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राजस्थान गौरव यात्रा: मुश्किल हो रही डगर, सुहाना नहीं है सफर

राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की राजस्थान गौरव यात्रा में सरकारी पैसे के इस्तेमाल के आरोपों पर बीजेपी से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है

Updated On: Aug 20, 2018 06:31 PM IST

Mahendra Saini
स्वतंत्र पत्रकार

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राजस्थान गौरव यात्रा: मुश्किल हो रही डगर, सुहाना नहीं है सफर
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वसुंधरा राजे 15 साल में तीसरी बार राजस्थान में राजनीतिक रथयात्रा निकाल रही हैं. मुख्यमंत्री धार्मिक स्वभाव की हैं, कर्मकांड में खासा भरोसा करती हैं और संयोगों का अच्छे से ख्याल रखती हैं. यही वजह है कि इस बार भी उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत उदयपुर संभाग के चारभुजा नाथ से ही शुरू की है. लेकिन 4 अगस्त से शुरू हुई यात्रा में ये पहली बार है जब उनकी यात्रा को लेकर नकारात्मक खबरें ज्यादा बाहर आ रही हैं.

यात्रा की शुरुआत से ही कांग्रेस ने इस पर हल्ला बोलना शुरु कर दिया था. यात्रा में भीड़ दिखाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लाने के आरोप लगे. 40 दिन की यात्रा के लिए कांग्रेस ने 40 सवाल भी तैयार किए. हालांकि किसी ने कभी इन सवालों का जवाब नहीं दिया. लेकिन अब हाईकोर्ट यात्रा के खर्च को लेकर जवाब मांग रहा है. आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जर भी अपने इलाकों में यात्रा के बहिष्कार का ऐलान कर रहे हैं. गुर्जरों की धमकी के बाद यात्रा का शेड्यूल ही बदल दिया गया है. इससे पहले, भारत वाहिनी पार्टी के घनश्याम तिवाड़ी ने बीजेपी पर नाम चुराने का आरोप लगाया.

हाईकोर्ट ने पूछा- यात्रा किसकी, पैसा किसका ?

राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की राजस्थान गौरव यात्रा में सरकारी पैसे के इस्तेमाल के आरोपों पर बीजेपी से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है. शनिवार यानी 18 अगस्त को कोर्ट ने आदेश दिया कि सोमवार यानी 20 अगस्त तक ये विस्तृत शपथ पत्र पेश किया जाए. इस शपथ पत्र में बीजेपी को बताना होगा कि यात्रा पर अब तक कितना खर्च हुआ और कुल कितना बजट बनाया गया. मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को है.

Raj gaurav yatra

डॉ विभूति भूषण शर्मा और सवाई सिंह की ओर से दाखिल याचिकाओं पर चीफ जस्टिस प्रदीप नांद्रजोग और न्यायाधीश जी आर मूलचंदानी ने ये आदेश दिए हैं. इस पर बहस भी जोरदार रही. बीजेपी ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए ज्यादा समय दिए जाने की मांग की थी. दरअसल, सरकार की तरफ से कहा गया था कि ये यात्रा सरकार की न होकर बीजेपी की है. चूंकि मुख्यमंत्री खुद इस यात्रा में शामिल हो रही हैं इसलिए प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षाकर्मी और उनका स्टाफ साथ रहता है.

लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एक तरफ इस यात्रा को बीजेपी की बताया जा रहा है जबकि यात्रा के साथ सरकारी कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं. दूसरी तरफ, सरकारी कार्यक्रमों या यात्रा के खर्च का खुलासा भी नहीं किया जा रहा. क्या इसे सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं कहा जाना चाहिए ?

क्यों बदला यात्रा कार्यक्रम ?

राजस्थान गौरव यात्रा के साथ इसबार सबकुछ ठीक नहीं हो रहा है. अब यात्रा के भरतपुर संभाग का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा है. इसके बजाय मुख्यमंत्री अब 24 अगस्त से जोधपुर संभाग के जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, पाली, जालौर और सिरोही जिलों में जाएंगी. थार की वैष्णों देवी कही जाने वाली जैसलमेर के तनोट माता मंदिर में पूजा पाठ के बाद यात्रा के इस चरण की शुरुआत होगी.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि राजस्थान गौरव यात्रा के कार्यक्रम में आखिर बदलाव क्यों करना पड़ा? बीजेपी के मीडिया प्रभारी विमल कटियार का कहना है कि भरतपुर संभाग को फिलहाल छोड़ने की वजह पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का निधन है. कटियार के मुताबिक 16 अगस्त से भरतपुर संभाग का यात्रा कार्यक्रम था लेकिन उस दिन मुख्यमंत्री को दिल्ली जाना पड़ा. इसलिए पूरे शेड्यूल को बिगड़ने से बचाने के लिए फिलहाल यात्रा को भरतपुर के बजाय जोधपुर ले जाने का कार्यक्रम तैयार किया गया.

