एसपी गठबंधन से सिद्धगोपाल साहू ( पहाड़ माफिया ), बीजेपी से बीएसपी के बागी राकेश गोस्वामी (अंटा विधायक), आरएलडी से उत्तम सिंह, अन्य 6. राजपूत जाति से संपन्न चरखारी सीट से बीएसपी के जीतेंद्र मिश्रा, एसपी गठबंधन- उर्मिला राजपूत, बीजेपी से गंगा चरण राजपूत के बेटे ब्रजभूषण राजपूत, आरएलडी से दिलीप यादव अन्य 7 मैदान में है.

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यहां सदर में एसपी-बीएसपी में सीधी टक्कर है. वहीं चरखारी में बीजेपी मजबूत दिख रही है. चुनाव के मुद्दों की बात करें तो किसानों के पान की खेती, पहाड़ का दिनरात खनन, जर्जर सड़कें, परिवहन, बदहाल चिकित्सा, रोजगार, किसान आत्महत्या, अर्जुन नदी सहायक बांध परियोजना, केन-बेतवा लिंक, परती खेती, महोबा का चन्देल पर्यटन, चरखारी का कश्मीर और 184 दिन से अनशन में बैठे सत्याग्रही पत्रकार तारा पाटकर के एम्स की मांग भी चुनाव का मुद्दा नहीं है.

बीते दिनों पीएम मोदी परिवर्तन यात्रा का आगाज महोबा से किए पर महोबा में किसान को बिना कुछ दिए,एम्स पर चुप्पी साध कर वापस चले गए. तारा पाटकर कहते हैं ये मेरा अनशन तब तक चलेगा जब तक महोबा को माकूल इलाज के साधन नहीं मिल जाते. जो पार्टी का एजेंडा है वो ही वोटर की जुबान में बोल रहा है. बुंदेलखंड के सर्वाधिक पानी संकट वाले जिले से पानी की बात पर नेता मौन है.

झांसी

विधानसभा- सदर सीट से बीजेपी-रवि शर्मा, कांग्रेस-राहुल राय, आरएलडी-उमेश यादव, लोकदल-रामनाथ, शिवसेना-शंकर लाल कुशवाहा, भाकपा-लक्ष्मण सिंह प्रत्याशी हैं. बबीना सीट से एसपी-यशपाल सिंह यादव, बीजेपी-राजीव सिंह परीछा, बीएसपी-कृष्णपाल राजपूत, शिवसेना-किरण देवी, आरएलडी-ओमवीर, जनाधिकार मंच – कालीचरण प्रत्याशी है. मऊरानीपुर सीट से बीएसपी-प्रागीलाल, बीजेपी-बिहारी लाल आर्य, एसपी से रश्मि आर्य (वर्तमान विधायक, शिवसेना- अनिल,अन्य 7. गरोठा सीट से एसपी- दीपनारायण सिंह यादव (वर्तमान विधायक), बीजेपी-जवाहर लाल राजपूत, बीएसपी-डॉक्टर अरुण कुमार मिश्रा, रालोद-गुलाब सिंह, अन्य 8 मैदान में है.

वैसे तो मऊरानीपुर सीट से विधायक रही रश्मि आर्य और उनके पति पप्पू सेठ के चर्चे पांच साल अकूत दौलत बनाने, सुखनई नदी में अवैध खनन करवाने की वजह से रहे हैं. शहर में निर्माणाधीन ओवरब्रिज पुल जो विधायक की उपलब्धि कही जा सकती है के सिवा इस सीट में उनका खास विकास नहीं दिखता है. जबकि कभी महशूर रहे रानीपुर टेरीकाट की पुनर्स्थापना और इलाके में ताबड-तोड़ हुई किसान आत्महत्या को रोकने में बहुत कुछ किया जा सकता था.

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जिले की गरोठा सीट से समाजवादी पार्टी के बुंदेली रईस बाहुबली, बालू ठेकेदार विधायक दीपनारायण के सामने किसान नेता और बीजेपी उम्मीदवार जवाहर लाल राजपूत ने दंगल को और अधिक दिलचस्प बना दिया है. उन्होंने हाल ही में अपने नामांकन में बैलगाड़ी का प्रयोग किया जिसे देखकर चित्रकूट में भी यही किया गया. झांसी सदर में कांग्रेस के राहुल राय युवा चेहरा है उनका सीधा मुकाबला बीजेपी से है.

कांग्रेस के स्टार प्रचारक और पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य जमकर अपने प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं. झांसी में बुंदेलखंड राज्य,एम्स दिलाने और रोजगार के लिए आर्थिक हब, आईटी क्षेत्र विकसित करने, बुंदेलखंड पैकेज की जांच आदि बाते सियासी जमात के मुंह पर नहीं है.

ललितपुर

विधानसभा- सदर से बीजेपी के रामरतन कुशवाहा,बीएसपी- संतोष कुशवाहा, सपा-ज्योति सिंह लोधी, सीपीआई-पर्वत लाल,अन्य 7 प्रत्याशी हैं. महरौनी सीट से एसपी- रमेश खटीक, बीजेपी-मनोहर लाल पंथ, बीएसपी- फेरनलाल अहिरवार, कांग्रेस-ब्रजलाल खाबरी, अपना दल-रामलाल, सीपीआई-आराधना,अन्य 7 चुनाव में है. इस जिले को एशिया के सबसे अधिक बांधों वाला, वन्य सम्पदा से सम्रद्ध एमपी की सीमा से लगा हुआ माना जाता है.

गर्मी में भयावह जलसंकट से लड़ने वाले जिले में इसी वर्ष बाढ़ भी आ गई थी. वर्ष 2015 के फरवरी माह में तीन माह के अन्दर यहाँ 67 किसान मौत हुई.

जालौन

विधानसभा- सदर सीट से बीजेपी- गौरीशंकर वर्मा, बीएसपी-विजय चौधरी, समाजवादी पार्टी-महेंद्र कठेरिया, अन्य 4. कालपी से बीजेपी- नरेंद्र सिंह जादौन, कांग्रेस-उमाकांति, बीएसपी-छोटे सिंह चौहान, आरएलडी-राहुल शर्मा, माधोगढ़ सीट से बीजेपी-मूलचंद्र निरंजन, बीएसपी-गिरीश अवस्थी, कांग्रेस- विनोद चतुर्वेदी, अन्य 10 प्रत्याशी हैं.

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गौरतलब है यमुना की पट्टी और पचनद के इस क्षेत्र में माधोगढ़ के गुड़ की मिठास पर अब सियासत बंद हो चुकी है. एक समय निर्भय गुर्जर,फूलन देवी की बीहड़ सल्तनत से आबाद रहे जालौन में कभी खेती किसानी से संपन्न यहां का किसान अब पिपरमेंट की खेती करने, अनियमित वर्षा से पीड़ित है.

आटा स्टेशन के मसगांव निवासी संतशरण शुक्ल, अरुण, परवीन की मानें तो औरैया जिले से कालपी सीट लगती है. ठेठ बुंदेली भाषा से मजबूत जिले में बीजेपी-एसपी-बसपा त्रिकोणीय चुनावी जंग की सुबुगाहट आ रही है अंतिम फैसला जनता ही करेगी. बुन्देलखण्ड के अन्य जिलों की बनिस्बत जालौन में बारिश इस साल कम हुई है पर पानी के साधन की बात चुनाव बीसात में नहीं उठ रही है. देश बदल रहा है,नोटबंदी से काला धन आया है और सरकार बनी तो भ्रष्टाचार,गुंडाराज ख़तम होगा ये नशा वोटर के दिमाग में घुन की तरह लग गया है.

 

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