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एयर इंडिया-गायकवाड़ विवाद: शिव सेना को माफी मांगना सीखना होगा

शिवसेना अपने सांसद के व्यवहार को जायज ठहरा रही है और उन्हें पीड़ित बताने में लगी है

Sanjay Singh Updated On: Apr 07, 2017 06:20 PM IST

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एयर इंडिया-गायकवाड़ विवाद: शिव सेना को माफी मांगना सीखना होगा

नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू प्रशंसा के हकदार हैं क्योंकि अपने पद की मर्यादा को बरकरार रखने के लिए उन्होंने जिस साहस और यकीन का परिचय दिया है, वो प्रशंसनीय है.

वो सम्मान के हकदार इसलिए भी हैं क्योंकि उन्होंने संसद का मान रखा. कानून के पक्ष में खड़े दिखे. यहां तक कि एयर इंडिया बनाम लोकसभा सांसद गायकवाड़ मामले पर, जो अब शिवसेना बनाम एयरलाइंस कंपनियों के बीच का मुद्दा बनता दिख रहा है. उस पर उन्होंने देश के ज्यादातर लोगों की प्रतिक्रिया का साथ दिया.

उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने दिखाया साहस 

अशोक गजपति राजू ने इस साहस का परिचय तब दिया है, जब समूची शिव सेना एयर इंडिया समेत दूसरे एयरलाइंस के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाए हुए है.

ऐसी विस्फोटक स्थिति में भी शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने जो वरिष्ठ एयरलाइन स्टाफ के साथ किया उसे स्पष्ट तौर पर गुंडागर्दी कहना और उसकी निंदा करना सांसद का विशिष्ट हक माना जा सकता है.

उन्होंने इस बात की चिंता नहीं कि वो एक ऐसी सियासी पार्टी के खिलाफ कानून का साथ दे रहे हैं, जो एनडीए गठबंधन का हिस्सा है.

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए वो एक कानून तोड़ने वाले सांसद को ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने का मौका नहीं दे सकते. बावजूद इस हकीकत के कि संबंधित सांसद सत्ताधारी गठबंधन से ताल्लुक रखते हैं.

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लोकसभा में नागरिक उड्ययन मंत्री राजू ने क्या कहा पहले वो देखिए. 'मैंने नागरिक उड्डयन की जरूरतों के बारे में बताया है. सबसे पहले ये कानून की प्रक्रिया है. कानून अपना रास्ता तय करेगी. सांसद जो भी करना चाहते हैं वो अपनी तरफ से करें.'

उन्होंने आगे कहा, 'जब मैं नागरिक उड्डयन की जरूरतों के बारे में सदन के सामने अपनी बात रख रहा हूं तो मैं साफ कर चुका हूं ये बात ‘सांसद’ की नहीं बल्कि एक ‘यात्री’ की है. मेरा बयान सदन की रिकॉर्ड में है. लेकिन एयरक्राफ्ट एक मशीन है जिसमें लोग उड़ते हैं. लिहाजा इसकी सुरक्षा महत्वपूर्ण है जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता.'

TMC

शिवसेना को मिला तृणमूल का साथ

लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्री का ये जायज बयान शिवसेना समेत कुछ दूसरी सियासी पार्टियों के लिए जैसे कड़वी दवा से कम नहीं था. नतीजतन इस बयान के बाद संसद में हंगामा होने लगा.

लेकिन संसद में हंगामा कर रहे शिवसेना सांसदों को आश्चर्यजनक रूप से जिन सांसदों का साथ मिला वो विरोधी खेमे के तृणमूल कांग्रेस के सांसद थे.

तृणमूल कांग्रेस पिछले कुछ समय से खास तौर पर जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी जैसे कदम उठाए, तब से सरकार के विरोध में खड़े रहने का कोई भी मौका हाथ से गंवाना नहीं चाहती है. भले उस मुद्दे में विरोध करने लायक कोई गुंजाइश बचती हो या नहीं.

जैसा कि श्रीरामपुर संसदीय क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी सदन में खड़े होकर चिल्ला रहे थे कि 'ये कोई तरीका नहीं है. नागरिक उड्डयन मंत्री ने जवाब नहीं दिया है. उन्होंने ये नहीं बताया है कि किस कानून के तहत उन पर पाबंदी लगाई गई है. ऐसा किस कानून के तहत किया जा सकता है.'

तृणमूल सांसद ने आगे कहा, 'ये सही नहीं है. क्या हुआ और क्या नहीं हुआ मैं इसकी बात नहीं कर रहा हूं. लेकिन किस कानून और कानून की कौन सी धारा के तहत किसी मुसाफिर पर पाबंदी लगाई जा सकती है? मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि किस कानून के तहत ऐसा किया जा सकता है.'

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(फोटो: फेसबुक से साभार)

शिव सेना और बीजेपी आमने-सामने 

इस विवादित मामले पर संसद में मोदी सरकार के दो मंत्री, भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते और नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू, भी एक दूसरे से तर्क करते दिखे, जो बेहद असामान्य था.

सदन में अनंत गीते ने गायकवाड़ और पार्टी के समर्थन में बयान दिया कि 'मैं भारत सरकार का मंत्री हूं और इस सदन का सांसद भी.'

उनके तर्क का लब्बोलुआब यही था कि सम्मानीय सांसद रवींद्र गायकवाड़ के साथ गंभीर अन्याय हुआ है. उनके खिलाफ पुलिस एफआईआर दर्ज करवाया गया. लेकिन किसी भी जांच में उन्हें बगैर दोषी पाए उन्हें घरेलू उड़ानों में सफर करने से रोक दिया गया.

