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बाड़मेर रिफाइनरी: 2013 में शिलान्यास, आज होगा ‘कार्य शुभारंभ’

2013 में बाड़मेर के पचपदरा में बनने वाली रिफाइनरी का शिलान्यास सोनिया गांधी ने किया था

FP Staff Updated On: Jan 16, 2018 10:58 AM IST

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बाड़मेर रिफाइनरी: 2013 में शिलान्यास, आज होगा ‘कार्य शुभारंभ’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राजस्थान के बाड़मेर में देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का शुभारंभ करेंगे. बताया जा रहा है कि यह पहली बार है कि कोई भारतीय प्रधानमंत्री किसी सरकारी प्रोजेक्ट का ‘शिलान्यास’ न करके ‘कार्य शुभारंभ’ करेंगे.

2013 में बाड़मेर के पचपदरा में बनने वाली रिफाइनरी का शिलान्यास सोनिया गांधी ने किया था. कांग्रेस अब सवाल उठा रही है कि इस प्रोजेक्ट का जब पहले ही शिलान्यास हो चुका है तो दोबारा क्यों करवाया जा रहा है. 2013 में जब चुनाव आचार संहिता लगने वाली थी. उससे ठीक पांच दिन पहले कांग्रेसी सरकार ने सोनिया गांधी को बुलवाकर शिलान्यास का आयोजन करवाया था. आचार संहिता के बाद प्रोजेक्ट टल गया लेकिन प्रदेश चुनावों से ठीक पहले अब बीजेपी ने इस रिफाइनरी का शुभारंभ करने जा रही है.

आरोपों से बचने के लिए बीजेपी शिलान्यास के बजाए रिफाइनरी का कार्य शुभारंभ करने की बात कर रही है. प्रचार के लिए राज्य सरकार की तरफ से बड़े-बड़े होर्डिंग्स भी लगा दिए गए हैं. बीजेपी चेतना रथ निकाल कर पूरे राज्य में इस प्रोजेक्ट का प्रचार गाजे-बाजे के साथ कर रही है.

दरअसल बाड़मेर जिले के पचपदरा में बनने वाली इस रिफाइनरी को लेकर प्रदेश का सियासी माहौल खासा गरम है. प्रदेश में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट के उपचुनाव के कारण भी विपक्षी दलों ने इस मौके पर प्रधानमंत्री को बुलाने पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर निशाना साधा है. विपक्ष इसे आचार संहिता का उल्लंघन भी बता रहा है.

राज्य में इस महीने के अंत में अजमेर और अलवर लोकसभा सीट के साथ ही मांडलगढ़ विधानसभा सीट का उपचुनाव होगा. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का आरोप है कि वसुंधरा सरकार की छवि जनता में बिगड़ गई है इसलिए अब प्रदेश बीजेपी को उपचुनावों में भी प्रधानमंत्री का सहारा लेना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री उपचुनाव से पहले एक बार फिर 22 जनवरी को प्रदेश के झुंझनूं जिले में एक कार्यक्रम में आएंगे.

गहलोत ने पीएम को लिखा खत, वसुंधरा से माफी मांगने को कहा

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस रिफाइनरी को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को ख़त लिख कर बता चुके हैं कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 2013 में ही इसका शिलान्यास कर चुकी हैं. इसके बाद प्रदेश की बीजेपी सरकार ने विवादों से बचने के लिए शिलान्यास की जगह ‘कार्य शुभारंभ’ नाम का इस्तेमाल किया.

गहलोत का आरोप है कि बीजेपी सरकार ने इस रिफाइनरी को चार साल देर से शुरू करवा कर प्रदेश की जनता के साथ धोखा किया है. गहलोत का कहना है कि समारोह का नाम बदल कर मुख्यमंत्री राजे अपना चेहरा बचाना चाहती हैं.

गहलोत ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी (26 प्रतिशत) को लेकर बार-बार हल्ला कर प्रदेशवासियों को भ्रमित करती रही कि जमीन हमारी, तेल हमारा और पानी भी हमारा, फिर भी 26 प्रतिशत हिस्सेदारी ही क्यों? अब मैं उनसे यही सवाल कर रहा हूं कि नये सहमति ज्ञापन में भी रिफाइनरी में हिस्सेदारी का प्रतिशत 26 प्रतिशत से ज्यादा क्यों नहीं बढ़ाया?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि रिफाइनरी में चार साल की देरी के परिणामस्वरूप राजस्थान के हजारों युवाओं को रोजगार से वंचित होना पड़ा और राजस्थान सरकार को राजस्व के रूप में भारी हानि हुई और साथ ही पेट्रो केमिकल कॉम्पलेक्स से जुड़े हजारों सहयोगी लघु उद्योग तथा रोजगार सृजन में भी देरी हुई. इस नुकसान का जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता और प्रदेश के नौजवानों के साथ धोखा हमने नहीं बल्कि रिफाइनरी सहित कांग्रेस की तमाम महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लटकाकर बीजेपी सरकार ने किया है, जिसके लिए मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए.

दूसरी ओर प्रदेश बीजेपी इसे जनता के हित में बता रही है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पिछले कई दिनों से बाड़मेर जिले में डेरा डाले हुए है. प्रधान का कहना है कि साढ़े 43 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली वाली इस रिफाइनरी का काम चार साल में पूरा हो जाएगा.

बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष परनामी ने हाल ही एक बार फिर कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने प्रदेश को कर्ज में डुबोने वाला करार किया था. उन्होंने कहा कि रिफाइनरी के मामले में पिछली कांग्रेस सरकार ने 56 हजार करोड़ का एमओयू कर प्रदेश को कर्ज में डुबोने वाला था. जबकि सीएम राजे के कुशल वित्तीय प्रबंधन से प्रदेश को इस कर्ज के बड़े संकट से बचाते हुए 16 हजार करोड़ का एमओयू किया गया है.

पचपदरा रिफाइनरी की खासियत

— बाड़मेर की धरती में करीब 4 अरब बैरल तेल का खजाना है.

— पचपदरा रिफाइनरी से रोज 200 कुओं से करीब 1.75 लाख बैरल तेल उत्पादन किया जाएगा.

— यह रिफाइनरी ईको फ्रेंडली होगी.

— रिफाइनरी की क्षमता सालाना 90 लाख टन कच्चा तेल रिफाइन करने की है

— जिसमें से 25 लाख टन कच्चा तेल बाड़मेर में और बाकी का 65 लाख टन कच्चा तेल गुजरात से आएगा.

— इसमें एक पेट्रोकेमिकल कांप्लेक्स भी होगा.

— पहले बाड़मेर का कच्चा तेल रिफाइन होने के लिए गुजरात जाता था, पचपदरा में पेट्रोकैमिकल हब बनने से तेल रिफाइन होकर 6 पेट्रोलियम उत्पादों में बदल जाएगा जो बीएस-6 मानक के हिसाब से होगा.

— रिफाइनरी का निर्माण एचपीसीएल और राजस्थान सरकार करवा रही है.

— राज्य सरकार के अनुसार रिफाइनरी से करीब 15 हजार लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है.

( साभार: न्यूज18 के इनपुट के साथ )

 

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