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दिल्ली राज्यसभा चुनाव: कुमार विश्वास के किस दांव का है केजरीवाल को डर!

कहीं दिल्ली के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी कोई खेल ना कर दे लिहाजा कुमार विश्वास को अपने पत्ते खेलने का कम से कम वक्त देना चाहते हैं केजरीवाल

Updated On: Dec 27, 2017 07:22 PM IST

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey

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दिल्ली राज्यसभा चुनाव: कुमार विश्वास के किस दांव का है केजरीवाल को डर!

दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में इस वक्त जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है वह है राज्यसभा की तीन सीटों का चुनाव. यूं तो दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी यानी ‘आप’ के प्रचंड बहुमत के चलते ये तीनों सीटें ‘आप’ के ही खाते में जाना तय है, लेकिन पार्टी काडर के भीतर इन तीन उम्मीदवारों के नामों के लेकर इस वक्त कयासबाजी और पार्टी की टॉप लीडरशिप के बीच पैंतरेबाजी का जबरदस्त दौर जारी है. राज्यसभा के तीन उम्मीदवारों को तय करने की प्रकिया में केन्द्र बिंदु पार्टी के राजस्थान प्रभारी कुमार विश्वास बने हुए हैं.

दिल्ली मे राज्यसभा की तीन सीटें हैं. कांग्रेस के जनार्दन द्विवेदी, कर्ण सिंह और परवेज हाशमी का कार्यकाल अगले साल 27 जनवरी में खत्म होने वाला है. इलेक्शन कमीशन इसी महीने यानी 29 दिसंबर को इन चुनावों की अधिसूचना जारी करेगा. उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल करने की आखिरी तारीख पांच जनवरी, 2018 होगी. यानी अब उम्मीदवारों को तय करने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है. लेकिन अब भी आम आदमी पार्टी के भीतर शह और मात का खेल चल रहा है. पार्टी में हाशिए पर चल रहे कुमार विश्वास के समर्थक उनकी दावेदारी को पुख्ता करने के लिए पार्टी काडर के बीच और सोशल मीडिया पर जबरदस्त अभियान चला रहे हैं

कैसे कर सकते हैं विश्वास केजरीवाल पर 'घात'

दिल्ली की विधानसभा में राज्यसभा का प्रत्याशी बनने के लिए सात विधायकों के समर्थन की दरकार है. चार विधायक बीजेपी के पास हैं. विश्वास के लिए ‘आप’ के तीन विधायकों का समर्थन जुटाना असंभव काम नहीं है. बिजवासन के विधायक देवेंद्र सहरावत की विश्वास के नजदीकियां किसी के छिपी नहीं हैं. करावल नगर के विधायक कपिल मिश्रा तो विश्वास के साथ हैं ही. साथ ही, मटिया महल के विधायक आसिम अहमद खान और तिमारपुर के विधायक पंकज पुष्कर भी कुमार विश्वास के प्रस्तावक बन सकते हैं.

ऐसे हालात में चुनाव जरूरी हो जाएगा और ‘आप’ के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित नहीं हो सकेंगे. यानी 16 जनवरी को वोटिंग की नौबत आ जाएगी. इसके साथ ही क्रॉस वोटिंग का रास्ता भी खुल जाएगा. इस तरह से बीजेपी भी विधानसभा में महज चार सदस्यों के बावजूद अपना खेल खेल सकेगी. हालांकि ऐसा होगा, इसे भरोसे से नहीं कह सकते. लेकिन ऐसे कयास राजनीतिक गलियारों में जरूर लग रहे हैं.

क्या इसीलिए हो रही है देरी?

कुमार विश्वास को अपनी रणनीति बनाने के लिए कम से कम वक्त देने की योजना के तहत ही केजरीवाल अपने उम्मीदवारों के नाम तय करने के फैसले को आखिरी वक्त तक टाल रहे हैं.

खबर है कि केजरीवाल एक-दो दिन में अपने परिवार के साथ नए साल की छुट्टियां मनाने के लिए भारत के एक द्वीप पर जा रहे हैं. यानी राज्यसभा के लिए पार्टी के तीन उम्मीदवारों का फैसला अब केजरीवाल के छुट्टियों से लौटकर आने के बाद पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी करेगी.

