S M L

राजस्थान चुनाव 2018: टोंक में यूनुस खान के चुनौती देने से सचिन पायलट की राह नहीं रही आसान

बड़ा सवाल यह है कि क्या मुसलमान वोटर, कांग्रेस को गच्चा देंगे. अगर, यह मान भी लें कि इस सीट के 60 हजार में से 30 फीसदी वोटर पलटी मार जाएं और यूनुस खान को वोट दे दें, तो सचिन पायलट के लिए मुश्किल बड़ी हो जाएगी

Updated On: Dec 02, 2018 11:27 AM IST

Sanjay Singh

0
राजस्थान चुनाव 2018: टोंक में यूनुस खान के चुनौती देने से सचिन पायलट की राह नहीं रही आसान

राजस्थान के टोंक जिले के एक बड़े चौराहे पर लगी इंदिरा गांधी की मूर्ति के इर्द-गिर्द यूनुस खान के समर्थक बड़ी तादाद में जमा हैं. मूर्ति से कुछ आगे की तरफ समर्थकों ने दो ऑफिस बना लिए हैं. इनमें से एक कश्यप कीर समाज का है, जो मुख्यधारा से बाहर की जाति है. इस जाति के दफ्तर के ठीक सामने की तरफ मुस्लिम समूह ने अपना डेरा जमाया हुआ है. असल में खाने-पीने के एक ठीहे (अस्थाई दुकान) को वक्ती तौर पर यूनुस खान के समर्थकों ने चुनावी दफ्तर बना लिया है.

सड़क के आर-पार डेरा जमाए यूनुस खान के यह समर्थक आपस में तो ज्यादा बातें नहीं करते लेकिन सामने वालों पर धाक जमाने के लिए यह दावा जरूर करते हैं कि उनके पास दोनों समुदायों का समर्थन है. यूनुस खान, राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों पर खड़े बीजेपी उम्मीदवारों में इकलौते मुस्लिम प्रत्याशी हैं. वो पिछली बार यहां चुनाव के लिए भेजे गए थे.

यूनुस खान, वसुंधरा राजे सरकार के अहम मंत्रियों में से रहे हैं. उन्हें बीजेपी के केंद्रीय और राज्य के नेतृत्व ने कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दो में से एक प्रत्याशी, सचिन पायलट का मुकाबला करने के लिए मैदान में उतारा है.

सचिन पायलट के खिलाफ उतारे गए यूनुस खान के दांव ने सभी को चौंका दिया

सचिन पायलट अपनी जाति के ही नहीं, दूसरी जातियों में भी लोकप्रिय नेता हैं. मंत्री के तौर पर यूनुस खान ने लोक कल्याण और परिवहन के अलावा विकास के जो काम अपनी मौजूदा सीट डीडवाना पर कराए, उससे खान को काफी लोकप्रियता मिली. लेकिन, जब यूनुस खान को सचिन पायलट के खिलाफ उतारा गया, तो इस दांव ने सभी को चौंका दिया.

सचिन पायलट अब तक सांसद और मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे. उसके अलावा उनकी पहचान अपने पिता राजेश पायलट की वजह से ज्यादा मिली है. सचिन पायलट अब से पहले विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े हैं. वो कांग्रेस के संभावित मुख्यमंत्री प्रत्याशी हैं, इस बात से भी सचिन पायलट को शुरुआती बढ़त हासिल हो गई है.

sachin pilot

सचिन पायलट

वहीं, यूनुस खान ने अपने प्रचार की शुरुआत बड़े धीरे मगर सधे हुए अंदाज में की. अब उनके प्रचार की वजह से सचिन पायलट के लिए चुनौती बड़ी होती जा रही है. सचिन पायलट इस सीट से इसलिए चुनाव लड़ रहे हैं क्योंकि इस सीट पर गुज्जर वोटर काफी संख्या में हैं. इसके अलावा मुस्लिम वोट भी काफी हैं. इन दो समुदायों के अलावा छोटे-मोटे अन्य जातियों के वोट मिलने की उम्मीद लगाए सचिन पायलट को लगा था कि वो आराम से चुनाव जीत जाएंगे. लेकिन, बीजेपी ने यूनुस खान को मैदान में उतार कर मुकाबला बेहद दिलचस्प बना दिया है.

बड़ा सवाल यह है कि क्या मुसलमान वोटर, कांग्रेस को गच्चा देंगे. अगर, हम यह मान भी लें कि इस सीट के 60 हजार में से 30 फीसदी वोटर पलटी मार जाएं और यूनुस खान को वोट दे दें, तो सचिन पायलट के लिए मुश्किल बड़ी हो जाएगी.

यूनुस खान के चुनाव ऑफिस में जमा मुस्लिम युवा बड़े उत्साहित हैं. वो कहते हैं, 'यहां इस बैनर को देखिए. हम सब यूनुस साहब का समर्थन कर रहे हैं. ठीक इसी जगह पर कल उन्होंने विशाल रैली की. वो जीत जाएंगे.'

