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बेटी-दामाद की बगावत रामविलास पासवान के लिए चुनावी मुसीबत न बन जाए

अब जब रामविलास के दामाद आरजेडी के पाले में जाकर उनको ललकार रहे हैं, तो सवाल उठता है कि एक परिवार के झगड़े को आरजेडी हवा तो नहीं दे रही. या फिर अनिल साधू आरजेडी के राजनीतिक मंच इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं

Updated On: Sep 16, 2018 11:44 AM IST

Anand Dutta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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बेटी-दामाद की बगावत रामविलास पासवान के लिए चुनावी मुसीबत न बन जाए
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केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान के परिवार का समीकरण गड़बड़ाता दिख रहा है. बड़ी बेटी आशा ने एक बार फिर से बगावत कर दी है. यहां तक कह दिया कि अगर आरजेडी से टिकट मिलता है तो वह हाजीपुर से लोकसभा चुनाव में अपने पिता के खिलाफ भी लड़ने को तैयार हैं. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगया कि पिता रामविलास केवल अपने बेटे चिराग को आगे बढ़ाने में लगे रहते हैं. उन्हें कभी उचित मान-सम्मान नहीं मिला. राजधानी पटना में रह रही आशा पासवान रामविलास पासवान के पहली पत्नी की बड़ी बेटी हैं.

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ऐसे में फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने आशा देवी से बात करने की कोशिश की. एलजेपी की टिकट पर दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके उनके पति अनिल कुमार साधू ने फोन उठाया और कहा कि ‘मैं जो कहूंगा उसे आशा देवी का शब्द समझा जाए और आशा देवी जो कहेंगी उसे मेरी बात समझी जाए.’

फ़र्स्टपोस्ट- क्यों नाराज हैं आशा देवी अपने पिता से?

अनिल साधू- शुरू से ही भेदभाव कर रहे हैं, नाराज तो होंगे ही.

फ़र्स्टपोस्ट- क्या उन्होंने पिता होने का फर्ज नहीं निभाया?

अनिल साधू- फर्ज निभाया होता तो एक बेटा-बेटी को दिल्ली के महंगे स्कूल में पढ़ाया, अपने पास रखा, दूसरी तरफ पहली दो बेटियों को तो सरकारी स्कूल तक नहीं भेजा गया. पहले मां (रामविलास पासवान की पहली पत्नी) को छोड़े, फिर दोनों बेटियों को. पिता होते तो बचपन से फर्ज निभाते. बेटी को जो सम्मान मिलना चाहिए, वह नहीं मिला.

फ़र्स्टपोस्ट- आपकी सास आपके साथ रहती हैं, वह क्या सोचती हैं इसके बारे में?

अनिल साधू- अपने पति के बारे में क्या सोचती हैं यह तो लोगों को बताने वाली बात नहीं है. लेकिन अभी जो चल रहा है, उसके बारे में उनका कहना है कि कि अगर आरजेडी से टिकट मिलता है तो यह अच्छी बात होगी.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ अनिल साधू

मंच पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और एचएएम के अध्यक्ष जीतन राम मांझी के साथ अनिल साधू

फ़र्स्टपोस्ट- तलाक तो हो चुका है न दोनों का, वह तो कागजात सौंप चुके हैं?

अनिल साधू- यह तो जांच का विषय है. मैं इसकी मांग करता हूं. कब तलाक दिया, क्यों दिया. हिंदू धर्म में दो विवाह कानून वैध है क्या. रामविलास जी को बिहार की जनता को बताना होगा कि तलाक किस आधार दिया गया. किस परिस्थिति में दिया. वो जो विधवा की जिंदगी जी रही हैं, उन्हें भी मान-सम्मान पाने का हक है.

फ़र्स्टपोस्ट- चिराग और रीना पासवान से आपके कैसे संबंध रहे हैं?

अनिल साधू- संबंध एक तरफ से नहीं निभता है, प्यार दोनों तरफ से चलता है. उनके द्वारा अगर प्यार मिला होता तो ये नौबत नहीं आती.

फ़र्स्टपोस्ट- संबंध अच्छे नहीं होते तो आपको दो बार टिकट नहीं मिलता न?

अनिल साधू- टिकट कोई खैरात में नहीं मिला. मुझे कार्यकर्ता की हैसियत से मिला. मेरे पिता पुनीत राय भी एमएलए रह चुके हैं. मैं पहले से राजनीति में हूं. एलजेपी का झंडा कई सालों से ढो रहा हूं. शादी मेरी 88 में हुई, उससे पहले से मैं राजनीति में हूं.