इस बात से अनंत गीते का कोई लेना-देना नहीं है कि कैसे कुछ दिनों तक गायकवाड़ की निंदा की गई. और उन्होंने कैसे 'एयर इंडिया के कर्मचारी को 25 बार अपने चप्पलों से पीटा. बावजूद इसके उन्होंने शर्मनाक बयान दिया कि 'कान के नीचे बजा डला.'

इसके बावजूद भी अनंत गीते गायकवाड़ के समर्थन में उतरे और अपनी ही सरकार पर अन्याय करने का गंभीर आरोप मढ़ दिया.

उन्होंने कहा, 'मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जो जनता की सरकार है, हमारी सरकार है, वो कैसे किसी सांसद को विमान में यात्रा करने से रोक सकती है. ये बेहद दुखद और शर्मनाक कार्रवाई है. मुझे शर्म आती है और इसका मुझे अफसोस है...आखिर ये किस तरह का न्याय है?'

Shiv Sena activists

शिवसेना का अमर्यादित व्यवहार 

सबसे ज्यादा हैरानी तो इस बात को लेकर है कि शिव सेना ने अपने ऐसे सांसद का समर्थन किया है जिनका व्यवहार बेहद अमर्यादित है. इतना ही नहीं शिवसेना अपने सांसद के व्यवहार को जायज ठहरा रही है और उन्हें पीड़ित बताने में लगी है.

संजय राऊत जिन्होंने सभी शिवसेना सांसदों के साथ संसद भवन परिसर में प्रेस कांफ्रेंस किया.

उन्होंने कहा, 'हमलोगों से पहले एयर इंडिया के चेयरमैन क्या हैं? वे महज एक सरकारी नौकर हैं. और उन्हें अपनी हदों में रहना चाहिए. क्या कोई मुसाफिर आतंकवादी है. कई सांसद हैं जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है...अगर यह मामला 10 अप्रैल से पहले नहीं निपटाया जाता है तो हमलोग एनडीए की बैठक में शामिल नहीं होंगे.'

इतना ही नहीं उन्होंने एयर इंडिया के सीएमडी के 'औकात' को भी ललकारा.

शिवसेना ने हार के बावजूद नहीं सीखा है सबक 

जो बात शिवसेना नेताओं को समझ में नहीं आ रही है वो ये कि गुंडागर्दी और दबाव की राजनीति मौजूदा समय में नहीं चल सकती है. यहां तक कि पार्टी ने महाराष्ट्र में अपनी सिकुड़ती सियासी जमीन से भी सबक नहीं लिया है.

पहले विधानसभा फिर स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी से लोगों का मोहभंग हुआ है. राऊत का इस ओर इशारा करना कि सरकार में शीर्ष पर बैठे किसी शख्स ने एयरलाइंस पर ऐसे निर्णय लेने का दबाव बनाया है. और यही वजह है कि सत्ताधारी दलों के नेताओं के बीच तमाम आग्रह करने के बावजूद हमारी मांग को अनसुनी कर दी जा रही है, कहीं से जायज नहीं लगती.

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हो सकता है कि शिवसेना आगामी राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर इस मुद्दे पर सौदेबाजी भी करने पर उतारू हो. क्योंकि पिछले दो राष्ट्रपति चुनावों में शिवसेना ने कांग्रेस का साथ दिया है. और बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया.

ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या गायकवाड़ और एयर इंडिया मामले में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी किसी सौदेबाजी का शिकार होती है?

Ravindra Gaikwad

तस्वीर: पीटीआई

गायकवाड़ को कोई पछतावा नहीं 

लोकसभा में शून्य काल के दौरान दिए गए गायकवाड़ के वक्तव्य में किसी तरह का पछतावा नहीं नजर आ रहा था. उनका दावा था कि वो एक शिक्षक हैं लिहाजा वो गलत नहीं कर सकते हैं.

उन्होंने खुद की तुलना महात्मा गांधी से की जिन्हें दक्षिण अफ्रीका में गोरे अंग्रेज ने ट्रेन में सफर करने से रोक दिया था. उन्होंने यहां तक कहा कि नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्हें अमेरिका ने वीजा देने पर रोक लगा दी थी.

गायकवाड़ ने कहा कि वो छत्रपति शिवाजी के आदर्शों को मानते हैं जो उन्हें उनके सम्मानीय नेता बाल ठाकरे और मौजूदा शिवसेना मुखिया उद्धव ठाकरे ने सिखाया है.

लेकिन वो बेहद आसानी से इस बात को भूल गए कि टीवी कैमरों पर दिए बयान में उन्होंने कहा था कि वो बाल ठाकरे की उस बात को मानते हैं जिसके तहत अगर कोई बार-बार समझाने पर भी किसी तर्क को नहीं मानता है, तो उसके कान के नीचे एक तमाचा जड़ देना चाहिए.

संसद में दिए अपने बॉयोडाटा में गायकवाड़ इस बात का जिक्र करने में पीछे नहीं हैं कि उन्होंने एमकॉम और बीएड की डिग्री हासिल की है. और वो खेती और शिक्षण जैसे पेशे से जुड़े हैं.

लेकिन ये मुफीद वक्त है जब गायकवाड़ को खुद से ये सवाल पूछना चाहिए कि क्या एयरलाइंस स्टाफ को चप्पल से पीटना और उन्हें विमान से धक्का मार कर बाहर फेंकने की कोशिश को क्या पेशेवर बर्ताव कहा जा सकता है?

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