उम्मीदवार तय करने में इतनी देरी करना केजरीवाल की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. फर्स्टपोस्ट हिंदी को पार्टी से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि उम्मीदवारों का ऐलान आखिरी वक्त पर होगा, ताकि कुमार विश्वास को अपने पत्ते खेलने का ज्यादा वक्त ना मिल सके. दरअसल ‘आप’ की टॉप लीडरशिप को कुमार विश्वास की बीजेपी के साथ नजदीकियों का शक है. पार्टी को आशंका है कि अगर जल्दी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया तो विश्वास बीजेपी का दामन थाम कर बागी उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भर सकते हैं.

स्वाति मालीवाल अब भी हैं रेस में सबसे आगे

जहां तक केजरीवाल के पसंदीदा उम्मीदवारों की बात है तो ‘आप’ के भीतर अब तक केजरीवाल और उनके बेहद खास लोगों के अलावा किसी को अंदाजा नहीं है कि केजरीवाल किसे पार्टी की ओर से राज्यसभा भेजने वाले हैं. फर्स्टपोस्ट हिंदी ने जैसा कि अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था, दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन स्वाति मालीवाल राज्यसभा की दावेदीरी में अब भी केजरीवाल की प्रायोरिटी लिस्ट में हैं. स्वाति पिछले कई हफ्तों से लगातार एक्टिव हैं और हाल ही में एक बाबा के आश्रम से कई महिलाओं को बाहर निकालने के उनके प्रयासों ने उनकी इमेज को तो चमकाया ही है. साथ ही वह ‘आप’ को भी पॉजिटिव न्यूज के लिए खबरों में बनाए हुए हैं.

Swati Maliwal

बतौर महिला आयोग की चेयरपर्सन उनका तीन साल का कार्यकाल जल्दी ही खत्म होने वाला है और पार्टी के भीतर चर्चा है कि वह अब अपने लिए एक नई भूमिका चाहती हैं. पार्टी के भीतर उनका जो रुतबा है उसे देखते हुए केजरीवाल उन्हें सरकार में शामिल करके सरकार के भीतर के समीकरण को बिगाड़ना नहीं चाहेंगे.

क्या सामने आएगा चौंकाने वाला नाम!

पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र में फर्स्टपोस्ट हिंदी को बताया है कि पार्टी के तीन उम्मीदवारों में से दो या कम से कम एक नाम बेहद चौंकाने वाला हो सकता है. हालांकि चर्चा तो यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार में मंत्री रह चुके अरुण शौरी को भी पार्टी राज्यसभा भेज सकती है. शौरी पिछले कुछ वक्त से बीजेपी में हाशिए पर हैं और मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की घनघोर आलोचना कर रहे हैं.

हालांकि फर्स्टपोस्ट हिंदी के सूत्र ने उनकी दावेदारी की पुष्टि नहीं की है. सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर वकील को भी केजरीवाल राज्यसभा भेज सकते हैं. कुछ वक्त पहले तक पत्रकार से राजनेता बने आशुतोष और संजय सिंह को भी पार्टी का तय उम्मीदवार माना जा रहा था. लेकिन अब किसी की भी उम्मीदवारी तय नहीं है.

संजय सिंह ने हाल ही में यूपी में हुए निकाय चुनाव में थोड़ी बहुत कामयाबी दिलाने का दावा करके अपनी पोजीशन को मजबूत किया. लेकिन उसके बाद पंजाब के निकाय चुनाव में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी भी उनके ही कंधों पर आई है. हालांकि वह पंजाब के अध्यक्ष पद से इसी साल अप्रैल में ही इस्तीफा दे चुके हैं और पार्टी ने इसी महीने मनीष सिसौदिया को पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी है.

बहरहाल कौन होंगे ‘आप’ के तीन राज्यसभा के उम्मीदवार, इस सवाल का जवाब तो मशहूर काल्पनिक जासूस शरलोक होम्स भी नहीं पता कर सकते.  हालांकि कौन उम्मीदवार नहीं होगा, इस बात का जवाब तो केजरीवाल की रणनीति से साफ पता चल रहा है.

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