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प्रमोशन में आरक्षण, न्यायिक सेवा का गठन हो: रामविलास

रामविलास पासवान ने इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस यानी भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की मांग की है.

Updated On: Dec 16, 2016 03:40 PM IST

Amitesh Amitesh

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प्रमोशन में आरक्षण, न्यायिक सेवा का गठन हो: रामविलास

केन्द्रीय मंत्री और लोकजनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस यानी भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की मांग की है.

पासवान ने कहा है कि इसके लिए जल्द ही प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन दिया जाएगा. इसके अलावा प्रमोशन में रिजर्वेशन के मुद्दे को भी उन्होंने फिर से उठाया है.

उनकी इस कवायद को न्यायिक सेवा में पिछले दरवाजे से आरक्षण लागू करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इसके लिए उन्होंने बकायदा एससी एसटी सांसदों के साथ कई दौर की बैठकें भी की हैं.

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में रामविलास पासवान ने कहा कि उन्हें पीएम मोदी पर पूरा भरोसा है कि वो सालों पुरानी इस मांग को जरूर लागू करेंगे.

पढ़िए उनसे हुई हमारे संवाददाता अमितेश से खास बातचीत के जरूरी अंश:

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - आप किन-किन मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने वाले हैं और अभी इसकी जरूरत क्या थी?

रामविलास पासवान - अलग-अलग दलों के एससी एसटी सांसदों की बैठक में दो मुद्दों पर प्रस्ताव पास हुआ है. एक इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस यानी भारतीय न्यायिक सेवा का गठन किया जाए जिसके बारे में संविधान की धारा 312 में भी लिखा गया है और दूसरा ये कि प्रमोशन में भी आरक्षण लागू होना चाहिए.

जब मंडल कमीशन लागू हुआ था तो उस वक्त कहा गया था कि प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं होगा. फिर 1995 में हमारी कोशिश से संविधान संशोधन हुआ. फिर कहा गया कि सीनियोरिटी में  रिजर्वेशन नहीं होगा तो अटल जी के कार्यकाल में दोबारा संशोधन हुआ. फिर कहा गया कि 50 फीसदी से ज्यादा रिजर्वेशन नहीं होगा तो एक बार फिर से संविधान संशोधन हुआ.

उसके बाद एम.नागराजन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ है. इसलिए प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं होना चाहिए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रमोशन में रिजर्वेशन होना चाहिए पर इसके लिए तीन शर्तें जरुरी हैं. पहला बैकवर्डनेश का, दूसरा रिप्रेजेन्टेशन का और तीसरा एफिशिएन्सी चाहिए. इसलिए यह मुद्दा लटका हुआ है.

न्यायिक आयोग के गठन की मांग और प्रमोशन में रिजर्वेशन मुद्दों को लेकर एक डेलिगेशन प्रधानमंत्री से मिलेगा. हम आग्रह करेंगे कि पहली बार एक मजबूत प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार दिल्ली में बनी है इसलिए गरीबों के हक के लिए इसे करने की जरूरत है.

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - सरकार और न्यायपालिका में पहले से ही जजों की बहाली को लेकर एक तनातनी चल रही है. ऐसे में अगर आप इंडियन ज्यूडीशियल सर्विस की बात करेंगे तो क्या यह टकराव नहीं दिखेगा. कई दूसरे लोग भी इसका विरोध कर सकते हैं.

रामविलास पासवान - कोई टकराव नहीं होगा, संविधान में यह पहले से है. भारतीय न्यायिक सेवा होनी चाहिए. प्रधानमंत्री ने इच्छा भी व्यक्त की है. एससी एसटी देश की कुल आबादी का 25 फीसदी है, लेकिन उनका एक भी जज सुप्रीम कोर्ट में नहीं है. इसे कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है.

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एक बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - इसे लागू कराने के लिए सरकार किस तरह से आगे बढ़ेगी.

रामविलास पासवान - इसको सरकार विधि विभाग के जरिए देखेगी, ताकि ये पता चल सके कि क्या ये बदलाव सिर्फ एक्जीक्यूटिव आर्डर से ही मुमकिन है या इसके लिए फिर से संविधान में संशोधन करने की जरूरत होगी. या फिर संसद से केवल बिल पास कराकर ही इसे लागू किया जा सकता है. मंडल आयोग के समय तो संविधान में संशोधन नहीं हुआ था, केवल एक्जीक्यूटिव आर्डर से ही लागू हो गया था.

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - न्यायपालिका में आरक्षण के मुद्दे पर हो सकता है कि सहमति न बन पाए शायद इसलिए आप लोग इंडियन ज्यूडिशियल सर्विस के माध्यम से आरक्षण लागू कराना चाहते हैं.

रामविलास पासवान - जुडिशियल सर्विस में आरक्षण की बात हम कहां कर रहे हैं. हम तो कहते हैं कि भारतीय न्यायिक सेवा बनाओ.

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - प्रमोशन में आरक्षण का कई पार्टियां विरोध करती रही हैं ऐसे में इसपर कैसे आगे बढ़ पाएगें.

रामविलास पासवान - भले ही कोई पार्टी इस बात का विरोध करती रहे लेकिन सभी पार्टी के एससी एसटी के सांसद इसका समर्थन कर रहे हैं.

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा का चुनाव है. माना जा रहा है कि चुनाव के पहले इन मुद्दों को जानबूझकर गरमाया जा रहा है ताकि इसका चुनावी फायदा लिया जा सके.

रामविलास पासवान- हम पहले भी इस मुद्दे को उठाते रहे हैं. हर सरकार में हमने इस मुद्दे को उठाया है, इसलिए इसको चुनाव से जोड़ने का कोई मतलब नहीं है.

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - आप पहले भी इस मुद्दे को उठाते रहे हैं. कई सरकारें आई और चली गईं ऐसे में कैसे उम्मीद की जाए कि इस बार ये पहल कारगर होगी.

रामविलास पासवान- यह सरकार दूसरी सरकारों से अलग है और प्रधानमंत्री भी अलग तरह के व्यक्ति हैं. उनके दिमाग में जो भी आता है वो करते हैं. जोखिम उठाते हैं, इसलिए उनसे ज्यादा उम्मीदें हैं.

फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता - सरकारी सेक्टर की आप बात कर रहे हैं फिर चाहे वो ज्यूडिशियरी की बात हो या प्रमोशन में आरक्षण की. इस सेक्टर में नौकरी के अवसर तो पहले से कम ही हो रहे हैं. ऐसे में क्या प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की मांग आप करेंगे.

रामविलास पासवान - प्राइवेट क्षेत्र में भी आरक्षण होना चाहिए लेकिन जब हमलोग एक ही बार ऐसा करेंगे तो जैक ऑफ ऑल एंड मास्टर ऑफ नन होगा. इसलिए अभी केवल यही फैसला हुआ है. एससी और एसटी सांसदों के साथ जब अगली बैठक होगी तो इन मुद्दों को भी उठाया जाएगा.

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