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क्या सुपरस्टार रजनीकांत साउथ में बीजेपी के सियासी मोहरे हैं!

रजनीकांत ने नई पार्टी बनाने का ऐलान क्या किया कि एक दिन बाद भाजपा यहां तक दावा कर गई कि रजनीकांत की प्रस्तावित पार्टी साल 2019 में एनडीए का हिस्सा होगी

Updated On: Jan 01, 2018 07:18 PM IST

FP Staff

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क्या सुपरस्टार रजनीकांत साउथ में बीजेपी के सियासी मोहरे हैं!

साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ने सियासी मैदान में कूदने का ऐलान कर दिया है. उनके इस ऐलान के साथ ही देश की राजनीति में कई तरह की सुगबुगाहटों का दौर शुरू हो गया है. सियासी पंडितों ने तमिलनाडु के क्षत्रपों के भूत-भविष्य के कयास लगाने शुरू कर दिए हैं. इसी कड़ी में एक बात यह भी उठ रही है कि जब रजनीकांत सियासी ताल ठोंकेंगे तो द्रविड़ों पर राज करने वाली दो पार्टियां-डीएमके और एआईएडीएमके का क्या होगा. इसके अलावा उस बीजेपी का क्या होगा जो तमिलनाडु में अपना सूर्योदय देख रही है.

गौरतलब है कि द्रविड़ ब्राह्मणों की अच्छी-खासी संख्या को देखते हुए बीजेपी यहां अपना परचम लहराने का सोच रही है. पर रजनीकांत के ‘मास्टरस्ट्रोक’ ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा है. कुछ यही हाल डीएमके के भी हैं, जिसने प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर को भुनाने का मूड बनाया था, पर अब इसमें पलीता लगता दिख रहा है.

उधर, इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर की मानें तो रजनीकांत फिलहाल लोकसभा चुनावों को लेकर दुविधा में हैं तो दूसरी ओर बीजेपी ने तमिलनाडु में चुनावी गुणा-भाग का हिसाब लगाते हुए एक बड़ा ऐलान कर दिया. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष तमिलसाय सुंदरराजन के मुताबिक रजनीकांत की पार्टी साल 2019 के लोकसभा चुनावों में एनडीए का हिस्सा होगी.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि रजनीकांत का मास्टरस्ट्रोक 2019 में न सिर्फ डीएमके को धूल चटाएगा, बल्कि भविष्य में उभरने वाले अन्य विकल्पों पर भी करारा चोट करेगा. रजनीकांत से खासकर छोटी पार्टियों को ज्यादा खतरा है क्योंकि इनके वोटर रजनीकांत की अदाकारी के काफी दीवाने हैं.

दूसरी ओर डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन, रजनीकांत का कोई बुरा असर नहीं देखते. स्टालिन ने तो इस सवाल को ही सिरे से खारिज कर दिया कि रजनीकांत अगले चुनाव में सबसे ज्यादा डीएमके को प्रभावित करेंगे. जबकि आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा असर डीएमके पर ही पड़ता दिख रहा है.

मसलन, आरके नगर उपचुनाव में डीएमके की बुरी हार, टीटीवी दिनाकरण से गलाकाट प्रतिस्पर्धा, एस रामदॉस की जाति आधारित पार्टी पीएमके, दलित पार्टी वीसीके, जीके वासन का छोटा मगर प्रभावी गुट और सीमन की नाम तमिलार काची जैसी पार्टियां स्टालिन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही हैं.

पीएमके के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो रजनीकांत की पार्टी कुछ-कुछ वैसा ही करेगी जैसे दशक भर पहले कैप्टन विजयकांत की डीएमडीके ने क्षेत्रिय पार्टियों का खेल बिगाड़ा था. हालांकि उनका यह भी मानना है कि हो सकता है. रजनीकांत शुरू में 10 फीसदी वोट झटक लें, पर दीर्घकाल में उनकी पार्टी कोई बहुत बड़ा तीर नहीं मार सकेगी. वीसीके पार्टी के महासचिव डी रविकुमार तो यहां तक कह गए कि रजनीकांत को बीजेपी ने आगे किया है, जिसका असर प्रदेश की अन्य पार्टियों पर कतई नहीं पड़ने वाला.

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