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राजस्थान में भी फर्जी वोटर बढ़ाने के आरोप, क्या फेक वोटरों से जीता जाएगा चुनाव?

राजस्थान में कांग्रेस ने बोगस वोटर्स के नाम मतदाता सूचियों में शामिल करने के आरोप लगाए हैं

Updated On: Aug 21, 2018 11:04 AM IST

Mahendra Saini
स्वतंत्र पत्रकार

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राजस्थान में भी फर्जी वोटर बढ़ाने के आरोप, क्या फेक वोटरों से जीता जाएगा चुनाव?
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अभी 2 महीने पहले की ही बात है जब मध्य प्रदेश की भोजपुर विधानसभा सीट के एक पोलिंग बूथ पर एक ही फोटो वाले 23 मतदाता पहचान पत्र सामने आए थे. यही फोटो दूसरे पोलिंग बूथ के 13 अन्य मतदाता पहचान पत्रों पर भी मिली. कई मतदाता पहचान पत्रों पर एक ही नंबर मिले थे. कई मतदाता पहचान पत्रों में एक ही पता दर्ज था, जहां वास्तव में कोई रहता ही नहीं था.

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ये सब बीजेपी की साजिश है. कांग्रेस के मुताबिक फर्जी मतदाताओं के ऐसे मामले एक-दो विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं. पूरे एमपी में 60 लाख फर्जी वोटर होने का दावा किया गया था. कांग्रेस का तो ये भी आरोप था कि पूरी सरकारी मशीनरी, जिनमें जिला कलेक्टर तक शामिल है, का दुरुपयोग कर फर्जी वोटर्स को मतदाता सूचियों में शामिल किया गया.

कांग्रेस का आरोप ये भी था कि 2013 विधानसभा चुनाव में यहां 26% नए मतदाता जोड़े गए थे. ये अपूर्व उदाहरण है क्योंकि आमतौर पर नवीवीकरण के वक्त 10% तक ही नए मतदाता जुड़ते हैं. हालांकि बीजेपी ने भी इन फर्जी वोटरों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी. दोनों ही पार्टियों ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों का आरोप एक-दूसरे पर लगाया था.

खैर ये तो थी मध्य प्रदेश की बात. लेकिन फर्जी मतदाताओं के आरोप कर्नाटक में भी लगे थे, बेंगलुरु के एक फ्लैट से 10 हजार से ज्यादा मतदाता पहचान पत्र मिले थे. इसके बाद इस इलाके का चुनाव तक टालना पड़ा था. अब ऐसे ही आरोप राजस्थान में भी लग रहे हैं.

राजस्थान में फर्जी मतदाता कहां-कहां?

राजस्थान में भी कांग्रेस ही ने बोगस वोटर्स के नाम मतदाता सूचियों में शामिल करने के आरोप लगाए हैं. ये आरोप किसी एक विधानसभा क्षेत्र में नहीं बल्कि अलग-अलग जिलों में कई शहरों-कस्बों में लग रहे हैं. कांग्रेस का दावा है कि पूरे राज्य में करीब 45 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं. इसे बीजेपी की साजिश बताया गया है क्योंकि कांग्रेस के मुताबिक सत्ताधारी दल की इस बार जीत की संभावनाएं न के बराबर हैं.

जयपुर के किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में 19 हजार से ज्यादा फर्जी वोटर होने का आरोप लगाया गया है. राजस्थान कांग्रेस के सचिव अमीन कागजी का कहना है कि उन्होंने इस इलाके के सभी 2 लाख 6 हजार मतदाताओं को वेरिफाई किया तो ये गड़बड़ सामने आई. इस संबंध में उन्होने मय सबूतों के शिकायत की है.

इसी तरह जयपुर और अजमेर के बीच दूदू विधानसभा इलाके में 88 हजार से ज्यादा बोगस वोटर्स के होने का दावा किया जा रहा है. यहां से विधायक रहे और पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर ने निर्वाचन अधिकारी को सीडी सौंपी है. इसके बाद जांच शुरू भी कर दी गई है. नागर का आरोप है कि कई-कई लोगों के नाम, उम्र, लिंग और पते एक ही दर्ज हैं. ऐसी ही शिकायतें जैसलमेर और डूंगरपुर जैसे दूरदराज के इलाकों से भी आ रही हैं.

इस संबंध में पिछले हफ्ते ही मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत से कांग्रेस ने आधिकारिक शिकायत भी दर्ज कराई है. राष्ट्रीय संगठन महासचिव अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट समेत कई बड़े नेताओं ने बीजेपी पर बोगस वोटर जोड़ने का आरोप लगाया है. इनका दावा है कि दूसरे राज्यों की तरह राजस्थान में भी भारी पैमाने पर गड़बड़ियां की जा रही हैं. आयोग से अपील की गई है कि फौरन इसकी जांच कराई जाए.

कितने सही हैं फर्जी मतदाताओं के दावे?

2013 चुनाव के समय राजस्थान में करीब 4 करोड़ 8 लाख मतदाता थे. अब कांग्रेस का आरोप है कि कम से कम 45 लाख फर्जी मतदाता जोड़ दिए गए हैं. यानी, सीधे-सीधे 10% से ज्यादा मतदाताओं के फर्जी होने का आरोप है. 10 फीसदी का आंकड़ा बहुत बड़ा है. राजस्थान में मुख्य मुकाबला 2 पार्टियों के बीच ही है. ऐसे में 10 फीसदी का अंतर पूरे चुनावी गणित को बदल सकता है.

पिछले चुनाव में बीजेपी को 163 सीटें मिली थी. कुल वोटों का आंकड़ा देखें तो उसे 45.5% वोट हासिल हुए थे. दूसरी ओर, कांग्रेस के 21 ही उम्मीदवार जीत पाए थे. लेकिन उसका वोट प्रतिशत 33 था. यानी दोनों पार्टियों के बीच अंतर सिर्फ 12% था. अब जो सर्वे सामने आ रहे हैं, उनके मुताबिक बीजेपी का वोट प्रतिशत घटकर 36 या इससे कम रह सकता है. ऐसे में अगर फर्जी मतदाताओं के कांग्रेस के दावे पर यकीन करें और इसे वाकई बीजेपी की साजिश मान लें तो उसका वोट प्रतिशत 46 पर पहुंच जाएगा. इस तरह, बीजेपी न सिर्फ सत्ता बचा लेगी बल्कि फिर से 80 फीसदी सीटें भी जीत सकती है.

लेकिन सवाल ये है कि क्या कांग्रेस दफ्तर से जोर-जोर से किए जा रहे फर्जी मतदाताओं के दावे क्या पूरी तरह सच हैं? मध्य प्रदेश में कांग्रेस की शिकायत के बाद निर्वाचन आयोग ने जांच की थी. जांच में एक भी आरोप सही नहीं पाया गया. खुद निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण दिया कि एक ही पते पर अलग-अलग मतदाताओं या एक ही नाम, उम्र, लिंग के अलग-अलग पतों पर मतदाताओं के होने के दावे बेबुनियाद हैं. 2 दर्जन से ज्यादा लोगों के एक ही फोटो होने को कम्प्यूटर ऑपरेटर की गलती माना गया क्योंकि इन सबके नाम और पते अलग-अलग और वास्तविक पाए गए.

अब राजस्थान में भी कांग्रेस की शिकायत के बाद जांच शुरू कर दी गई है. सवाल एक बार फिर वही है कि अगर यहां भी शिकायत फर्जी पाई गई तो क्या होगा. क्या फेक न्यूज के इस दौर में ये भी एक नई 'पोस्ट ट्रूथ' तकनीक है?

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