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राजस्थान बीजेपी को शाह का सहारा, लेकिन कांग्रेस की अपनी मुश्किलें भी कम नहीं

बीजेपी की हालत रादस्थान में पतली है. अमित शाह की नजर वहीं टिकी हुई है. उधर कांग्रेस भी अपनी स्थिति मजबूत बना रही है

Updated On: Sep 16, 2018 11:07 AM IST

Vijai Trivedi Vijai Trivedi
वरिष्ठ पत्रकार

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राजस्थान बीजेपी को शाह का सहारा, लेकिन कांग्रेस की अपनी मुश्किलें भी कम नहीं
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राजस्थान में इस बार अभी तक बारिश चल रही है और बारिश के मौसम की खास मिठाई है घेवर. जयपुर समेत प्रदेश के ज्यादातर शहरों में मिठाई की दुकानों पर आपको घेवर के पहाड़ बने दिख जाएंगे और ताजा गर्म बनते हुए घेवर भी. शहर के हर रास्ते में घेवर की महक आपको ललचाती है, कहीं मलाई घेवर, कहीं मावा घेवर और कहीं केसर घेवर.

जयपुर के एक मशहूर कैटरर्स ने अभी घेवर को लेकर एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. ज्ञानजी कैटरर्स ने इस रिकार्ड के लिए 120 किलो वज़न और 6 मीटर व्यास का घेवर बनाया है. वैसे तो रिकॉर्ड बनाने के लिए सिर्फ 20 किलो का घेवर बनाकर भी काम चल सकता था, लेकिन उन्होंने 120 किलो का घेवर बना कर ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जिसे तोड़ने में लगता है फिलहाल वक्त लगेगा.

जिन लोगों ने कभी घेवर बनते देखा होगा, वे जानते हैं कि घेवर बनाने का काम आसान नहीं होता. उसमें मैदा को खास तौर से तैयार किया जाता है, उसके बाद छोटी सी कटोरी से एक ही रफ्तार से घोल को कढ़ाई में डाल कर घेवर बनता है. इसमें बनाने वाले का अनुभव, हाथ की रफ्तार और बिना रुके काम करना शामिल होता है, इसमें से किसी में भी चूक हुई तो फिर मामला गड़बड़ है.

घेवर बनाने और राजनीति करने में ज्यादा फर्क नहीं

घेवर बनाने की रेसिपी का जिक्र इसलिए किया क्योंकि राजनीति में वो बेहद कारगर साबित हो सकता है. प्रदेश के चुनावों में भी वो ही जीत हासिल कर सकता है जो पार्टी घेवर बनाने वाले कारीगर की तरह से हो, अनुभवी, रफ्तार के साथ बिना रुके काम करने वाली.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट अपनी पार्टी के लिए पिछले चार साल से संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी तैयारी में लगे हैं. पायलट के साथ अनुभवी दिग्गज अशोक गहलोत भी हैं और दूसरे अनुभवी नेता सी पी जोशी हैं. कांग्रेस इन तीनों नेताओं को साथ दिखाने की कोशिश में भी लगी है. आजकल कांग्रेस रैलियों के लिए बस यात्रा कर रही है. इन बसों में नेता साथ-साथ जाते हैं. पिछले दिनों एक फोटो जारी की गई इसमें सचिन पायलट और अशोक गहलोत बस की सीट पर साथ-साथ बैठे हैं और पीछे की सीट पर सी पी जोशी हैं. तीनों के चेहरे से मुस्कराहट गायब थी. फिर दूसरी फोटो जारी की गई जिसमें तीनों के चेहरे पर मुस्कराहट थी.

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जोशी साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बस की पिछली सीट पर ही बैठे रह गए थे और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बन गए. इस बार ये डर पायलट को भी है कि कहीं फिर से बाजी अशोक गहलोत के हाथ ना लग जाए. हालांकि, दिल्ली में बैठे पार्टी आलाकमान ने गहलोत को निर्देश दिया कि उनकी जरूरत केंद्रीय राजनीति में है.

पायलट और गहलोत में से ड्राइवर कौन?

