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13 फरवरी को अयोध्या से निकलेगी रथयात्रा, योगी दिखा सकते हैं हरी झंडी

रामराज्य रथ यात्रा का आयोजन श्रीराम दास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी कर रही है जो अयोध्या से चलकर रामेश्वरम तक जाएगी

Updated On: Feb 08, 2018 12:41 PM IST

FP Staff

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13 फरवरी को अयोध्या से निकलेगी रथयात्रा, योगी दिखा सकते हैं हरी झंडी

13 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व पर अयोध्या में रामराज्य रथ यात्रा निकाली जाएगी. अयोध्या से चलकर रामेश्वरम तक जाने वाली इस रथयात्रा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरी झंडी दिखा सकते हैं. रामराज्य रथ यात्रा का आयोजन श्रीराम दास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी कर रही है.

रथयात्रा का ये है पूरा ब्योरा

इस बारे में श्री शक्तित शांतानंद महर्षि ने कहा, 13 फरवरी को सुबह 10 बजे से दोपहार एक बजे तक कारसेवकपुरम् में महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में और महंत कमल नयन दास के मार्गदर्शन में संत सभा का आयोजन किया गया है. इस सभा में बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्यों के हिस्सा लेने की संभावना है. उसके बाद दोपहर 2 से 4 बजे तक रामराज्य रथ यात्रा का उद्घाटन समारोह होगा. 4 बजे से कारसेवकपुरम् से रथ यात्रा शुरू होगी, जो कारसेवकपुरम् से होते हुए नयाघाट मुख्य मार्ग से फैजाबाद जाएगी.

कार्यक्रम के मुताबिक, फैजाबाद से नंदीग्राम भरतकुंड में रथयात्रा का पहला विश्राम होगा. रथ यात्रा 41 दिन तक चलेगी. इस दौरान हर दिन शोभा यात्रा और राम राज्य सम्मेलन का अयोजन होगा. राम राज्य रथ यात्रा का समापन 24 और 25 मार्च को तिरुअनंतपुरम के पद्भनाथ स्वामी मंदिर में स्वामी सत्यानंद सरस्वती नगरी मैदान में होगा.

श्री शक्तित शांतानंद महर्षि की मानें तो रामराज्य रथ यात्रा का मकसद श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर बनवाना है. महर्षि ने कहा कि इस धरती पर रामराज्य की पुर्नस्थापना के लिए इस रथ यात्रा का आयोजन किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

उधर, सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद मामले की गुरुवार से सुनवाई होने जा रही है. पूरे देश की नजरें इस मामले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह शीर्ष अदालत के सामने इस साल का सबसे अहम मामला है. इस मामले की पिछली सुनवाई 5 दिसंबर को हुई थी. सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि सुनवाई को लेकर इतनी जल्दी क्यों है. 2019 के बाद इसकी सुनवाई की जाए. उनकी इस दलील को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने नकार दिया था और कहा था कि अब सुनवाई नहीं टाली जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले के लिए दस्तावेजों का अलग-अलग लिपियों और भाषाओं में अनुवाद कराया है, जो 53 खंड में हैं. मूल दस्तावेज संस्कृत, फारसी, पालि, उर्दू और अरबी में हैं.

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