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यूपी चुनाव: रामगोपाल की घर वापसी के मायने

समाजवादी पार्टी ने महासचिव रामगोपाल यादव का निष्कासन रद्द कर दिया है.

Updated On: Nov 21, 2016 01:20 PM IST

Amit Singh

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यूपी चुनाव: रामगोपाल की घर वापसी के मायने

समाजवादी पार्टी (सपा) ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव का छह साल के लिए किया गया निष्कासन रद्द करते हुए उन्हें पार्टी में वापस लेने की घोषणा की है.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने गुरुवार को यह घोषणा की. गौरतलब है कि 25 दिन पहले समाजवादी पार्टी के यादव कुनबे में छिड़े संग्राम में राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया था.

बुधवार को राज्यसभा में प्रो. रामगोपाल यादव ने ही सपा का पक्ष रखा था. इसके बाद से ही इस बात की अटकलें लगाई जा रही थी कि जल्द ही उनकी वापसी सपा में हो सकती है. पार्टी सूत्रों के अनुसार रामगोपाल यादव से मुलायम सिंह की नाराजगी कम हो गई थी. साथ में सीएम अखिलेश यादव भी रामगोपाल यादव की वापसी के लिए पूरा जोर लगाए हुए थे.

पहले से तय हो गई थी वापसी

प्रोफेसर की वापसी की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी. यही कारण था कि मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को राज्यसभा में पार्टी का नेता बनाए रखा था. यहां तक कि रामगोपाल यादव के निष्कासन की सूचना भी राज्यसभा के सभापति कार्यालय को नहीं दी गई थी.

लखनऊ में कुछ दिनों पहले समाजवादी पार्टी संसदीय दल की बैठक हुई थी. इसमें राज्यसभा में पार्टी का नेता चुनने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह को दे दिया गया था. लेकिन मुलायम ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया.

मुलायम द्वारा निष्काषन रद्द किए जाने की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता डॉ. सी.पी. राय ने कहा, 'पार्टी के भीतर मतभेद होते रहते हैं. लेकिन अब नेताजी ने उनकी वापसी कर दी है तो चुनाव से पहले सपा को और मजबूती मिलेगी. रामगोपाल यादव हमेशा ही पार्टी के एक स्तंभ के रूप में काम करते रहे हैं और अपने समस्त पदों के साथ काम करते रहेंगे.'

गौरतलब है कि इससे पहले रामगोपाल यादव ने सैफई में आज पत्रकार वार्ता में सपा में मनमाने ढंग से टिकट वितरण का आरोप लगाया था. इस दौरान वह रो पड़े थे. उन्होने कहा की सभी निष्कासित नेताओ की वापसी हो.

क्या होगा शिवपाल का अगला मूव?

अब जब रामगोपाल यादव की पार्टी में वापसी हो गई है तो यह साफ है कि समाजवादी पार्टी में शिवपाल यादव का कद कमजोर हुआ है. गौरतलब है कि प्रोफेसर को पार्टी से निकालने का ऐलान शिवपाल यादव ने किया था. शिवपाल यादव ने राम गोपाल यादव के समर्थकों को भी पार्टी से बाहर कर दिया था.

शिवपाल यादव और राम गोपाल यादव में यह टकराव लंबे समय से चला आ रहा है. शिवपाल कई बार पार्टी फोरम में रामगोपाल की आलोचना कर चुके हैं. ऐसे में रामगोपाल की वापसी से यह कंफर्म हो जाता है कि प्रोफेसर ने एक बार फिर नेताजी को साध लिया है. अब जब प्रोफेसर साब सपा में वापस आ गए हैं तो नेताजी के सामने चुनौती शिवपाल को समझाने की है.

कुछ दिन पहले हुए सपा परिवार के विवाद में शिवपाल यादव ने भी अपना और अपने साथियों का मंत्री पद गंवाया था. लेकिन अभी तक उनके इस्तीफे वापस नहीं हुए हैं. ऐसे में शिवपाल के अगले कदम पर सबकी निगाह है.

अमर सिंह का कद

प्रोफेसर को जब बाहर निकाला गया था तो यह बात सामने आई थी कि रामगोपाल और अमर सिंह के बीच आपस में बनती नहीं है. प्रोफेसर को पार्टी से निकलवाने में इस फैक्टर ने भी काम किया था.

अब नेताजी ने प्रोफेसर की पार्टी में वापसी कराकर अमरसिंह के कद को संतुलित कर दिया था. गौरतलब है कि अमर सिंह ने कुछ दिनों पहले यह कहते हुए नाराजगी दिखाई कि उन्हें छोटे कद के नेताओं के साथ पीछे बैठना पड़ता है. पर नेताजी ने उन्हें दूसरे तरीकों से मना लिया था.

अब जब रामगोपाल के इस्तीफे के बाद राज्यसभा नेता की तलाश हो रही थी तो अमर सिंह का नाम जोर-शोर से लिया जा रहा था, लेकिन नेताजी ने प्रोफेसर की वापसी कराकर सारी बातें साफ कर दी.

अखिलेश हैं सबसे मजबूत

प्रोफेसर की वापसी से यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि पार्टी में अखिलेश यादव सबसे मजबूत हैं. अखिलेश यादव ने पहले रथयात्रा और बाद में सपा रजत जयंती समारोह में खुद को साबित किया.

इस दौरान मुलायम सिंह ने खुलकर उनकी तारीफ की तो नाराजगी के साथ चाचा शिवपाल को भी उनकी तारीफ करनी पड़ी थी. ऐसे में प्रोफेसर की वापसी तो अखिलेश ने करा दी है लेकिन बर्खास्त मंत्रियों के प्रति कोई भी नरम रुख नहीं दिखाया है.

यानी अखिलेश की पार्टी में वो हैसियत बन गई है कि आप उनके सहारे अपनी नैया किनारे ले जा सकते हैं.

फिलहाल समाजवादी पार्टी में चल रहा संग्राम अभी शांत नहीं हुआ है. प्रोफेसर की घर वापसी से एक बार फिर इसके तेज होने की आशंका है.

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