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नोटबंदी पर लोगों की देशभक्ति की परीक्षा न लें राम माधव

राम माधव का यह बयान लोगों का गुस्सा बढ़ाने वाला हो सकता है.

Updated On: Nov 20, 2016 02:59 PM IST

Arun Tiwari Arun Tiwari
सीनियर वेब प्रॉड्यूसर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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नोटबंदी पर लोगों की देशभक्ति की परीक्षा न लें राम माधव

नोट बैन से लोगों की मुश्किलें भले ही बढ़ रही हों लेकिन केंद्र में सत्ताधारी पार्टी के नेता राम माधव लोगों की राष्ट्रभक्ति चेक कर रहे हैं.

उन्होंने ट्वीट करके कहा है ‘इन दिनों हम यह सब बहुत देख रहे हैं. कठिन समय में ही देशभक्ति का असली इम्तिहान होता है. वरना सामान्य दिनों में अपनी कुर्सी पर बैठकर हर कोई देशभक्त बना रहता है.’

राम माधव ने इसके अलावा एक समाचार चैनल के वीडियो को रिट्वीट करके भी कहा है कि देशभक्ति देखनी है तो लोगों की यह लंबी कतार देखिए.

दरअसल राम माधव ने ऐसा करके विपक्षी पार्टियों को जवाब देने की कोशिश की है. लेकिन उनके इस बयान से किसी भी आम आदमी के मन यह सवाल उठ सकता है कि राम माधव लोगों की देशभक्ति पर सवाल खड़ा कर रहे हैं.

इस मामले में फर्स्ट पोस्ट के पॉलिटिकल एडीटर संजय सिंह कहते हैं कि राम माधव को एक आम आदमी की तरह बयान नहीं देना चाहिए. आप देखिए कि लोग पहले से ही इस कदम में सरकार का सहयोग कर रहे हैं.

लंबी-लंबी कतारों में लगे लोग काफी शांति से कतारों में लगकर पैसे निकाल रहे हैं. कई लोगों वास्तविक परेशानियां भी हैं. बीमार लोग भी लाइन में हैं. कई लोगों के घरों में शादी या दूसरे कार्यक्रम हैं. अब उन्हें मुश्किल होगी तो प्रतिक्रिया देंगे ही. ऐसे में सत्ताधारी पार्टी के लोगों को उनका मजाक बनाने की बजाए सिस्टम को और आसान बनाने के लिए काम करना चाहिए.

गौरतलब है कि राम माधव पहले भी अपने बयानों की वजह से विवादों में आ चुके हैं. नोट बैन के बाद विपक्ष भाजपा को घेर रहा है. लगभग सभी पार्टियां भाजपा की आलोचना कर रही हैं. ऐसे में राम माधव का यह बयान लोगों के बीच सरकार के प्रति और गुस्सा बढ़ाने वाला हो सकता है.

एक सवाल यह भी है कि राम माधव राष्ट्र भक्ति चेक करने वाली कौन सी अथॉरिटी हैं? पीएम मोदी नें लोगों की तकलीफों को समझते हुए गाजीपुर की सभा में यह बयान दिया था कि आगे और रास्ते निकाले जाएंगे.

लेकिन राम माधव इसके उलट बयान दे रहे हैं. उन्हें यह समझना चाहिए कि नोट बैन की वजह से लोग वास्तविक रूप से परेशान हैं. इसमें सबकुछ सिर्फ राजनीतिक नहीं है.

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री की एक के बाद एक हुई प्रेस कांफ्रेंस ने भी जताया कि सरकार इस कदम को लेकर काफी संजीदा है. ऐसे में राम माधव या किसी भी दूसरे पार्टी नेता के नासमझी भरा बयान उल्टा पड़ सकता है.

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