'मेरी बात गांठ बांध लो, यहां सचिन पायलट ही जीतेगा'

लेकिन, जैसे ही हम वहां से आगे बढ़े, एक पकी हुई दाढ़ी वाले टोपी लगाए हुए बुजुर्ग हमारे पास आए और फुसफुसाकर बोले, 'यह सब बिके हुए हैं. यह बीजेपी से पैसे ले लेंगे और यूनुस खान को, बीजेपी को वोट नहीं देंगे. यह सब धोखा है. मेरी बात गांठ बांध लो, सचिन पायलट ही जीतेगा.'

थोड़ा और आगे जाने पर कुछ लोग बैठ कर चाय की चुस्कियों का मजा ले रहे हैं. वो खुल कर बातें करते हैं. यह कहते हैं कि इस बार टोंक सीट पर कड़ा मुकाबला है. उन में से एक कहता है, 'यह टोंक है. यहां पैसा बोलता है.' उसकी जुबान में कड़वाहट साफ थी. यह पूछने पर कि किसके पास पैसा है, यूनुस खान या सचिन पायलट? एक मौजूदा राज्य सरकार में मंत्री है और दूसरा केंद में मंत्री रह चुका है. पायलट इस वक्त कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, जिन के ऊपर पार्टी के लिए पैसा, कार्यकर्ता और संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी भी है. तो उस शख्स ने कहा कि यूनुस खान के पास ज्यादा पैसा खर्च करने की ताकत है. जब उन लोगों से यह पूछा गया कि क्या कोई मुस्लिम भी है, तो उस ने कहा कि, 'हम सब मुसलमान हैं. मेरा नाम असलम खान है.'

yunus khan

यूनुस खान

वहीं बैठे एक और आदमी ने और साफगोई से अपनी बात रखी. उसका नाम था मुहम्मद सलीम. सलीम ने कहा कि, 'यूनुस खान अच्छे आदमी हैं. उन तक पहुंचना आसान है. उनके पास खुद को साबित करने का मौका है. जिस तरह मंत्री के तौर पर यूनुस खान ने अपने इलाके डीडवाना में काम किया है, उससे शायद मैं यूनुस खान को ही वोट दूं. पर दिक्कत यह है कि यूनुस खान बीजेपी के प्रत्याशी हैं. बचपन से ही हम हाथ (पंजा) पर मुहर लगाते आए हैं. मेरे परिवार और दोस्तों के परिवार हमेशा से कांग्रेस को वोट देते हैं. कमल के बटन पर उंगली ले जाना और उसे दबाना, मेरे लिए और मेरे जैसे बहुत से लोगों के लिए बहुत मुश्किल है.'

इस दौरान पास बैठा एक और शख्स बोलने के लिए बेकरार हो रहा था. वहां से जाने से पहले उसने आखिरी बात कही, 'यहां हालात बहुत साफ नहीं हैं. मैंने ऐसा चुनाव नहीं देखा. यहां बहुत कुछ दांव पर है. एक तरफ भविष्य के मुख्यमंत्री हैं, तो दूसरी तरफ मौजूदा राज्य सरकार के नंबर 2 नेता. किसे पता कि टोंक का वोटर कौन सा इतिहास रचने जा रहा है. मुझे तसल्ली है कि जब 11 दिसंबर को नतीजे आएंगे तो जो भी इतिहास लिखा जाएगा, उसमें हम भी शरीक होंगे.'

'बाजू सैनी दबाव में आ गए हैं और यूनुस खान के समर्थन में शांत बैठ गए हैं' 

शिवसेना के उम्मीदवार बाजू सैनी पिछली बार यहां से निर्दलीय चुनाव लड़े थे. उन्हें भी अच्छे-खासे वोट मिले थे. सैनी, माली समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी अशोक गहलोत इसी जाति के हैं. यहां पर बहुत कनफ्यूजन है. किस उम्मीदवार की तरफ झुकाव है, तस्वीर साफ नहीं. देखने वाली बात होगी कि बाजू सैनी प्रचार में कितनी ताकत लगाते हैं. बीजेपी समर्थकों को लगता है कि बाजू सैनी दबाव में आ गए हैं और यूनुस खान के समर्थन में शांत बैठ गए हैं. उनके समुदाय ने यूनुस खान को वोट देने का फैसला किया है. लेकिन, सचिन पायलट के समर्थकों को इस बात पर भरोसा नहीं है.

वसुंधरा राजे

वसुंधरा राजे

यहां एक बात एकदम साफ है. टोंक से जयपुर का चार लेन का हाइवे एकदम सीधा है और तेज रफ्तार से चलने लायक है. गाड़ी के लिहाज से भी और सियासत के नजरिए से भी.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi