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राजस्थान चुनाव 2018: 69 साल के चुनावी इतिहास में केवल 1 मुस्लिम ही बना मुख्यमंत्री

राज्य की मुस्लिम आबादी के लिहाज से कहा जा सकता है कि इतने वर्षों के चुनावी इतिहास में केवल एक ही मुस्लिम का यहां मुख्यमंत्री बनना कम है

Updated On: Nov 29, 2018 07:26 AM IST

FP Staff

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राजस्थान चुनाव 2018: 69 साल के चुनावी इतिहास में केवल 1 मुस्लिम ही बना मुख्यमंत्री

राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने चरम पर है. चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी के लिए जहां अपनी सरकार बचाने की चुनौती है वहीं कांग्रेस विपक्षी चोला उतारकर सत्तासीन होने की जंग लड़ रही है.

राजस्थान को मुख्य रूप से राजपूतों और उनके शौर्य के लिए जाना जाता है मगर यहां मुस्लिमों की आबादी भी खासी संख्या (10 प्रतिशत) में है. राज्य की 200 विधानसभा सीटों में से कम से कम 36 ऐसी हैं जहां मुसलमान मतदाताओं की अच्छी संख्या है. इन 36 में से 15 सीटों के नतीजे को मुस्लिम वोटर प्रभावित करते हैं. जबकि 8-10 सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोट नतीजे तय करते हैं.

धर्मनिरपेक्षता का नारा देने वाली कांग्रेस मुस्लिमों को अपना कोर वोटर मानती है मगर बीजेपी को भी चुनाव में इनके वोट चाहिए इसलिए वो भी कुछ मुस्लिमों को अपना उम्मीदवार बनाती है. कांग्रेस के 15 प्रत्याशियों के उलट बीजेपी ने इस बार महज एक मुस्लिम को टिकट दिया है. बीजेपी ने हाईप्रोफाइल टोंक सीट पर राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट के खिलाफ युनूस खान को उतारा है. युनूस खान वसुंधरा सरकार में मंत्री हैं और चुनाव में बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं.

एक अनुमान के टोंक में कुल 2.20 लाख वोटरों में से 70 हजार मुस्लिम हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस की प्रत्याशी जकिया की जमानत जब्त हो गई थी और वो तीसरे स्थान पर रही थीं.

bjp vs congress

2018 चुनाव में कांग्रेस ने 15 और बीजेपी ने 1 मुस्लिम उम्मीदवार बनाए हैं 

2013 में बीजेपी ने 4 मुस्लिमों को टिकट दिया था जिनमें से युनुस खान और हबीबुर्रहमान (नागौर) को जीत हासिल हुई थी. पार्टी ने इस बार हबीबुर्रहमान को मौका नहीं दिया, जिससे नाराज होकर वो कांग्रेस में शामिल हो गए. कांग्रेस ने उन्हें नागौर सीट से ही टिकट दिया है.

यहां बीते 4 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 64 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जिनमें से 26 को जीत मिली. दूसरी तरफ इस दौरान बीजेपी की ओर से खड़े किए 14 मुस्लिम कैंडिडेट में से 6 ने जीत हासिल की. इस लिहाज से देखें तो कांग्रेस की बजाए बीजपी में मुस्लिम उम्मीदवारों के चुनाव जीतने का प्रतिशत ज्यादा है.

राजस्थान की सियासत का एक दिलचस्प पहलू यह है कि यहां एक मुस्लिम नेता भी मुख्यमंत्री रहा है. कांग्रेस सरकार में बरकतुल्ला खान दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. पहली बार उन्होंने 9 जुलाई, 1971 से लेकर 11 अगस्त, 1973 तक सरकार का नेतृत्व किया था. मुस्लिमों की आबादी के लिहाज से कहा जा सकता है कि इतने वर्षों के चुनावी इतिहास में केवल एक ही मुस्लिम का यहां का मुख्यमंत्री बनना कम है.

हर बार चुनाव में मुस्लिमों की मांग होती है कि पार्टियां उन्हें उनकी आबादी के अनुपात में टिकट दें, मगर इस बार हालत पहले जैसे हैं. दोनों बड़ी पार्टियों ने सबसे कम संख्या में मुस्लिमों को टिकट दिया है.

राजस्थान की सभी 200 सीटों पर एक ही चरण में 7 दिसंबर को वोटिंग होनी है. 11 दिसंबर को 4 अन्य चुनावी राज्यों के साथ ही राजस्थान के चुनावी नतीजे घोषित होंगे.

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