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दिल्ली विधानसभा उपचुनाव का इफेक्ट एमसीडी इलेक्शन पर भी दिखेगा

दिल्ली एमसीडी चुनाव इस वक्त सबके लिए नाक का सवाल है.

Updated On: Apr 10, 2017 01:27 PM IST

Amitesh Amitesh

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दिल्ली विधानसभा उपचुनाव का इफेक्ट एमसीडी इलेक्शन पर भी दिखेगा

दिल्ली एमसीडी चुनाव इस वक्त सबके लिए नाक का सवाल है. पांच राज्यों में भारी जीत के बावजूद बीजेपी एमसीडी चुनाव को हल्के में नहीं ले रही है.

पार्टी को लगता है कि एमसीडी की सत्ता में उसकी फिर से वापसी ही केजरीवाल को जवाब दे पाएगी वरना आप और केजरीवाल इस बात को फिर से प्रचारित करने में लग जाएंगे कि बीजेपी के विजय रथ को फिर से दिल्ली में थाम लिया है.

कांग्रेस भी अपना सबकुछ दांव पर लगा रही है. उसे अपनी खोई साख हासिल करनी है. ऐसे में एमसीडी का मुकाबला त्रिकोणीय लग रहा है.

लेकिन, एमसीडी चुनाव से ठीक पहले दिल्ली में विधानसभा उपचुनाव एमसीडी चुनाव के पहले माहौल को बनाने और बिगाड़ने वाला हो सकता है.

राजौरी गार्डेन में विधानसभा का उपचुनाव 9 अप्रैल को हुआ है जिसका परिणाम 13 अप्रैल को ही आ जाएगा. आप के विधायक जरनैल सिंह ने इस सीट से इस्तीफा देकर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया था. उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

लेकिन, इस खाली सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और आप के बीच  घमासान मचा हुआ है. तीनों की तरफ से इस पर जीत की कोशिश और दावे हो रहे हैं. चुनाव खत्म हो गया है, अब केवल दावे हो रहे हैं.

आप की तरफ से हरजीत सिंह, कांग्रेस की तरफ से मीनाक्षी चंदेला, बीजेपी-अकाली गठबंधन की तरफ से मनजिंदर सिंह सिरसा यहां से चुनाव मैदान में थे.

अगर आप इस सीट को जीत जाती है तो 23 अप्रैल को होनेवाले एमसीडी चुनाव से पहले उसकी तरफ से इस बात का दावा किया जाएगा कि अभी भी दिल्ली में उसकी लोकप्रियता बरकरार है. इसे केजरीवाल की तरफ से जोर-शोर से भुनाया भी जाएगा.

अगर कांग्रेस जीत जाती है तो दावा उसकी तरफ से किया जाएगा कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से  दिल्ली में अपना खोया जनाधार वापस पा रही है और मजबूत हो रही है. कांग्रेस का विधानसभा के भीतर खाता भी खुल जाएगा.

लेकिन, बीजेपी की जीतने की सूरत में पार्टी के विधायकों की संख्या चार हो जाएगी. इसे बीजेपी एमसीडी चुनाव में बड़ी जीत के रूप में भुनाने की कोशिश भी करेगी.

पार्टी की तरफ से पहले से ही आप के खिलाफ मोर्चा खोला गया है. लेकिन, उपचुनाव जीतने की सूरत में पार्टी आगे बड़े स्तर पर मुद्दा बना देगी.

साफ है जिस पार्टी का उम्मीदवार राजौरी गार्डेन विधानसभा के उपचुनाव में जीत हासिल करेगा, उस पार्टी का पलड़ा एमसीडी में थोड़ा भारी हो सकता है.

लेकिन, राजौरी गार्डेन के उपचुनाव में मतदान के कम होते प्रतिशत ने चिंता खड़ी कर दी है. सभी दलों की तरफ से अपनी-अपनी जीत के दावे किए जा रहे हैं. इस बार उपचुनाव में 47 फीसदी वोट पड़े हैं जो कि पिछली बार की तुलना में 25 फीसदी कम हैं.

बीजेपी प्रवक्ता हरीश खुराना का दावा है कि मतदान का प्रतिशत कम होने से बीजेपी के उपर कोई फर्क नहीं पड़ता है. खुराना का दावा है कि बीजेपी के वोटर घरों से बाहर निकले हैं, जबकि इस चुनाव में आम आदमी के उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो जाएगी.

फिलहाल उपचुनाव के परिणाम पर सबकी नजरें हैं, इसमें जीत और हार का एमसीडी चुनाव और इन चुनाव के मुद्दों पर सीधा असर पड़ने वाला है.

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