करौली की रैली में बस के अटकने के बाद पायलट मोटरसाइकिल पर अशोक गहलोत को पीछे बिठाकर ले गए, यह फोटो भी जारी हुई. इस फोटो का बहुत से लोग अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं कि क्या पायलट ने गहलोत को बैकसीट पर बिठा दिया है या फिर पायलट ही ड्राइवर बनेंगे, गहलोत की गाड़ी को सीएम आवास तक पहुंचाने के लिए. कांग्रेस ने इस बार के लिए 200 सीटों वाली विधानसभा में अपने लिए 135 सीटों का लक्ष्य रखा है. हालांकि, अभी उसके सिर्फ 21 विधायक हैं और 2008 में भी 96 विधायक चुनकर आए थे जब जोड़-तोड़कर सरकार बनाई थी. पिछले लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी, यदि इस बार प्रदेश में सरकार बनती हैं तो उसका फायदा आम चुनावों में भी होगा.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी इस हफ्ते जयपुर में थे. शाह ने कांग्रेस पर हमला बोला कि कांग्रेस आलाकमान अभी तक सीएम उम्मीदवार तय नहीं कर पाया है तो पायलट ने जवाब दिया कि शाह तो अपनी पसंद का प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष भी नहीं बनवा पाए. इस साल होने वाले राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को सबसे मुश्किल मुकाबला राजस्थान में लग रहा है, इसलिए अमित शाह राजस्थान पर फोकस किए हुए हैं. उन्होंने वसुंधरा सरकार को अंगद का पांव कहा है, जिसे कोई हिला नहीं सकता, लेकिन संगठन और सरकार के भीतर परिवार में जो महाभारत चल रहा है, उससे अमित शाह अनजान नहीं हैं.

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अनुभवी राजनेता के तौर पर सीएम वसुंधरा राजे ने चुनावी मौसम में घोषणाओं की भरपूर बारिश कर दी है. पेट्रोल और डीजल की कीमत से वैट कम कर दिया है. सरकारी कर्मचारियों का डीए बढ़ा दिया है. एक करोड़ बीपीएल लोगों को मुफ्त में मोबाइल बांटे जा रहे हैं. राजे की हरसंभव कोशिश है कि वो राजस्थान के चुनावी इतिहास का रिकॉर्ड तोड़कर इस बार दोबारा सरकार बना लें, वरना वहां हर बार सरकार बदल जाती है. बीजेपी अध्यक्ष शाह की चिंता राजस्थान के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ उसके बाद होने वाले आम चुनावों की है यदि सरकार फिर से नहीं बनी तो आम चुनाव में पिछली बार की तरह सभी 25 संसदीय सीटों पर बीजेपी का कब्जा होना मुश्किल होगा.

फर्जी वोटरों की परेशानी अलग से

एक और मुश्किल है इन चुनावों में अभी जयपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी ने किसी संस्था के माध्यम से सर्वेक्षण कराया, तो पता चला है कि अकेले जयपुर शहर में एक लाख 13 हजार फर्जी वोटर हैं, हर विधानसभा सीट पर तीन से 13 हजार तक फर्जी वोटर. ये फर्जी वोट चुनावी नतीजों को बदलने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं, खासतौर से विधानसभा चुनावों में, क्योंकि इनमें जीत का अंतर ज्यादा नहीं होता.

राजस्थान सरकार और कांग्रेस में भी ज्यादातर नेता छात्र राजनीति से आए हैं. अशोक गहलोत खुद एनएसयूआई के अध्यक्ष रह चुके हैं. विश्वविद्यालयों और कालेज छात्रसंघ के बहुत से नेता राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन हाल में हुए इन छात्र संगठनों के चुनावों में विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई के मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवारों ने ज्यादा जीत हासिल की है. ये नतीजे दोनों पार्टियों के लिए चिंता का सबब हो सकते हैं.

चुनावों में एक और अहम चीज होती है चुनावी खर्च के लिए जरूरी पैसा. बीजेपी को तो फिलहाल कोई दिक्कत नहीं दिखती, लेकिन कांग्रेस को इसके लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. राजस्थान में आमतौर पर कहा जाता है कि मकान बनाने और बेटी के ब्याह में पैसा तय बजट से ज्यादा ही खर्च होता है, ये बात अब चुनावों के लिए भी कही जा सकती है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे Vijaitrivedi007@gmail.com ईमेल आईडी पर संपर्क किया जा सकता है)

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