अब सवाल ये है कि क्या ये पूरा सच है? शायद नहीं क्योंकि जानकारों का कहना है कि भरतपुर संभाग में गुर्जरों के विरोध के चलते फौरी तौर पर ये समाधान निकाला गया है. दरअसल, गुर्जरों ने आरक्षण और अपनी दूसरी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को पिछले दिनों अल्टीमेटम दिया था. इसके फौरन बाद सरकार ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया और देवनारायण योजना के कई बचे कामों का ऐलान भी किया. लेकिन कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने सरकार पर गुर्जर आरक्षण समिति में फूट डालने की कोशिशों का आरोप लगाया. बैंसला ने गुर्जर बाहुल्य इलाकों में मुख्यमंत्री की यात्रा का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया था. सवाई माधोपुर में वे धरने पर बैठ भी चुके थे. इसी से शायद सरकार घबरा गई.

vasundhra

...इधर कांग्रेस में बंपर खुशी

जयपुर में रोड शो में जुटी भीड़ से उत्साहित कांग्रेस अब एकबार फिर राहुल गांधी को बुलाने की तैयारी कर रही है. राहुल गांधी को अगले महीने कांग्रेस की संकल्प रैलियों के समापन समारोह में बुलाने की योजना पर काम चल रहा है. ये पहला मौका होगा जब कांग्रेस अध्यक्ष लगातार 2 महीनों में जयपुर की यात्रा करेंगे.

बीजेपी की राजस्थान गौरव यात्रा के जवाब में कांग्रेस ने जिला स्तरीय संकल्प रैलियों की योजना बनाई है. शनिवार को दिल्ली में राहुल गांधी की प्रदेश अध्यक्षों के साथ हुई बैठक में इन संकल्प रैलियों को मंजूरी दे दी गई. बताया जा रहा है कि 24 अगस्त को कांग्रेस भी बीजेपी की तरह उदयपुर संभाग से ही इसकी शुरुआत करेगी. चित्तौड़गढ़ के सांवलिया जी में पहली संकल्प रैली आयोजित होगी. इसके बाद 28 अगस्त को चूरू, 5 सितंबर को बाड़मेर, 10 सितंबर को करौली और 2 दिन बाद 12 सितंबर को नागौर में कांग्रेस बड़ी रैली करेगी.

खुद प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट इन सभी रैलियों में शिरकत करेंगे. पायलट के मुताबिक संभागवार रैलियों में अशोक गहलोत, सीपी जोशी, भंवर जितेंद्र सिंह, रामेश्वर डूडी जैसे सीनियर नेता भी मौजूद रहेंगे. इन दिनों राजस्थान कांग्रेस खुद के अच्छे दिन मानकर चल रही है. कांग्रेस के सदस्यता अभियान के लिए बनाए गए शक्ति ऐप के जरिए देश में सबसे ज्यादा 5 लाख 76 हजार लोग राजस्थान से ही जोड़े गए हैं.

कांग्रेस की खुशी को कुछ दिन पहले आए एक सर्वे ने भी बढ़ा दिया है. इसमें बताया गया था कि आने वाले चुनाव में कांग्रेस 130 से ज्यादा सीट जीत सकती है जबकि बीजेपी को 100 से भी ज्यादा सीटों का नुकसान हो सकता है. लेकिन सचिन पायलट के लिए ये सर्वे एक मुश्किल जरूर लाया है. राजस्थान में सिर्फ 18% लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर पसंद किया है जबकि अशोक गहलोत को पसंद करने वालों की संख्या 42% से ज्यादा है. कई लोगों का तो ये भी कहना है कि अगर गहलोत को प्रोजेक्ट कर दिया जाए तो बीजेपी 30 से भी कम सीटों पर सिमट कर रह जाएगी.

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