फ़र्स्टपोस्ट- ऐसा करके आशा देवी अपने पिता को मुश्किल में डाल रही हैं या आरजेडी पर दवाब बना रही हैं?

अनिल साधू- देखिए आरजेडी से लड़ने वाली बात से मैं और मेरी पत्नी पीछे नहीं हटेंगे. अब जो कह दिया सो कह दिया. लेकिन अगर आरजेडी मुझे इस लायक समझेगी तो.

फ़र्स्टपोस्ट- रीना पासवान से आशा देवी की आखिरी मुलाकात कब हुई थी?

अनिल साधू- छह साल पहले एक पारिवारिक समारोह में हुई थी. उसके बाद से आज तक नहीं हुई है.

अनिल साधू (फोटो: फेसबुक)

अनिल साधू (फोटो: फेसबुक)

पहली पत्नी की पहली बेटी हैं आशा

रामविलास पासवान की पहली शादी साल 1960 में राजकुमारी देवी (68 साल) से हुई थी. राजनीति में पहली सफलता भी उन्हें इसके बाद ही लगी जब साल 1977 में वह पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए. उनका राजनीतिक कद हर दिन बढ़ता गया. इस बीच उन्हें एक एयर होस्टेस रीना से प्यार हो गया. दोनों ने साल 1983 में शादी कर ली. इस बात की जानकारी राजनीतिक हलकों सहित देशभर में थी कि उनकी दो पत्नियां हैं. वह पहली पत्नी राजकुमारी देवी के साथ नहीं, बल्कि रीना के साथ रहते हैं. शादी के कई सालों बाद 2014 लोकसभा चुनाव के वक्त उन्होंने अधिकारिक तौर पर देश को बताया कि उन्होंने साल 1981 में ही पहली पत्नी से तलाक ले लिया था.

आठ बार संसद सदस्य को पहली पत्नी से दो बेटियां हैं उषा और आशा. उषा के पति धनंजय कुमार कस्टम विभाग के अधिकारी रह चुके हैं. बाद में अपने पद से इस्तीफा देकर वह एलजेपी से चुनाव लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद वह दोबारा राजनीति में नहीं आए. वहीं दूसरी बेटी आशा के पति अनिल कुमार साधू भी एलजेपी के टिकट से चुनाव लड़े. पहली बार राजगीर (सुरक्षित) से हार के बाद दोबारा इन्हें टिकट नहीं दिया जा रहा था. काफी हंगामा के बाद साल 2015 विधानसभा चुनाव में बोचहां (सुरक्षित) से टिकट दिया गया. यहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा. बीते आठ मार्च को पटना में उन्होंने आरजेडी का दामन थाम लिया.

पत्नी आशा देवी और बेटी के साथ अनिल साधू (फोटो: फेसबुक)

पत्नी आशा देवी और बेटी के साथ अनिल साधू (फोटो: फेसबुक)

क्या आरजेडी रामविलास के पारिवरिक झगड़े को हवा देगी

अब जब रामविलास के दामाद आरजेडी के पाले में जाकर उनको ललकार रहे हैं, तो सवाल उठता है कि एक परिवार के झगड़े को आरजेडी हवा तो नहीं दे रही. या फिर अनिल साधू आरजेडी के राजनीतिक मंच इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हैं. इस मसले पर आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता मनोज झा ने साफ कहा कि ‘उनके हालिया बयान में आरजेडी कहीं नहीं है. चुनाव का समय आने को है, ऐसे कई बयान कई नेताओं के आएंगे कि वह अमुक जगह से लड़ना चाहते हैं. इसी क्रम में शायद रामविलास पासवान की बेटी ने बयान दिया होगा. उनके पति जरूर आरजेडी से जुड़े हुए हैं, लेकिन लोजपा या रामविलास पासवान के परिवार के ऊपर किए गए किसी भी बयानबाजी को आरजेडी का बयान नहीं समझा जाना चाहिए.’

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अब देखनेवाली बात ये होगी कि खुद रामविलास पासवान पूरे मसले पर कब अपना मुंह खोलते हैं. या फिर चिराग पासवान जो कि कहीं न कहीं इस पारिवारिक कलह के केंद्र में भी हैं, कब अपना मत रखते हैं.

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