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पीएम मोदी की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद आज दाखिल करेंगे नामांकन

बीजेपी सूत्रों ने कहा कि कोविंद को 61 प्रतिशत से अधिक मत मिलने की गारंटी है

Bhasha Updated On: Jun 23, 2017 09:33 AM IST

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पीएम मोदी की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद आज दाखिल करेंगे नामांकन

एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार राम नाथ कोविंद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शुक्रवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इस मौके पर एनडीए के कई मुख्यमंत्री और उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले कुछ अन्य दलों के नेता भी शामिल होंगे.

एनडीए के सहयोगी दलों के अलावा एआईएडीएमके, बीजेडी, टीआरएस और जेडीयू जैसे क्षेत्रीय दलों ने दलित नेता को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे उनकी जीत लगभग तय प्रतीत हो रही है. अगले राष्ट्रपति का चुनाव करने वाले निर्वाचन मंडल में 48.6 प्रतिशत मत एनडीए के घटक दलों के हैं.

सूत्रों ने बताया कि जब कोविंद अपना नामांकन पत्र दायर करेंगे तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी उस समय मौजूद होंगे. उनके अलावा कोविंद को समर्थन दे रहे गैर एनडीए दल के दो नेता तेलंगाना एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी इस दौरान उपस्थित होंगे.

बीजेपी सूत्रों ने कहा कि कोविंद को 61 प्रतिशत से अधिक मत मिलने की गारंटी है. कुछ क्षेत्रीय दलों ने अपने मत को लेकर अभी फैसला नहीं किया है. अगर उनके भी मत मिलते हैं तो यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है.

राष्ट्रपति चुनाव के लिए कोविंद के खिलाफ विपक्षी दलों के एक समूह ने लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष एवं दलित नेता मीरा कुमार को गुरुवार को अपना संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया.

चुनाव 17 जुलाई को होंगे और मतगणना 20 जुलाई को होगी.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त होगा.

अगर कोविंद को राष्ट्रपति चुन लिया जाता है तो वह सर्वोच्च संवैधानिक कार्यालय का पदभार संभालने वाले दूसरे दलित होंगे. पहले दलित राष्ट्रपति के आर नारायणन थे, जो 1997-2002 में राष्ट्रपति के पद पर रहे.

अधिक चर्चा में नहीं रहने वाले 71 वर्षीय कोविंद ने बीजेपी में कई संगठनात्मक पद संभाले हैं. उन्हें मई 2014 में एनडीए के सत्ता में आने के बाद 2015 में बिहार का राज्यपाल बनाया गया था.

दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके कोविंद को संभावित उम्मीदवारों की सूची में नहीं माना जा रहा था, लेकिन भाजपा द्वारा उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने को राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक समझा जा रहा है.

कोविंद की छवि साफ है और 26 साल के उनके राजनीतिक करियर में वह कभी किसी विवाद में नहीं रहे. उनकी दलित छवि उन्हें ऐसे समय में अच्छा राजनीतिक चयन बनाती है, जब भगवा दल दलितों को लुभाने की कोशिशों में जुटा है.

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