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राज्यसभा चुनावः जब तेजस्वी ने किया मायावती को फोन

क्या मायावती आरजेडी के साथ सीधे तौर पर नाता जोड़ने से कतरा रही हैं

FP Staff Updated On: Feb 26, 2018 08:30 PM IST

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राज्यसभा चुनावः जब तेजस्वी ने किया मायावती को फोन

राज्यसभा चुनाव के तारीख का एलान 22 फरवरी को हुआ. उस वक्त तेजस्वी यादव मधेपुरा के दौरे पर थे. उनकी राजनीतिक यात्रा चल रही है. विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव की तैयारी अलग. शाम को जब पटना पहुंचे, सबसे पहले उन्होंने मायावती को फोन मिलाया.

तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि उन्हें याद था आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ने मायावती से वादा किया था कि वह उनको राज्यसभा भेजेंगें. उस वक्त (अगस्त 2017 में मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था) जबकि सीट खाली नहीं था, फिर भी लालू प्रसाद ने उनको ऑफर दिया था, कि वह उनकों राज्यसभा भेजने को तैयार हैं. लेकिन उस वक्त भी मायावती ने मना कर दिया था.

25 फरवरी की शाम को एक बार फिर बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने मायावती को फोन किया. कहा मैं तेजस्वी बोल रहा हूं. पापा (लालू प्रसाद यादव) ने आपसे वादा किया था. सीट खाली हुई है, चुनाव की घोषणा हो चुकी है, आरजेडी अपना वादा निभाना चाहती है.

मायावती ने फिर राज्यसभा जाने से कर दिया इनकार 

मायावती ने पहले तो धन्यवाद किया. फिर तेजस्वी ने कहा कि संसद में लालू प्रसाद नहीं है, शरद यादव भी बाहर हो चुके हैं, ऐसे में जिस बात की आपको चिंता थी कि वंचितों की आवाज उठानेवाला कोई नहीं रहा, उसकी भरपाई आप चाहो तो की जा सकती है.

लेकिन पूर्व की तरह एक बार फिर मायावती ने मना कर दिया. कहा कि लालू प्रसाद ने मेरे बारे में सोचा, आरजेडी ने मेरे बारे में इतना सोचा यह आप सबों का बड़प्पन है. लेकिन जब तक बीजेपी की सरकार है तब तक पार्लियामेंट नहीं जाऊंगी.

क्या मायावती आरजेडी के साथ सीधे तौर पर नाता जोड़ने से कतरा रही हैं? इस सवाल के जवाब में संजय यादव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. हालांकि इस बीच सवाल यह भी है कि अगर मायावती को राज्यसभा भेजने को आरजेडी तैयार है क्योंकि दबे कुचलों, वंंचितों की आवाज उठानेवाला नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि शरद यादव को क्यों नहीं भेजा जा रहा है?

कांग्रेस मायावती को बता चुकी है गठबंधन में बाधक 

हाल ही में कांग्रेस के प्रमुख नेता गुलाम नबी आजाद ने मायावती पर आरोप लगाया था कि वह बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन में बाधा बन रही हैं. उन्होंने कहा था, 'यूपी असेंबली चुनाव से पहले हमने मायावती जी से मुलाकात की थी. तब मैं व्यक्तिगत रूप से भी उनसे मिलने गया था. हम चाहते थे कि एसपी, बीएसपी और कांग्रेस को मिलाकर एक अलायंस बने ताकि बीजेपी को हराया जा सके लेकिन वे (मायावती) तैयार नहीं हुईं.'

देश में एनडीए सरकार के खिलाफ किसी भी गठबंधन के लिए बीएसपी एक अहम घटक साबित हो सकती है. पूर्व में कई बार पिछले दरवाजे से बातचीत होने के बावजूद मायावती ने किसी भी गठजोड़ से मना कर दिया है.

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